एलपीजी

वैश्विक संकट के बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित,रोज़ 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी; सरकार ने पैनिक बुकिंग से बचने की अपील की

नई दिल्ली,13 मार्च (युआईटीवी)- मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। सरकार ने कहा है कि ऊर्जा आपूर्ति को बिना किसी रुकावट के बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है। इस संबंध में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को एक विस्तृत बयान जारी कर उपभोक्ताओं से अपील की कि वे घबराहट में एलपीजी सिलेंडर की अतिरिक्त बुकिंग न करें।

मंत्रालय ने बताया कि देशभर में हर दिन लगभग 50 लाख एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार वितरण प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी राज्य या क्षेत्र से रसोई गैस की कमी या “ड्राई-आउट” की कोई सूचना नहीं मिली है। मंत्रालय ने कहा कि देशभर में 25 हजार से अधिक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर लगातार काम कर रहे हैं और वे उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं।

बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल एक ही क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। कच्चा तेल दुनिया के 40 से अधिक देशों से आयात किया जाता है और लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल अब उस समुद्री मार्ग के अलावा अन्य रास्तों से आ रहा है, जहाँ हालिया तनाव के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति भारत को वैश्विक संकट की स्थिति में भी ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में मदद करती है।

भारत की ऊर्जा खपत और रिफाइनिंग क्षमता का उल्लेख करते हुए मंत्रालय ने बताया कि देश में रोजाना लगभग 5.5 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है। इसके साथ ही भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग केंद्र भी है,जहाँ कुल 22 रिफाइनरियाँ काम कर रही हैं। ये रिफाइनरियाँ फिलहाल उच्च क्षमता पर संचालन कर रही हैं और कई मामलों में उनका उपयोग 100 प्रतिशत से भी अधिक स्तर पर किया जा रहा है।

मंत्रालय का कहना है कि यही बड़ी रिफाइनिंग क्षमता भारत को मौजूदा वैश्विक संकट के दौरान अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में रखती है। विशेष रूप से उस समय जब मध्य-पूर्व में तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों के भंडार और उत्पादन दोनों पर्याप्त हैं,जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखना संभव हो रहा है।

देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण के लिए एक विशाल नेटवर्क भी मौजूद है। मंत्रालय ने बताया कि भारत में 1 लाख से अधिक रिटेल आउटलेट हैं,जहाँ पेट्रोल,डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं। इन सभी आउटलेट्स पर पर्याप्त स्टॉक रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।

हालाँकि,प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर कुछ असर जरूर पड़ा है। मंत्रालय के अनुसार “फोर्स मेज्योर” परिस्थितियों के कारण कुछ आपूर्ति चैनलों में बाधा आई है,लेकिन सरकार वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों से गैस की खरीद जारी रखे हुए है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक और घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।

स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए सरकार ने कुछ अतिरिक्त कदम भी उठाए हैं। मंत्रालय ने बताया कि आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एक “नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर” जारी किया गया है। इसके माध्यम से गैस की उपलब्धता को आवश्यक क्षेत्रों के लिए प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियां भले ही चुनौतीपूर्ण हों,लेकिन सरकार माँग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी दिशा में रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत सी3 और सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम का पूरा उत्पादन—जिसमें प्रोपेन,ब्यूटेन,प्रोपलीन और ब्यूटेन शामिल हैं—घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति के लिए समर्पित किया गया है।

यह उत्पादन विशेष रूप से तीन प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दिया जा रहा है,जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के माध्यम से पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर का वितरण किया जाता है।

मंत्रालय के अनुसार इन उपायों का असर भी दिखाई देने लगा है। पिछले पाँच दिनों के भीतर ही रिफाइनरियों के निर्देशों के कारण एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे घरेलू गैस की उपलब्धता को और मजबूत किया गया है,ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।

हालाँकि,मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि हाल के दिनों में पैनिक के कारण एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग में अचानक वृद्धि देखी गई है। लोगों को आशंका है कि वैश्विक संकट का असर घरेलू आपूर्ति पर पड़ सकता है,जिसके कारण कई उपभोक्ता अतिरिक्त सिलेंडर बुक कर रहे हैं। सरकार ने इसे अनावश्यक बताते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की है।

बयान में कहा गया कि हर दिन 50 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं और देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसलिए उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग से बचना चाहिए और वितरण प्रणाली पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। मंत्रालय ने नागरिकों से यह भी अनुरोध किया कि वे वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में जहाँ तक संभव हो ईंधन की बचत करें और अधिकारियों के साथ सहयोग करें।

नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी के मामले में सरकार ने प्राथमिकता तय करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने बताया कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी,ताकि उनकी सेवाओं पर कोई असर न पड़े। वहीं होटल,रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए आवंटन की समीक्षा की जा रही है।

इस उद्देश्य से तीन सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया है,जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शामिल हैं। यह समिति राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के साथ चर्चा कर रही है,ताकि एक संतुलित योजना तैयार की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपलब्ध एलपीजी पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से वितरित हो।

सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा है कि आज से ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ राज्य सरकारों के साथ समन्वय में औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत आवंटन करेंगी। इस कदम का उद्देश्य बाजार में जमाखोरी और काला बाजारी को रोकना है।

एलपीजी आपूर्ति पर दबाव कम करने के लिए सरकार वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय कर रही है। इसके तहत केरोसीन को खुदरा दुकानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए फ्यूल ऑयल की व्यवस्था भी की जा रही है।

इसी संदर्भ में पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि वे अस्थायी रूप से कुछ वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दें। इसके तहत होटल और रेस्टोरेंट जैसे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को एक महीने के लिए बायोमास,आरडीएफ पेलेट्स,केरोसीन या कोयले को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है।

सरकार का मानना है कि इस कदम से एलपीजी की माँग में कमी आएगी और घरेलू उपभोक्ताओं तथा आवश्यक सेवाओं के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। इसी तरह कोयला मंत्रालय ने भी राज्यों द्वारा नामित एजेंसियों को अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं,ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों सहित अन्य उपभोक्ताओं को वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनी रहे। भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते अर्थतंत्र के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि इसका सीधा संबंध औद्योगिक उत्पादन,परिवहन और घरेलू जीवन से जुड़ा होता है।

सरकार का कहना है कि वह लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है।

ऐसे में सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें,अनावश्यक बुकिंग न करें और ईंधन का जिम्मेदारी से उपयोग करें। मंत्रालय का कहना है कि यदि सभी लोग संयम और सहयोग का परिचय देंगे तो वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भी देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु रूप से बनाए रखा जा सकता है।