नई दिल्ली,9 मार्च (युआईटीवी)- लगभग चार दशक पहले शहीद हुए एक सैनिक के अवशेषों की तलाश में इजरायल के विशेष बलों द्वारा दक्षिणी लेबनान के एक गाँव में सैन्य अभियान चलाने के बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया।
रिपोर्टों के अनुसार,इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) के सैनिक 1980 के दशक में इजरायली सेना और लेबनान के सशस्त्र समूहों के बीच हुए संघर्षों के बाद से लापता सैनिक के अवशेषों का पता लगाने के उद्देश्य से एक गुप्त अभियान के तहत गाँव में दाखिल हुए। यह अभियान जल्द ही स्थानीय लड़ाकों के साथ हिंसक झड़प में बदल गया।
छापेमारी के दौरान भारी गोलीबारी और झड़पें हुईं,जिनमें दर्जनों लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार,लड़ाई गाँव के कुछ हिस्सों में फैलने से इलाके में भारी नुकसान हुआ है।
इजरायली अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान लंबे समय से लापता सैनिक के अवशेषों को बरामद करने पर केंद्रित था,जिसके बारे में उनका मानना है कि वह अभी भी क्षेत्र में कहीं मौजूद हो सकता है। वहीं,लेबनानी अधिकारियों ने इस छापेमारी की निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया और चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई सीमा पर तनाव को और बढ़ा सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर इजरायल और लेबनान के बीच नाजुक सुरक्षा स्थिति को उजागर किया है,जहाँ ऐतिहासिक संघर्ष और पिछले युद्धों के अनसुलझे मुद्दे आज भी संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं। हताहतों और छापेमारी की परिस्थितियों की जाँच जारी है।
