अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (तस्वीर क्रेडिट@KantipurTVHD)

ईरान के खिलाफ कार्रवाई पर अमेरिका का बड़ा बयान,मार्को रुबियो बोले—हफ्तों में पूरा होगा मिशन,होर्मुज पर नियंत्रण की कोशिश बर्दाश्त नहीं

वाशिंगटन,31 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के अपने प्रमुख लक्ष्यों को महीनों में नहीं,बल्कि कुछ ही हफ्तों में हासिल कर लेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है,जब क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।

रुबियो ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी सेना अपने तय उद्देश्यों को हासिल करने में पहले से काफी आगे है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। खासतौर पर उसकी एयर फोर्स और नेवी को निष्क्रिय करने और उसके मिसाइल लॉन्च सिस्टम को काफी हद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। रुबियो के अनुसार,इन लक्ष्यों को तेजी से हासिल किया जा रहा है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुँचती दिखाई दे रही है।

इस बयान के साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की रणनीति केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके समानांतर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। रुबियो ने बताया कि भले ही जमीनी स्तर पर संघर्ष जारी है,लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संवाद भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बातचीत खासतौर पर बिचौलियों के जरिए हो रही है,जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पूरी तरह संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहते।

हालाँकि,कूटनीतिक बातचीत के बावजूद अमेरिका ने अपनी शर्तों को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई है। रुबियो ने दो टूक कहा कि अमेरिका की प्राथमिक माँगें वही हैं,जो पहले से थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने और ऐसे हथियारों के निर्माण पर रोक लगाने की माँग की,जो उसके पड़ोसी देशों के लिए खतरा बन सकते हैं।

रुबियो के बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी रहा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने की ईरान की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग है और दुनिया का कोई भी देश इस पर एकतरफा दावा नहीं कर सकता। रुबियो ने इसे गैर-कानूनी करार देते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी किसी भी स्थिति में इस तरह के कदम को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि अगर ईरान अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए इस जलमार्ग को खुला रखता है तो यह सभी के हित में होगा,लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है,तो अन्य देश मिलकर इस मार्ग को खुला रखने के लिए कदम उठा सकते हैं। यह बयान वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने हाल के संघर्ष के दौरान नागरिक और आर्थिक ढाँचे को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने दूतावासों, राजनयिक ठिकानों, हवाई अड्डों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढाँचे पर हमले किए हैं,जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है। उनके अनुसार, इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में ईरान पिछले दस वर्षों में सबसे कमजोर स्थिति में है और यह एक ऐसा मौका है,जब उसकी सैन्य क्षमताओं को सीमित कर भविष्य में बड़े खतरों को रोका जा सकता है। रुबियो का मानना है कि अगर अभी निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई,तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

कूटनीति के मुद्दे पर बोलते हुए रुबियो ने कहा कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने और मिसाइल व ड्रोन विकास पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाता है, तो उसके लिए भविष्य में बेहतर संभावनाएँ हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि दशकों से ईरान ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं,लेकिन अब उसके पास यह मौका है कि वह अपनी नीतियों में बदलाव करे।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान रुबियो ने कुछ नाटो सहयोगियों के रवैये पर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि कुछ सहयोगी देशों ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया,जो गठबंधन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर नाटो का उद्देश्य केवल यूरोप की रक्षा तक सीमित है और वह अन्य परिस्थितियों में सहयोग नहीं करता,तो इस व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत है।

हालाँकि,रुबियो ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका का मकसद ईरान में शासन परिवर्तन करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान का लक्ष्य केवल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को संबोधित करना है,लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर भविष्य में ईरान के नेतृत्व में कोई बदलाव होता है,तो अमेरिका उसका विरोध नहीं करेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि रुबियो का यह बयान अमेरिका की रणनीति को स्पष्ट रूप से सामने लाता है,जिसमें सैन्य दबाव और कूटनीतिक प्रयास दोनों शामिल हैं। यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका इस संघर्ष को लंबा खींचने के बजाय जल्द-से-जल्द अपने लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में यह तनाव किस दिशा में जाएगा,लेकिन इतना जरूर है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है। खासतौर पर ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर इसका प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह बयान न केवल मौजूदा सैन्य अभियान की दिशा को स्पष्ट करता है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमेरिका इस संघर्ष को लेकर कितनी आक्रामक और स्पष्ट रणनीति अपना रहा है। आने वाले हफ्ते इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं,जब यह तय होगा कि क्या यह टकराव कूटनीति के जरिए सुलझेगा या फिर और अधिक गंभीर रूप लेगा।