मिनाब में आईआरजीसी नौसैनिक अड्डे पर हमले का नया वीडियो सामने आया (तस्वीर क्रेडिट@SputnikInt)

मिनाब में आईआरजीसी नौसैनिक अड्डे पर हमले का नया वीडियो सामने आया,टॉमहॉक मिसाइल जैसे हथियार के इस्तेमाल के संकेत

वाशिंगटन,9 मार्च (युआईटीवी)- ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसैनिक अड्डे पर हुए हमले से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आने के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है। यह वीडियो 28 फरवरी को हुए उस हमले से संबंधित बताया जा रहा है,जिसमें एक सैन्य अड्डे के साथ-साथ उसके पास स्थित एक प्राथमिक विद्यालय भी प्रभावित हुआ था। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में स्कूल के 160 से अधिक विद्यार्थियों की मौत हो गई थी,जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश और शोक फैल गया।

रिपोर्टों के अनुसार यह हमला ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर के नौसैनिक अड्डे पर हुआ था। यह अड्डा मिनाब शहर में स्थित है और उसके आसपास रिहायशी इलाके भी हैं। हमले के बाद सामने आए नए वीडियो में एक इमारत को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले को दिखाया गया है। वीडियो में स्पष्ट रूप से एक मिसाइल को अड्डे के भीतर स्थित एक भवन की ओर गिरते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो ईरान की सेमी-ऑफिशियल एजेंसी मेहर समाचार एजेंसी द्वारा साझा किया गया है और दावा किया गया है कि यह फुटेज उसी क्षेत्र के पास स्थित एक निर्माण स्थल से रिकॉर्ड किया गया था।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस वीडियो का विश्लेषण करते हुए दावा किया है कि इसमें दिखाई देने वाली मिसाइल अमेरिकी क्रूज मिसाइल जैसी लगती है। रिपोर्टों के अनुसार वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल की बनावट और उड़ान का तरीका काफी हद तक टोमाहॉक लैंड अटैक मिसाइल यानी टीएलएएम से मेल खाता है। यह एक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल होती है,जिसका इस्तेमाल आम तौर पर समुद्र से जमीन पर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस मिसाइल की पहचान इसके विशिष्ट आकार से की जा सकती है। इसमें क्रॉस के आकार का ढाँचा होता है,जिसमें बीच में पंख लगे होते हैं और पीछे की ओर एक टेल किट दिखाई देती है। इसी वजह से वीडियो देखने वाले कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल उसी श्रेणी की हो सकती है। जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के शोध सहयोगी सैम लेयर ने भी इस वीडियो का विश्लेषण करते हुए कहा कि फुटेज में दिखाई देने वाली मिसाइल कई मायनों में टॉमहॉक मिसाइल की विशेषताओं से मेल खाती है।

सैम लेयर ने एक अंतर्राष्ट्रीय मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि वीडियो की लोकेशन और मिसाइल की उड़ान से यह प्रतीत होता है कि एक क्रूज मिसाइल आईआरजीसी अड्डे के भीतर स्थित इमारतों में से एक को निशाना बनाकर दागी गई थी। हालाँकि,वीडियो में सीधे तौर पर स्कूल पर हमला होते हुए नहीं दिखता,लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अड्डे के आसपास स्थित इलाकों में हुए नुकसान का संबंध उसी सैन्य कार्रवाई से हो सकता है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इजराइल आम तौर पर टॉमहॉक मिसाइल का इस्तेमाल नहीं करता। इसी वजह से कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल वास्तव में टॉमहॉक श्रेणी की है तो यह संकेत अमेरिका की भूमिका की ओर भी इशारा कर सकता है। हालाँकि,इस मामले में अभी तक आधिकारिक रूप से किसी स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जाँच का परिणाम सामने नहीं आया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मिनाब के स्कूल पर हुए हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। उनका कहना था कि इस घटना के पीछे ईरान की ही आंतरिक सैन्य गतिविधियाँ या दुर्घटना जिम्मेदार हो सकती हैं,लेकिन कई मीडिया संस्थानों और विशेषज्ञों द्वारा किए गए विश्लेषण इस दावे से अलग संकेत देते नजर आ रहे हैं।

दूसरी ओर ईरान की सरकार ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि मिनाब के पास स्थित स्कूल पर हुआ हमला उसी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था,जिसमें आईआरजीसी के नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाया गया था। इस घटना के बाद ईरान में व्यापक विरोध और आक्रोश देखने को मिला है।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने भी इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया है। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों में अब तक कम-से-कम 1332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है। उनके अनुसार मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं,जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं।

ईरान का कहना है कि इन हमलों में कई रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक संस्थानों को भी नुकसान पहुँचा है। इसी वजह से तेहरान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस मामले की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की है। ईरान का आरोप है कि नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।

मिनाब हमले का यह नया वीडियो सामने आने के बाद अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इस घटना को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीडियो की पुष्टि हो जाती है और मिसाइल की पहचान स्पष्ट रूप से हो जाती है,तो इससे इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।

फिलहाल इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है,लेकिन इसके सामने आने से अमेरिका,ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं। पश्चिम एशिया पहले ही कई संघर्षों और तनावों का केंद्र बना हुआ है और ऐसे में इस तरह की घटनाएँ क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डाल सकती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब इस मामले में पारदर्शी जाँच और तथ्यों के सामने आने का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि मिनाब में हुए इस हमले के पीछे वास्तव में कौन जिम्मेदार था और इस घटना का क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।