मुंबई,16 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका द्वारा सप्ताहांत में ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र पर हमले के बाद सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल दर्ज किया गया। कारोबार के शुरुआती घंटों में वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 1.59 प्रतिशत बढ़कर 104.77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया,जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 97.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
यह तेजी उस समय आई,जब अमेरिकी बलों ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। खार्ग द्वीप ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि देश के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप के माध्यम से वैश्विक बाजारों तक पहुँचता है। इस क्षेत्र पर हमला होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएँ अचानक बढ़ गईं,जिसके कारण बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली।
हमले के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और कुछ अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस जवाबी कार्रवाई ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति,समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि यदि तेहरान ने वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश की,तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर और भी कड़े हमले कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे बाधित करने का कोई भी प्रयास अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
ट्रंप ने इस मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी के तेल और गैस को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने वाले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी प्रमुख देशों की साझा जिम्मेदारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार वाशिंगटन ने चीन,जापान और अन्य प्रमुख तेल आयातक देशों से आग्रह किया है कि वे जलडमरूमध्य में अपने नौसैनिक पोत तैनात कर टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में सहयोग करें।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। इसके अलावा समुद्र के रास्ते भेजी जाने वाली एलपीजी की बड़ी मात्रा भी इसी मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यदि इस जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की रुकावट आती है,तो उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
संभावित हमलों और समुद्री सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नौसैनिक गतिविधियों को भी तेज कर दिया है। अमेरिकी नौसेना के संयुक्त राज्य नौसेना का पाँचवां बेड़ा को क्षेत्र में तैनात कर वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। यह बेड़ा पहले से ही फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी निभाता रहा है।
खार्ग द्वीप पर हुए हमले के बाद ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा उत्पन्न हुई है। एजेंसी का कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई,तो वैश्विक बाजार में तेल की कमी और कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
तनाव बढ़ने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों के मार्ग बदल दिए हैं या अस्थायी रूप से संचालन रोक दिया है। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
इस बीच खाड़ी क्षेत्र के देशों ने स्थिति को सामान्य करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने रविवार को अपने प्रमुख निर्यात केंद्र फुजैरा बंदरगाह पर माल ढुलाई फिर से शुरू कर दी है। इससे एक दिन पहले ड्रोन हमले के कारण यहाँ संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। यह बंदरगाह संयुक्त अरब अमीरात के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र है और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य टकराव जारी रहता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थी,जो उस स्तर के करीब है जो रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद देखा गया था। हालाँकि,बाद में कीमतें थोड़ी गिरकर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हो गई थीं।
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजार फिलहाल भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रभाव में है। मध्य पूर्व में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई या समुद्री मार्गों में रुकावट की खबर तुरंत तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि निवेशक और ऊर्जा कंपनियाँ क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का आगे क्या रुख होता है। यदि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया,तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
