वाशिंगटन,16 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र में हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। मैक्रों ने कहा कि ईरान द्वारा क्षेत्र के देशों के खिलाफ किए जा रहे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इससे पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति जारी रहती है,तो इसके गंभीर परिणाम पूरे मध्य पूर्व और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भुगतने पड़ सकते हैं।
मैक्रों ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति से हुई चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान को तुरंत उन हमलों को रोकना चाहिए,जो सीधे या परोक्ष रूप से क्षेत्र के अन्य देशों के खिलाफ किए जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की गतिविधियाँ मध्य पूर्व में पहले से मौजूद तनाव को और अधिक बढ़ा रही हैं,जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो रहा है।
मैक्रों ने कहा कि ईरान द्वारा किए जा रहे हमले सीधे तौर पर या उसके सहयोगी समूहों के माध्यम से विभिन्न देशों को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से लेबनान और इराक का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में भी ईरान से जुड़े हमलों और गतिविधियों को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। उनके अनुसार इस प्रकार की कार्रवाइयों से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा पैदा हो रहा है और यह स्थिति किसी भी पक्ष के लिए लाभदायक नहीं है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फ्रांस अपने हितों और अपने क्षेत्रीय साझेदारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फ्रांस अंतर्राष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर अपने नागरिकों,अपने साझेदार देशों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फ्रांस के खिलाफ किसी भी प्रकार की धमकी या हमला स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो स्थिति बनती जा रही है,वह पूरे क्षेत्र को अराजकता की ओर धकेल सकती है। मैक्रों के अनुसार यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा,तो इसका असर केवल वर्तमान समय तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि आने वाले वर्षों तक इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति की सबसे बड़ी कीमत क्षेत्र के आम लोग चुका रहे हैं,जिनकी सुरक्षा और स्थिरता लगातार खतरे में पड़ रही है।
मैक्रों ने यह भी कहा कि इस संकट का समाधान केवल एक नए राजनीतिक और सुरक्षा ढाँचे के माध्यम से ही संभव है। उनके अनुसार ऐसा ढाँचा तैयार किया जाना चाहिए,जो क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि इस नए फ्रेमवर्क में यह गारंटी भी शामिल होनी चाहिए कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
फ्रांस लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। मैक्रों ने अपनी टिप्पणी में कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और उसकी उन गतिविधियों पर भी नियंत्रण लगाया जाए,जो क्षेत्र और दुनिया के अन्य हिस्सों में अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए,जिससे इन खतरों को कम किया जा सके।
मैक्रों ने समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या समुद्री मार्ग बाधित होता है तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
मैक्रों ने अपनी बातचीत के दौरान एक मानवीय मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति से अपील की कि ईरान की जेल में बंद दो फ्रांसीसी नागरिकों को जल्द-से-जल्द रिहा किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सेसिल कोहलर और जैक्स पेरिस का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों को सुरक्षित रूप से फ्रांस लौटने दिया जाना चाहिए।
इन दोनों फ्रांसीसी नागरिकों को मई 2022 में ईरान यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया गया था। तब से लेकर अब तक उनकी हिरासत को लेकर फ्रांस में लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है। मैक्रों ने कहा कि उनकी कैद बहुत लंबी हो चुकी है और अब उन्हें घर लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है,जब फ्रांस ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का फैसला किया है। हाल ही में मैक्रों ने घोषणा की थी कि फ्रांस पूर्वी भूमध्य सागर और लाल सागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक ताकत को मजबूत कर रहा है। इसके तहत कई युद्धपोतों और सैन्य जहाजों को तैनात किया जा रहा है,ताकि क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा में मदद की जा सके और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखा जा सके।
फ्रांस ने इस मिशन के तहत आठ फ्रिगेट,दो एम्फीबियस हेलीकॉप्टर कैरियर और अपने प्रमुख विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को तैनात करने का फैसला किया है। इन जहाजों की तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में रक्षा की स्थिति मजबूत करना और समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस की यह सैन्य तैनाती एक स्पष्ट संदेश है कि वह मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है,जब क्षेत्र में कई देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
इस बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि चीन,फ्रांस,जापान,दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे कई देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेज सकते हैं।
ट्रंप ने कहा था कि यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे सुरक्षित रखना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है,तो उसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच मैक्रों और पेजेश्कियन के बीच हुई बातचीत को कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ता है,तो तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम किया जा सकेगा।
