लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (तस्वीर क्रेडिट@judgemanoj_)

एलपीजी संकट और 8 सांसदों के निलंबन पर लोकसभा में जोरदार हंगामा,स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही दोपहर तक स्थगित की

नई दिल्ली,13 मार्च (युआईटीवी)- नई दिल्ली में शुक्रवार को संसद के निचले सदन लोक सभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला,जब विपक्षी दलों ने एलपीजी संकट और आठ सांसदों के निलंबन के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल के पास पहुँच गए और नारेबाजी करते हुए इन दोनों मुद्दों पर तत्काल चर्चा की माँग करने लगे। लगातार हो रहे हंगामे के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ और अंततः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सुबह करीब 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई,विपक्षी दलों के कई सदस्य अपनी सीटों से उठकर वेल के पास आ गए। विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसदों ने एलपीजी संकट का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस पर तत्काल चर्चा कराने की माँग की। उनका कहना था कि देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का आरोप था कि सरकार इस गंभीर समस्या पर चर्चा से बच रही है और आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।

इसके साथ ही विपक्षी सांसदों ने हाल ही में आठ सांसदों के निलंबन के फैसले का भी विरोध किया। उनका कहना था कि निलंबन की कार्रवाई अनुचित है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इसी माँग को लेकर विपक्ष के सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे और सदन में हंगामा करते रहे। इस दौरान सदन में शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना मुश्किल हो गया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार विपक्षी सांसदों से शांत रहने और अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रश्नकाल संसद की कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इस दौरान सांसदों को अपने क्षेत्र और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी विपक्ष के कई सांसदों के प्रश्न सूचीबद्ध थे और उन्हें प्रश्नकाल के दौरान अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जा सकता था।

स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि संसद में चर्चा और बहस लोकतंत्र की आत्मा है,लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि सदन की कार्यवाही व्यवस्थित तरीके से चले। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी आग्रह किया था और फिर से आग्रह कर रहा हूँ कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। आज भी प्रतिपक्ष के आठ सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हुए हैं। प्रश्नकाल के अंदर देश के मुद्दे और क्षेत्र की समस्याएँ उठती हैं और वहीं सरकार की जवाबदेही तय होती है। इसलिए मेरा आग्रह है कि प्रश्नकाल के अंदर सभी को बोलने का अवसर दिया जाना चाहिए।”

इसके बावजूद विपक्षी सांसदों का हंगामा जारी रहा। स्पीकर ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विपक्षी सदस्य अक्सर कहते हैं कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जाता,लेकिन जब सदन में बोलने का अवसर दिया जाता है तो वे उसका उपयोग नहीं करते और सदन में गतिरोध पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद अपने मुद्दे उठा सकते हैं और उस समय चर्चा की जा सकती है। लेकिन विपक्षी सांसद अपनी मांगों पर अड़े रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। इसके कारण सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।

इस दौरान स्पीकर ने आठ सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई सदस्य सदन के अंदर अनुशासनहीन व्यवहार करता है या मेजों पर चढ़ने जैसी हरकत करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्पीकर ने कहा, “सदन के अंदर अगर मेजों पर चढ़ेंगे तो इसी तरह की कार्रवाई होगी। मेरा एक और आग्रह है कि सदन की पवित्रता,चाहे वह संसद परिसर के अंदर हो या बाहर, उसकी मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार का आचरण कुछ विपक्षी सदस्यों ने हाल के दिनों में किया है,वह सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है और इससे संसद की छवि को नुकसान पहुँचता है।

स्पीकर ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सदस्य जानबूझकर प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते और बार-बार हंगामा कर सदन की कार्यवाही को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा कि संसद का समय बेहद मूल्यवान होता है और इसे बेकार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।

लगातार हो रहे हंगामे और शोर-शराबे के बीच आखिरकार स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करने का फैसला किया। इसके बाद लोकसभा की बैठक कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई।

संसद में इस तरह का हंगामा नई बात नहीं है,लेकिन एलपीजी संकट और सांसदों के निलंबन जैसे मुद्दों को लेकर बढ़ता राजनीतिक टकराव यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद का सत्र और भी ज्यादा गरम रहने वाला है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है,जबकि सरकार और सदन के अध्यक्ष सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने पर जोर दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में इस तरह के गतिरोध से महत्वपूर्ण विधायी कामकाज प्रभावित होता है और कई अहम मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाती। ऐसे में सभी दलों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए संसद की कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से चलाने में सहयोग करें। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोपहर के बाद सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाती है या फिर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव जारी रहता है।