फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला पर शादी समारोह में फायरिंग,सुरक्षा घेरे के बावजूद बाल-बाल बचे पूर्व मुख्यमंत्री; नेताओं ने जताई चिंता

नई दिल्ली,12 मार्च (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला एक संभावित हमले में बाल-बाल बच गए। बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान एक व्यक्ति ने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए उनके करीब पहुँचकर गोली चला दी। हालाँकि,गनीमत रही कि इस घटना में उन्हें कोई चोट नहीं आई और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। घटना सामने आने के बाद देशभर के कई प्रमुख नेताओं ने चिंता व्यक्त की है और मामले की निष्पक्ष व गहन जाँच की माँग की है।

बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय हुई जब फारूक अब्दुल्ला एक शादी समारोह में शामिल होने पहुँचे थे। समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी और उन्हें उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान की गई थी। इसके बावजूद एक व्यक्ति किसी तरह सुरक्षा घेरे को पार करते हुए उनके काफी करीब पहुँच गया और अचानक गोली चला दी। गोली चलने की आवाज से वहाँ मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति को सँभाला और संदिग्ध व्यक्ति को काबू में लेने की कोशिश की।

इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है,लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर इसलिए क्योंकि फारूक अब्दुल्ला को ‘जेड कैटेगरी’ की सुरक्षा प्राप्त है। ऐसे में किसी व्यक्ति का सुरक्षा घेरे को तोड़कर इतना करीब पहुँच जाना और गोली चला देना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।

घटना के बाद देश के कई प्रमुख नेताओं ने प्रतिक्रिया दी और इस घटना को बेहद गंभीर बताया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी की मौजूदगी में शादी समारोह के दौरान हुई फायरिंग बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ,लेकिन इस प्रकार की घटनाएँ सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक हो सकती हैं। पवार ने फारूक अब्दुल्ला के अच्छे स्वास्थ्य,लंबी उम्र और उनकी निरंतर सुरक्षा के लिए शुभकामनाएँ भी दीं।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गेहलोत ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस तरह का हमला होना बेहद गंभीर मामला है। गहलोत ने कहा कि इस घटना की पूरी जाँच की जानी चाहिए और फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह राहत की बात है कि फारूक अब्दुल्ला इस दुर्भाग्यपूर्ण गोलीबारी की घटना में सुरक्षित हैं। उन्होंने इस हिंसक कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। सोरेन ने फारूक अब्दुल्ला के अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना भी की।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शादी समारोह में हुए इस जानलेवा हमले की खबर सुनकर उन्हें बेहद चिंता हुई। उन्होंने कहा कि यह भगवान का शुक्र है कि फारूक अब्दुल्ला सुरक्षित हैं। सुले ने इस गंभीर सुरक्षा चूक की पूरी तरह जाँच करने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि देश के इतने वरिष्ठ नेता की सुरक्षा में इस तरह की चूक स्वीकार्य नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शादी समारोह में हुई गोलीबारी की घटना में फारूक अब्दुल्ला को सुरक्षित देखकर राहत मिली। उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना की।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना का कथित सीसीटीवी फुटेज बेहद परेशान करने वाला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फारूक अब्दुल्ला को जेड कैटेगरी की सुरक्षा प्राप्त है,तब कोई व्यक्ति उनके इतने करीब कैसे पहुँच गया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से गंभीर सुरक्षा चूक को दर्शाता है और इसकी विस्तृत जाँच होनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला एक बेहद सम्मानित और शरीफ व्यक्ति हैं,जिन्होंने कभी ऐसा बयान नहीं दिया,जिससे किसी को नाराजगी हो। इसके बावजूद उन पर फायरिंग की घटना बेहद दुखद है। यादव ने कहा कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि कश्मीर की स्थिति उतनी शांत नहीं है,जितना सरकार दावा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में वास्तविक नियंत्रण निर्वाचित सरकार के बजाय उपराज्यपाल के हाथों में है।

फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली नेता रहे हैं। वे कई बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनकी पार्टी जम्मू और कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक है।

इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे मामले की जाँच में जुट गई हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी व्यक्ति कौन था,उसने यह कदम क्यों उठाया और क्या उसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। जाँच एजेंसियाँ यह भी देख रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई,जिसके कारण आरोपी व्यक्ति इतनी आसानी से सुरक्षा घेरा पार कर सका।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा में और अधिक कड़ाई किए जाने की संभावना है। साथ ही भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने एक बार फिर वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि उच्च स्तर की सुरक्षा प्राप्त किसी नेता के साथ ऐसी घटना हो सकती है,तो यह सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाता है।

फिलहाल सबसे राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और फारूक अब्दुल्ला सुरक्षित हैं,लेकिन इस घटना ने देशभर में राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है और अब सभी की नजरें जाँच एजेंसियों की कार्रवाई और इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आने पर टिकी हुई हैं।