मुंबई,2 अप्रैल (युआईटीवी)- दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना से जुड़े बहुचर्चित कानूनी विवाद में अभिनेत्री अनीता आडवाणी को बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी उस अपील को खारिज कर दिया है,जिसमें उन्होंने अपने और राजेश खन्ना के रिश्ते को कानूनी रूप से विवाह का दर्जा देने की माँग की थी। अदालत के इस फैसले के साथ ही वर्षों से चल रही इस कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस शर्मिला देशमुख की पीठ ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद साफ तौर पर कहा, “फर्स्ट अपील डिसमिस्ड,” यानी अनीता आडवाणी की अपील खारिज की जाती है। अदालत ने अपने इस फैसले में डिंडोशी सेशन कोर्ट के पहले दिए गए आदेश को भी बरकरार रखा है,जिसमें पहले ही यह कहा जा चुका था कि अनीता और राजेश खन्ना के बीच का रिश्ता कानूनी रूप से विवाह के बराबर नहीं माना जा सकता।
यह मामला साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद से ही विवादों में रहा है। अनीता आडवाणी ने दावा किया था कि वह लंबे समय तक अभिनेता के साथ रिश्ते में थीं और यह संबंध एक वैवाहिक रिश्ते जैसा था। उन्होंने अदालत से इस रिश्ते को कानूनी मान्यता देने और अभिनेता की संपत्ति में हिस्सेदारी की माँग की थी। हालाँकि,अदालत ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया।
सुनवाई के दौरान राजेश खन्ना के परिवार की ओर से भी मजबूत पक्ष रखा गया। डिंपल कपाड़िया,ट्विंकल खन्ना और अक्षय कुमार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में यह दलील दी कि अनीता आडवाणी का दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। अदालत ने इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया।
अनीता आडवाणी ने यह भी आरोप लगाया था कि राजेश खन्ना की मौत के बाद उन्हें उनके प्रसिद्ध बंगले ‘आशीर्वाद’ से जबरन बाहर कर दिया गया था। उन्होंने इस घटना को लेकर परिवार के सदस्यों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। हालाँकि,यह बंगला अब काफी समय पहले बेचा जा चुका है और इस पर भी विवाद समाप्त हो चुका है।
इस मामले का एक और पहलू यह भी रहा है कि अनीता आडवाणी ने अक्षय कुमार,डिंपल कपाड़िया और ट्विंकल खन्ना के खिलाफ घरेलू हिंसा और मारपीट के आरोप भी लगाए थे,लेकिन साल 2015 में अदालत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। उस समय भी कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि अनीता और राजेश खन्ना का रिश्ता कानूनी विवाह के रूप में मान्य नहीं है।
भारतीय कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को कुछ मामलों में मान्यता दी जाती है,लेकिन उसे स्वतः विवाह के बराबर नहीं माना जाता। इस मामले में भी अदालत ने यही रुख अपनाते हुए कहा कि केवल लंबे समय तक साथ रहने के आधार पर किसी रिश्ते को विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता,जब तक कि उसके लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी न हों।
राजेश खन्ना,जिन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार माना जाता है,ने अपने जीवन के अंतिम दिन ‘आशीर्वाद’ बंगले में बिताए थे। उनकी निजी जिंदगी और रिश्तों को लेकर हमेशा चर्चा रही है और उनके निधन के बाद यह विवाद और भी गहरा गया। अनीता आडवाणी के दावे ने इस विवाद को कानूनी मोड़ दे दिया था,जो अब तक विभिन्न अदालतों में चलता रहा।
हालाँकि,बॉम्बे हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है,लेकिन अपील खारिज होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने अनीता आडवाणी के दावों को स्वीकार नहीं किया है। यह फैसला न केवल इस मामले के लिए महत्वपूर्ण है,बल्कि ऐसे मामलों के लिए भी एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है,जहाँ लिव-इन रिलेशनशिप को विवाह का दर्जा देने की माँग की जाती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि व्यक्तिगत संबंधों को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए ठोस साक्ष्य और वैधानिक आधार आवश्यक होते हैं। केवल भावनात्मक या सामाजिक आधार पर अदालत ऐसे संबंधों को वैवाहिक दर्जा नहीं दे सकती।
यह फैसला अनीता आडवाणी के लिए एक बड़ा झटका है,जबकि राजेश खन्ना के परिवार के लिए यह एक कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि क्या अनीता इस फैसले को किसी उच्च अदालत में चुनौती देती हैं या इस लंबे विवाद का यहीं अंत हो जाता है।
