ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@Osint613)

ट्रंप के दावों को ईरान ने किया खारिज,विदेश मंत्री अराघची बोले—सीजफायर या बातचीत के लिए तैयार नहीं तेहरान

नई दिल्ली,17 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी का दौर और तेज हो गया है। एक ओर जहाँ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है,वहीं दूसरी ओर ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तेहरान फिलहाल किसी भी प्रकार के युद्धविराम या बातचीत के लिए तैयार नहीं है और वह अपनी रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।

दरअसल,पिछले कुछ हफ्तों से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और यह संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ईरान बातचीत के जरिए इस संघर्ष को समाप्त करना चाहता है। ट्रंप का दावा था कि तेहरान समझौते के लिए इच्छुक है और जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। हालाँकि,ईरान की ओर से आए ताजा बयान ने इन दावों को पूरी तरह से गलत ठहरा दिया है।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान ने कभी भी युद्धविराम की माँग नहीं की और न ही उसने किसी प्रकार की बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष ईरान पर थोपा गया है और जब तक आवश्यक होगा,देश अपनी रक्षा के लिए तैयार रहेगा। अराघची के इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है,क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना बहुत कम है।

अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि ईरान इस युद्ध को एक गैर-कानूनी कार्रवाई मानता है और जब तक अमेरिका इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करता,तब तक तेहरान अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान को फिलहाल ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि वह अमेरिका के साथ बातचीत करे। उनके अनुसार,जब अमेरिका ने ईरान पर हमला करने का फैसला किया,उस समय भी दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी। इसलिए अब ईरान को वाशिंगटन के साथ संवाद करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है।

ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में भी कुछ बदलाव देखने को मिला है। पहले जहाँ ट्रंप यह दावा कर रहे थे कि ईरान समझौते के लिए तैयार है,वहीं अब उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत तो कर रहा है,लेकिन तेहरान फिलहाल किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध के तीसरे सप्ताह में पहुँचने के बाद भी ईरान की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।

ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा कि अमेरिका क्षेत्र में जारी संघर्ष और वैश्विक बाजारों में पैदा हो रही अस्थिरता को लेकर चिंतित है और इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन-किन देशों के साथ बातचीत चल रही है और किस स्तर पर चर्चा हो रही है। फिर भी उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि अमेरिका इस संकट को सुलझाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की तलाश कर रहा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

इसी संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ दिन पहले दुनिया के कई देशों से अपील की थी कि वे इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने युद्धपोत यहाँ भेजें। उनका तर्क था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। हालाँकि,ट्रंप की इस अपील को अब तक अपेक्षित समर्थन नहीं मिला है। अभी तक किसी भी बड़े देश ने सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं,लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में स्थिति और जटिल होती दिखाई दे रही है। एक ओर अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक प्रयासों की बात कर रहा है,वहीं ईरान स्पष्ट रूप से यह कह रहा है कि वह दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस पूरे विवाद में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के बयान लगातार बदलते नजर आ रहे हैं। ट्रंप के बयान में भी समय-समय पर बदलाव देखने को मिला है। पहले उन्होंने कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार है,लेकिन अब उन्होंने स्वीकार किया है कि तेहरान फिलहाल किसी भी डील के लिए राजी नहीं है।

इससे पहले शनिवार को भी ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने बातचीत में रुचि दिखाई है। हालाँकि,उसी बयान में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि जब तक युद्ध जारी है,तब तक अमेरिका किसी जल्दबाजी में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान समझौता करना चाहता है,तो उसे बेहतर शर्तें पेश करनी होंगी।

ट्रंप ने यह भी कहा था कि फिलहाल उन्हें ऐसा नहीं लगता कि ईरान की ओर से पेश की जा रही शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान भले ही डील करना चाहता हो,लेकिन मौजूदा शर्तों पर वह खुद कोई समझौता नहीं करना चाहते। इस बयान ने भी यह संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ता फिलहाल काफी कठिन दिखाई दे रहा है।

फिलहाल पश्चिम एशिया में जारी यह टकराव दुनिया की निगाहों में बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय लगातार इस बात पर नजर रखे हुए है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू होती है तो यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम हो सकता है,लेकिन मौजूदा बयानों से ऐसा लगता है कि फिलहाल यह रास्ता काफी दूर है।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय दबाव की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर वैश्विक शक्तियाँ सक्रिय होकर मध्यस्थता की कोशिश करती हैं,तो शायद इस तनाव को कम करने का रास्ता निकल सके। हालाँकि,फिलहाल दोनों देशों के बीच जारी बयानबाजी और कठोर रुख यह संकेत दे रहा है कि स्थिति जल्दी सामान्य होने की संभावना कम ही दिखाई दे रही है।