राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति मुर्मु के बंगाल दौरे पर प्रोटोकॉल विवाद,राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय को भेजा विस्तृत स्पष्टीकरण

कोलकाता,9 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के हालिया दौरे को लेकर उत्पन्न प्रोटोकॉल विवाद अब केंद्र और राज्य के बीच चर्चा का विषय बन गया है। राज्य सरकार ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपना विस्तृत स्पष्टीकरण भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार,राज्य प्रशासन ने गृह मंत्रालय द्वारा उठाए गए सभी सवालों का बिंदुवार जवाब दिया है और यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान किसी भी प्रकार का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ।

यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कुछ व्यवस्थाओं और कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर चर्चा शुरू हुई। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट माँगी। गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव के कार्यालय को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण देने के लिए समय सीमा भी तय की थी और उसी दिन शाम तक जवाब माँगा गया था।

सूत्रों के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव कार्यालय ने निर्धारित समय के भीतर गृह मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी। हालाँकि,रिपोर्ट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने केवल इतना बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर विस्तार से जवाब दिया गया है और यह स्पष्ट किया गया है कि प्रोटोकॉल के नियमों का पालन किया गया था।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रविवार शाम को कहा कि राष्ट्रपति के आगमन के दौरान प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक अधिकारी बागडोगरा हवाई अड्डे पर मौजूद थे और उनका विधिवत स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर,दार्जिलिंग जिले के जिला मजिस्ट्रेट और सिलीगुड़ी महानगर पुलिस के कमिश्नर एयरपोर्ट पर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि चूँकि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी वहाँ मौजूद थे,इसलिए प्रोटोकॉल उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यक्रम के अनुसार उनका स्वयं एयरपोर्ट पर जाकर राष्ट्रपति का स्वागत करने या कार्यक्रम के मंच पर मौजूद रहने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने पूरी जिम्मेदारी के साथ आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन किया और किसी भी नियम की अनदेखी नहीं की गई।

राष्ट्रपति का यह दौरा मूल रूप से शुक्रवार को होना था। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें उत्तर बंगाल पहुँचना था,लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से उनकी यात्रा को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। बाद में वह शनिवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे बागडोगरा हवाई अड्डे पर पहुँचीं। एयरपोर्ट पर औपचारिक स्वागत के बाद उन्हें दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी के पास फांसिदेवा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होना था।

यह कार्यक्रम आदिवासी समुदाय से जुड़ा हुआ था और स्थानीय स्तर पर इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालाँकि,कार्यक्रम स्थल को लेकर अचानक बदलाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। जानकारी के अनुसार पहले कार्यक्रम फांसिदेवा में आयोजित होना था,लेकिन बाद में इसे गोसाईपुर में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। इसी बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

बताया जाता है कि कार्यक्रम स्थल में बदलाव की सूचना और व्यवस्था को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी। इस दौरान राष्ट्रपति ने भी इस मामले पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की। इसके बाद उन्होंने उस स्थान का दौरा करने का फैसला किया जहाँ मूल रूप से कार्यक्रम आयोजित होना था। वह फांसिदेवा पहुँचीं और वहाँ उपस्थित लोगों से मुलाकात की।

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्य प्रशासन की व्यवस्थाओं पर हल्की टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन जैसी हैं,लेकिन यह भी उल्लेख किया कि उनके इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री या उनके मंत्रिमंडल का कोई सदस्य उनसे मिलने नहीं आया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसी राज्य के दौरे के दौरान राज्य सरकार के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ नेता राष्ट्रपति से मुलाकात करते हैं और यह एक स्थापित परंपरा मानी जाती है।

राष्ट्रपति के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म हो गया। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार की आलोचना की और कहा कि राष्ट्रपति के साथ प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। वहीं राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने सभी औपचारिकताओं का पालन किया है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच मामला केंद्र सरकार के संज्ञान में पहुँचा। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट माँगीं। मंत्रालय ने यह भी जानना चाहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कौन-कौन से अधिकारी मौजूद थे और कार्यक्रम स्थल में बदलाव किन परिस्थितियों में किया गया।

गृह मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद राज्य प्रशासन ने तुरंत इस पर काम शुरू किया और सभी संबंधित विभागों से जानकारी जुटाई। इसके बाद मुख्य सचिव के कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके केंद्र को भेजी गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति के किसी राज्य दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि यह केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं से जुड़ा मामला होता है। ऐसे मामलों में छोटी-सी चूक भी राजनीतिक विवाद का रूप ले सकती है।

फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि उसने सभी नियमों का पालन किया है और केंद्र को भेजे गए स्पष्टीकरण में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी स्तर पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं हुआ। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि गृह मंत्रालय राज्य सरकार की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे क्या रुख अपनाता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक संबंध पहले से ही काफी संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा यह विवाद केवल प्रशासनिक मुद्दा ही नहीं,बल्कि राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर केंद्र की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों के रुख से यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।