सरकार ने केरोसिन आपूर्ति बढ़ाने के लिए नियमों में दी ढील

ईरान युद्ध के बीच एलपीजी संकट की आशंका,सरकार ने केरोसिन आपूर्ति बढ़ाने के लिए नियमों में दी ढील

नई दिल्ली,30 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की घरेलू ऊर्जा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान से जुड़े युद्ध और वैश्विक आपूर्ति में बाधा के चलते रसोई गैस यानी एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए केरोसिन की आपूर्ति को तेज और आसान बनाने के लिए पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य आम जनता को खाना पकाने और रोशनी के लिए वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराना है,ताकि किसी भी संभावित संकट से निपटा जा सके।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार,यह नई व्यवस्था देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई है। खासतौर पर उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है,जहाँ पहले ‘केरोसिन-फ्री’ स्थिति घोषित की जा चुकी थी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से घरों तक केरोसिन की पहुँच तेज होगी और लोगों को ईंधन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल,भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को चुने हुए पेट्रोल पंपों पर केरोसिन स्टोर करने और सीधे उपभोक्ताओं को बेचने की अनुमति दी गई है। हर चयनित पेट्रोल पंप पर अधिकतम 5,000 लीटर केरोसिन रखा जा सकेगा,जबकि हर जिले में ऐसे दो पेट्रोल पंपों को इस सुविधा के लिए नामित किया जा सकता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और इसे फिलहाल 60 दिनों के लिए लागू किया गया है। इस दौरान सरकार का लक्ष्य है कि एलपीजी की संभावित कमी के प्रभाव को कम किया जा सके और आम लोगों को वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा,राशन दुकानों के माध्यम से भी केरोसिन वितरण जारी रहेगा और राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दें,जहाँ ऊर्जा संसाधनों की पहुँच अपेक्षाकृत कम होती है।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है,जिससे एलएनजी की आपूर्ति में कमी आई है। इसका सीधा असर एलपीजी उत्पादन और वितरण पर पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को नियमित कोटा के अलावा 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रही है।

सरकार का कहना है कि एलएनजी की आपूर्ति में कमी के कारण केरोसिन को एक बार फिर से उपयोग में लाया जा रहा है,ताकि घरों में खाना पकाने और रोशनी के लिए ईंधन की उपलब्धता बनी रहे। हालाँकि,केरोसिन को लंबे समय से धीरे-धीरे कम किया जा रहा था,क्योंकि सरकार स्वच्छ ईंधनों की ओर बढ़ रही थी,लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसे एक अस्थायी विकल्प के रूप में फिर से इस्तेमाल में लाया जा रहा है।

मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिलाया है कि नियमों में ढील के बावजूद सुरक्षा और निगरानी के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। केरोसिन के भंडारण और वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह ईंधन केवल जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक ही पहुंचे।

एलपीजी पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार अन्य वैकल्पिक ईंधनों को भी बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि वे राज्यों को अधिक मात्रा में कोयला उपलब्ध कराएँ। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे उद्योगों और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए ऊर्जा का एक वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराया जा सके।

इसके साथ ही राज्यों को घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन बढ़ाने की भी सलाह दी गई है। इससे स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में इस तरह की आपूर्ति बाधाओं का असर कम किया जा सकेगा। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में तात्कालिक समाधान के तौर पर यह कदम उठाया गया है।

सरकार का यह फैसला मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर एक जरूरी और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है,बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सजग है और किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयार है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि वैश्विक स्थिति किस दिशा में जाती है और इसका भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है।