अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@pkray11)

संयुक्त राष्ट्र में ईरान का बड़ा आरोप—अमेरिका-इजरायल के हमलों में 1332 नागरिकों की मौत,बच्चों और स्कूलों को भी बनाया गया निशाना

संयुक्त राष्ट्र,7 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने दावा किया कि हालिया हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 1332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है,जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों में नागरिक क्षेत्रों और बुनियादी ढाँचे को जानबूझकर निशाना बनाया गया,जो अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।

इरावानी ने बताया कि यह आंकड़े ईरान की राहत और मानवीय संस्था ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से सामने आए हैं। उनके अनुसार देशभर में 180 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है और 20 से अधिक स्कूलों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इन हमलों के कारण आम नागरिकों की जिंदगी पर गहरा असर पड़ा है और कई शहरों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य केवल सैन्य प्रतिष्ठान नहीं,बल्कि आम नागरिक और नागरिक ढांचा भी रहा है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से यह स्पष्ट हो गया है कि हमलावर देश अपने सैन्य अभियानों में किसी भी तरह की “लाल रेखा” का पालन नहीं कर रहे हैं। इरावानी के मुताबिक ईरान के कई बड़े शहरों में अंधाधुंध हवाई हमले किए गए हैं,जिनमें घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों और नागरिक संस्थानों को भी निशाना बनाया गया।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को लक्ष्य बनाना और जरूरी सार्वजनिक ढाँचे को नष्ट करना अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध तथा मानवता के खिलाफ अपराध माना जा सकता है। ईरानी राजदूत ने यह भी बताया कि अब तक देश में 13 स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमले किए जा चुके हैं। अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र जैसे संस्थान युद्ध की स्थिति में भी संरक्षित माने जाते हैं,लेकिन इन हमलों में ऐसे संस्थानों को भी नुकसान पहुँचा है।

इरावानी ने गुरुवार को हुए ताजा हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में कई नागरिक खेल और मनोरंजन स्थलों को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार इन हमलों में 18 से अधिक महिला एथलीटों की मौत हो गई,जबकि लगभग 100 अन्य लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि हमले केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित नहीं हैं।

ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि अमेरिका और इजरायल का उद्देश्य स्पष्ट रूप से नागरिकों में भय और आतंक का माहौल पैदा करना है। उनके अनुसार यह रणनीति आम लोगों को मानसिक रूप से तोड़ने और देश में व्यापक विनाश फैलाने के लिए अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता और इसे तथ्यों के आधार पर खारिज किया जा सकता है।

इस दौरान इरावानी ने यह भी कहा कि ईरान अपने आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग करना जारी रखेगा। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर अनुच्छेद 51 के तहत किसी भी देश को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त है। ईरान इसी प्रावधान के तहत जवाबी कार्रवाई कर रहा है और तब तक करता रहेगा जब तक उस पर हो रहे हमले बंद नहीं हो जाते।

ईरानी राजदूत के अनुसार ईरान की प्रतिक्रिया पूरी तरह “कानूनी,आवश्यक और अनुपातिक” है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य केवल हमलावर देशों के सैन्य ठिकाने हैं और इसका उद्देश्य नागरिकों को नुकसान पहुँचाना नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहता,लेकिन अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता भी नहीं करेगा।

इरावानी ने कहा कि ईरान अपने लोगों,अपने क्षेत्र और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं करेगा।

इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। इरावानी ने कहा कि किसी भी विदेशी नेता द्वारा ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चुनाव से संबंधित टिप्पणी करना अंतर्राष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। उन्होंने इसे किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत के खिलाफ बताया,जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर का एक महत्वपूर्ण आधार है।

इरावानी ने कहा कि ईरान किसी भी विदेशी शक्ति को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का राजनीतिक और संवैधानिक ढाँचा पूरी तरह स्वतंत्र है और इसके निर्णय ईरानी जनता और उनके संस्थानों द्वारा ही लिए जाते हैं।

ईरानी राजदूत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और मौजूदा स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाए। उन्होंने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे इन हमलों की निंदा करें और क्षेत्र में बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल कार्रवाई की माँग की। उनके अनुसार सुरक्षा परिषद को इस मामले में स्पष्ट और बिना देरी के निर्णय लेना चाहिए,क्योंकि यह संघर्ष क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

मध्य पूर्व पहले से ही कई भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र रहा है और हालिया घटनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस संघर्ष को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया,तो इसका असर वैश्विक राजनीति,ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ और प्रमुख शक्तियाँ इस संकट को कम करने और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल ईरान द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर मध्य पूर्व की ओर खींच लिया है और इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।