पेरिस,31 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने इज़रायल की कड़ी आलोचना करते हुए लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के साथ हुई घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने इज़रायली सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों के साथ सुरक्षा नियमों का उल्लंघन और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती।
बारो ने विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान के नकौरा क्षेत्र में तैनात यूएनआईएफआईएल के साथ हुई “गंभीर घटनाओं” का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है और यह संयुक्त राष्ट्र मिशन की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। फ्रांस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पेरिस में मौजूद इज़रायल के राजदूत को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक,रविवार को हुई एक गोलीबारी की घटना में इंडोनेशिया के एक शांति सैनिक की मौत हो गई,जबकि तीन अन्य घायल हो गए। इसके अलावा सोमवार को हुए एक विस्फोट में दो और इंडोनेशियाई शांति सैनिकों की जान चली गई और दो अन्य घायल हो गए। इन घटनाओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता को और बढ़ा दिया है। बारो ने इन हमलों की “कड़े से कड़े शब्दों में” निंदा करते हुए कहा कि यह न केवल शांति मिशन के लिए खतरा है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन है।
फ्रांस ने इन घटनाओं के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की माँग की है। बारो ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का पूरी तरह सम्मान करें,जो 2006 के इज़रायल-लेबनान संघर्ष के बाद लागू किया गया था और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यूएनआईएफआईएल को बिना किसी बाधा के अपना काम करने दिया जाना चाहिए और उसकी आवाजाही में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।
हालाँकि,अब तक यूएनआईएफआईएल ने हमले के लिए सीधे तौर पर इज़रायल को जिम्मेदार नहीं ठहराया है और मामले की जाँच जारी है,लेकिन लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,रविवार को इज़रायली तोपखाने से दागे गए गोले यूएनआईएफआईएल में तैनात इंडोनेशियाई दल के मुख्यालय के पास गिरे थे। इन दावों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
इंडोनेशिया ने भी अपने सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि करते हुए इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है। उसने दक्षिणी लेबनान में इज़रायल की सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की है। इंडोनेशिया लंबे समय से यूएनआईएफआईएल मिशन में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है और वहाँ उसके सैनिकों की बड़ी संख्या तैनात है।
इस पूरे घटनाक्रम पर एंटोनियो गुटेरेस ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इन हमलों को अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाएँ पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।
गौरतलब है कि 2 मार्च से इज़रायल और लेबनान की सीमा पर तनाव लगातार बना हुआ है। इस दिन हिज़्बुल्लाह ने 27 नवंबर 2024 के संघर्ष विराम के बाद पहली बार इज़रायल पर रॉकेट दागे थे। इसके जवाब में इज़रायल ने दक्षिणी और पूर्वी लेबनान में अपने हवाई हमले तेज कर दिए। इसके बाद से ही दोनों पक्षों के बीच झड़पों और सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यूएनआईएफआईएल जैसे शांति मिशन का उद्देश्य ही ऐसे तनावपूर्ण हालात में शांति बनाए रखना होता है,लेकिन जब स्वयं शांति सैनिक ही हमलों का शिकार बनने लगें,तो यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।
फ्रांस की ओर से उठाया गया यह मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इज़रायल के खिलाफ दबाव बढ़ा सकता है। साथ ही,यह भी स्पष्ट करता है कि यूरोपीय देश अब पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता को लेकर अधिक मुखर हो रहे हैं। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संभावित बैठक इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है।
लेबनान में यूएन शांति सैनिकों पर हुए हमलों ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और यह मामला अब अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है। यदि जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया,तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है,जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
