पी. हरीश (तस्वीर क्रेडिट@VipinSemwal78)

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अफगानिस्तान पर हवाई हमलों की निंदा की,रमजान में हमले को बताया दोहरा मापदंड

संयुक्त राष्ट्र,10 मार्च (युआईटीवी)- पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव अब अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँच गया है। इस मुद्दे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अफगानिस्तान के इलाके में किए गए हवाई हमलों की तीखी निंदा की है। भारत ने कहा कि पवित्र रमजान के महीने में नागरिकों पर इस तरह के हमले करना न केवल अमानवीय है,बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का भी खुला उल्लंघन है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि एक ओर अंतर्राष्ट्रीय कानून और इस्लामिक एकता की बात करना और दूसरी ओर रमजान के पवित्र महीने में निर्दोष नागरिकों पर हवाई हमले करना स्पष्ट रूप से दोहरे मापदंड को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता के प्रयासों को कमजोर करते हैं।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी बताया कि इन हवाई हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार 6 मार्च 2026 तक कम से कम 185 आम नागरिक मारे जा चुके हैं,जिनमें लगभग 55 प्रतिशत महिलाएँ और बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।

हालाँकि,भारत के प्रतिनिधि ने अपने बयान में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया,लेकिन उनके शब्दों और संदर्भों से स्पष्ट था कि उनका इशारा किस देश की ओर है। भारत ने यह भी कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए और सीमा पार इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान के दौरान आतंकवाद के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद आज पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है और यह मानवता के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा,ताकि आतंकवादी संगठनों को किसी भी प्रकार की शरण या समर्थन न मिल सके।

भारत ने अपने बयान में कई प्रमुख आतंकवादी संगठनों का भी उल्लेख किया। इनमें इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांत,अल-कायदा,लश्कर-ए-तैबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन शामिल हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इन संगठनों के नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई आवश्यक है।

उन्होंने विशेष रूप से प्रतिरोध मोर्चा का भी जिक्र किया,जिसे लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है। भारत ने याद दिलाया कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए एक आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली थी। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी और यह हमला धार्मिक प्रेरणा से किया गया बताया गया था। भारत ने कहा कि ऐसे संगठनों को समाप्त करना वैश्विक शांति के लिए जरूरी है।

भारत ने यह भी कहा कि सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना या उसे बढ़ावा देना अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार कुछ देश आतंकवादी संगठनों को प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करते हैं,जिससे पड़ोसी देशों की स्थिरता प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान से जुड़े अधिकारियों ने भी चिंता व्यक्त की। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उप-विशेष प्रतिनिधि जॉर्जेट गैगनॉन ने कहा कि पाकिस्तान के साथ चल रहे संघर्ष की मानवीय और आर्थिक कीमत बहुत ज्यादा है। उन्होंने बताया कि सीमा पर तनाव और सैन्य कार्रवाई के कारण आम लोगों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

गैग्नन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी सीमा बंद कर दी है,जिसके कारण व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। आम तौर पर अफगानिस्तान के लिए व्यापार का एक प्रमुख मार्ग पाकिस्तान के जरिए होता है,लेकिन सीमा बंद होने से अब व्यापार का मुख्य रास्ता ईरान के माध्यम से रह गया है। हालाँकि,पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और अस्थिरता के कारण यह मार्ग भी प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस स्थिति का असर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है,जो पहले से ही कमजोर स्थिति में है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से उनकी कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं,जिससे आम नागरिकों के लिए जीवन और कठिन हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस आर्थिक दबाव का असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि अफगानिस्तान की स्थिरता पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है और सीमा पर बढ़ती अस्थिरता इन चुनौतियों को और बढ़ा रही है। अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति के कारण उसके दो सबसे लंबे सीमाई क्षेत्र बेहद संवेदनशील हैं और इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर पूरे देश पर पड़ता है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता के सिद्धांतों का सम्मान करना आवश्यक है। भारत ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई और सीमा पार हिंसा को रोकने के प्रयास ही इस क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ,तो इसका असर केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है,ताकि कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।