सोना और चाँदी

डॉलर की मजबूती और महँगाई की आशंकाओं से सोना-चाँदी में गिरावट,बाजार में फेड की दर कटौती की उम्मीदें कमजोर

मुंबई,9 मार्च (युआईटीवी)- वैश्विक वित्तीय बाजारों में सोमवार को कीमती धातुओं के दामों में गिरावट दर्ज की गई। सोना और चाँदी,जिन्हें आमतौर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में सुरक्षित निवेश माना जाता है,इस बार उलट रुख में दिखाई दिए। अमेरिकी डॉलर की मजबूती,बढ़ती महँगाई की आशंकाओं और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण निवेशकों ने इन धातुओं से दूरी बनानी शुरू कर दी। परिणामस्वरूप घरेलू वायदा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय बाजार दोनों में सोना-चाँदी के दाम नीचे आ गए।

भारत के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज भारत का बहुवस्तु विनिमय यानी एमसीएक्स पर सोमवार को कारोबार के दौरान सोने और चाँदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। अप्रैल डिलीवरी वाला सोना वायदा गिरकर दिन के दौरान 1,59,826 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुँच गया। इसी तरह मई डिलीवरी वाली चाँदी वायदा भी गिरकर 2,60,743 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर पर आ गई।

दोपहर के आसपास के कारोबार में भी यह कमजोरी बनी रही। खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट करीब 881 रुपये या लगभग 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,60,678 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं 5 मई एक्सपायरी वाला सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट लगभग 3,378 रुपये या 1.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,64,907 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।

आमतौर पर जब वैश्विक तनाव बढ़ता है,तब निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और इससे सोना-चाँदी की कीमतों में तेजी आती है। हाल के दिनों में अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भी बाजार में यही उम्मीद की जा रही थी कि कीमती धातुओं के दाम और ऊपर जा सकते हैं,लेकिन इस बार बाजार की दिशा कुछ अलग रही और डॉलर की मजबूती ने इन धातुओं की चमक को कम कर दिया।

दरअसल,सोमवार को अमेरिकी मुद्रा यूनाइटेड स्टेट का डॉलर मजबूत होकर तीन महीने के उच्च स्तर 99.34 तक पहुँच गई। यह इंट्राडे आधार पर लगभग 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर सोने और चाँदी जैसी धातुओं की माँग पर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है,तो अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले इन धातुओं को खरीदना महँगा हो जाता है। परिणामस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों की माँग कमजोर पड़ती है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।

इसके साथ ही अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार में भी हलचल देखी गई। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड एक महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों को ब्याज मिलने वाले विकल्प अधिक आकर्षक लगने लगते हैं। चूँकि,सोना और चाँदी ब्याज नहीं देते,इसलिए बढ़ती यील्ड के दौर में इन धातुओं को होल्ड करने की लागत बढ़ जाती है और निवेशक अन्य परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।

इस बीच ऊर्जा बाजार में भी बड़ी हलचल देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और यह लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। यह 2022 के बाद पहली बार है जब प्रमुख तेल मानक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँचे हैं। तेल की कीमतों में यह तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण आई है।

तेल की कीमतों में तेजी का असर वैश्विक महँगाई पर भी पड़ सकता है। ऊर्जा लागत बढ़ने से परिवहन,उत्पादन और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है। इसी कारण बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती करने से बच सकता है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार फेडरल रिजर्व 18 मार्च से शुरू होने वाली अपनी दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। पहले उम्मीद की जा रही थी कि इस साल दरों में कटौती की जा सकती है,लेकिन बढ़ती महँगाई की आशंका ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। बाजार के अनुमान बताते हैं कि जून की बैठक में भी दरों को स्थिर रखने की संभावना बढ़कर 51 प्रतिशत से अधिक हो गई है,जबकि पिछले सप्ताह यह संभावना 43 प्रतिशत से कम थी।

कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने के लिए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर बने हुए हैं। घरेलू बाजार में लगभग 1,48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 1,53,000 रुपये का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। यदि कीमतें इन स्तरों के आसपास स्थिर रहती हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी का रुख बन सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोने को कुछ स्तरों पर मजबूत समर्थन मिल रहा है। न्यूयॉर्क स्थित कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स में लगभग 5,000 डॉलर के आसपास मजबूत खरीदारी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतर्राष्ट्रीय कीमतें 5,400 से 5,600 डॉलर के ऊपर स्थिर रहती हैं,तो सोना आने वाले समय में नए रिकॉर्ड स्तर भी बना सकता है।

चाँदी के मामले में भी बाजार विशेषज्ञों का दृष्टिकोण मध्यम और लंबी अवधि के लिए सकारात्मक बना हुआ है। चाँदी का उपयोग केवल निवेश के लिए ही नहीं,बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से होता है। सौर ऊर्जा,इलेक्ट्रॉनिक्स और नई ऊर्जा तकनीकों में चाँदी की माँग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों में सुधार होने पर चाँदी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति में कीमती धातुएँ लंबे समय में निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी रह सकती हैं। हालाँकि,अल्पकालिक अवधि में डॉलर की मजबूती,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और केंद्रीय बैंकों की नीतियाँ इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित करती रहेंगी।

फिलहाल बाजार की दिशा कई वैश्विक कारकों पर निर्भर है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव,तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और डॉलर की चाल—ये सभी तत्व आने वाले दिनों में सोना और चाँदी के बाजार को प्रभावित करेंगे। निवेशकों की नजरें अब आगामी आर्थिक आँकड़ों और केंद्रीय बैंक के फैसलों पर टिकी हुई हैं,जिनसे यह तय होगा कि कीमती धातुओं की कीमतें आगे किस दिशा में बढ़ेंगी।