अजीत अगरकर की दूरदर्शिता और साहसिक फैसलों ने रचा इतिहास (तस्वीर क्रेडिट@yash_kashikar)

अजीत अगरकर की दूरदर्शिता और साहसिक फैसलों ने रचा इतिहास,भारत को दिलाए तीन आईसीसी खिताब

नई दिल्ली,11 मार्च (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेट के इतिहास में साल 2026 को लंबे समय तक याद किया जाएगा। भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी ताकत साबित कर दी। इस शानदार जीत के साथ भारतीय टीम ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी निरंतर सफलता की कहानी को और मजबूत कर दिया। हालाँकि,मैदान पर खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया,लेकिन इस सफलता के पीछे एक ऐसी शख्सियत भी रही,जो पर्दे के पीछे रहकर टीम की दिशा तय कर रही थी। यह शख्सियत थी भारतीय टीम के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की।

भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी इस ऐतिहासिक जीत के बाद खुलकर कहा कि इस सफलता का बड़ा श्रेय अजीत अगरकर को जाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगरकर को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है,लेकिन वह पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम करते हैं। गंभीर का यह बयान सिर्फ एक औपचारिक प्रशंसा नहीं था, बल्कि उन फैसलों की स्वीकारोक्ति थी,जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी।

साल 2023 में जब अजीत अगरकर ने भारतीय क्रिकेट टीम की सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष का पद सँभाला था,तब परिस्थितियाँ काफी चुनौतीपूर्ण थीं। टीम में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी,लेकिन बड़े फैसले लेने से हिचकिचाहट भी दिखाई देती थी। कई सीनियर खिलाड़ियों का भविष्य सवालों के घेरे में था और नई पीढ़ी को मौका देने की माँग भी उठ रही थी। ऐसे समय में अगरकर ने साहसिक फैसले लेने से पीछे हटने के बजाय उन्हें अमल में लाने का रास्ता चुना।

अगरकर के कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने लगातार चार बड़े आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई। इनमें वनडे वर्ल्ड कप 2023,टी20 वर्ल्ड कप 2024,चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 वर्ल्ड कप 2026 शामिल हैं। इन चार में से तीन खिताब भारत ने अपने नाम किए,जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह सफलता सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन का परिणाम नहीं थी,बल्कि चयन प्रक्रिया में लिए गए उन फैसलों का भी असर था,जिन्होंने टीम को संतुलित और मजबूत बनाया।

अगरकर की चयन नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने सिर्फ अनुभव के आधार पर टीम नहीं बनाई,बल्कि फिटनेस,फॉर्म और भविष्य की संभावनाओं को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि उनके कार्यकाल में कई युवा खिलाड़ियों को मौका मिला और कुछ सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बाहर भी होना पड़ा। इन फैसलों को लेकर काफी आलोचना भी हुई,लेकिन समय के साथ यह साबित हुआ कि उनका उद्देश्य भारतीय टीम को लंबे समय के लिए मजबूत बनाना था।

टी20 क्रिकेट में कप्तानी को लेकर लिया गया उनका फैसला भी काफी चर्चित रहा। उस समय हार्दिक पंड्या को भारत की टी20 टीम का स्वाभाविक कप्तान माना जा रहा था। क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों का बड़ा वर्ग यह मानता था कि हार्दिक के नेतृत्व में टीम आगे बढ़ेगी,लेकिन अगरकर ने एक अलग रास्ता चुना और सूर्यकुमार यादव पर भरोसा जताया। उस समय सूर्यकुमार की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए गए थे और कई लोगों को लगा कि यह फैसला जोखिम भरा हो सकता है।

हालाँकि,अगरकर ने अपने फैसले पर भरोसा बनाए रखा और इसका परिणाम भी शानदार रहा। सूर्यकुमार यादव ने कप्तान के तौर पर टीम को नई ऊर्जा दी और अंततः भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब दिलाया। इस जीत के साथ वह भारत को टी20 विश्व कप जिताने वाले तीसरे कप्तान बन गए। विश्व कप जीतने के बाद सूर्यकुमार यादव ने भी स्वीकार किया कि उनके और कोच गौतम गंभीर के बीच तालमेल बेहद शानदार रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में दोनों के बीच कभी कोई गंभीर मतभेद नहीं हुआ और यही वजह रही कि टीम के लिए एक आदर्श प्लेइंग इलेवन तैयार करना आसान हो गया।

अगरकर का एक और बड़ा फैसला ईशान किशन को लेकर था। एक समय ऐसा भी था,जब ईशान लंबे समय तक भारतीय टीम से बाहर रहे और ऐसा लगने लगा था कि शायद उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर ठहर गया है,लेकिन अगरकर को इस युवा विकेटकीपर बल्लेबाज की प्रतिभा पर भरोसा था। उन्होंने ईशान को टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम में जगह दी और यह फैसला भी पूरी तरह सही साबित हुआ।

ईशान किशन ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए नौ मैचों में 35.22 की औसत से 317 रन बनाए। वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर रहे। उनके आक्रामक खेल ने कई अहम मुकाबलों में भारत को मजबूत स्थिति में पहुँचाया और टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अगरकर के कार्यकाल में एक और बड़ा फैसला वनडे टीम की कप्तानी को लेकर लिया गया। लंबे समय तक टीम का नेतृत्व करने वाले रोहित शर्मा की जगह शुभमन गिल को वनडे टीम की कमान सौंपना आसान फैसला नहीं था। रोहित भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे हैं,लेकिन अगरकर ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी युवा बल्लेबाज शुभमन गिल को देने का निर्णय लिया। यह कदम भारतीय टीम के दीर्घकालिक निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीति माना गया।

संजू सैमसन को लेकर भी चयन समिति का निर्णय चर्चा में रहा। साल 2025 में टी20 क्रिकेट में संजू का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था और उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला था। इसके बावजूद अगरकर ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें टी20 वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया। कई आलोचकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए,लेकिन विश्व कप के दौरान संजू ने अपने प्रदर्शन से सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया।

संजू सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 नाबाद रन,इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन और न्यूजीलैंड के खिलाफ 89 रन की शानदार पारियाँ खेलीं। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सिर्फ पाँच मुकाबलों में 80.25 की औसत से 321 रन बनाए और ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार भी अपने नाम किया। उनके इस प्रदर्शन ने भारत की खिताबी जीत में बेहद अहम भूमिका निभाई।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान अजीत अगरकर भले ही मैदान पर नजर नहीं आए,लेकिन टीम की रणनीति और संयोजन को लेकर उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर टीम प्रबंधन के साथ मिलकर ऐसी रणनीतियाँ तैयार कीं,जिन्होंने भारत को लगातार जीत दिलाने में मदद की। यही वजह है कि कई क्रिकेट विशेषज्ञ अब यह मानने लगे हैं कि भारतीय क्रिकेट की हालिया सफलता के पीछे अगरकर की दूरदर्शिता और निर्णय क्षमता का बड़ा योगदान है।

अक्सर चयनकर्ताओं को खिलाड़ियों की तुलना में कम पहचान मिलती है,लेकिन अजीत अगरकर का कार्यकाल यह दिखाता है कि सही समय पर लिए गए फैसले किस तरह किसी टीम की किस्मत बदल सकते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि आलोचनाओं से घबराने के बजाय अगर सही दिशा में काम किया जाए,तो परिणाम भी उतने ही शानदार मिलते हैं।

आज भारतीय क्रिकेट जिस मजबूत स्थिति में खड़ा है,उसमें अजीत अगरकर की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके साहसिक फैसलों ने न केवल टीम को नई ऊर्जा दी,बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार किया। आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को उनसे और भी ऐसे फैसलों की उम्मीद रहेगी,जो टीम इंडिया को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकें।