ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@vick55top)

होर्मुज संकट पर ब्रिटेन का बड़ा रुख: ‘आर्थिक हित, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीति हमारी प्राथमिकता’—कीर स्टार्मर

कैनबरा,2 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता के बीच कीर स्टार्मर ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार का मुख्य फोकस देश के आर्थिक हितों की रक्षा,ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने पर है। उन्होंने यह भी माना कि आम लोग बढ़ती महँगाई और रोजमर्रा के खर्च को लेकर चिंतित हैं,लेकिन सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से तैयार है।

स्टार्मर ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद ब्रिटेन के नागरिकों को तत्काल राहत देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के “पाँच-पॉइंट प्लान” का असर अब दिखने लगा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऊर्जा बिल में कमी है। उन्होंने कहा, “आज आपके एनर्जी बिल कम होंगे,क्योंकि बजट में जो फैसले लिए गए थे,वे लागू हो चुके हैं। इसके अलावा,चाहे ईरान में जो भी हो,फिलहाल जुलाई तक कीमतें फिक्स हैं।” यह बयान सीधे उस चिंता को संबोधित करता है,जो होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते वैश्विक तेल कीमतों में संभावित उछाल को लेकर बनी हुई है।

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है,क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। यहाँ किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में ब्रिटेन की सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि अंतर्राष्ट्रीय संकट का घरेलू अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

इस दौरान स्टार्मर ने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी,जिसमें अमेरिका के नाटो से बाहर निकलने की संभावना जताई गई थी। स्टार्मर ने इसे “दबाव बनाने की रणनीति” और “शोर” करार देते हुए कहा कि नाटो अब तक का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन है और ब्रिटेन इसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बावजूद ब्रिटेन अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा।

स्टार्मर ने यह भी साफ कर दिया कि ब्रिटेन इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, “यह हमारी लड़ाई नहीं है और हम इसमें नहीं फँसेंगे।” हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूरोप के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना जरूरी है,खासकर जब बात रक्षा,सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की हो। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि ब्रिटेन एक संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है,जिसमें वह सीधे सैन्य टकराव से दूर रहते हुए भी अपने रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके।

होर्मुज संकट के समाधान के लिए स्टार्मर ने कूटनीतिक पहल की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन इस सप्ताह के अंत में एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा,जिसमें वे देश शामिल होंगे जो इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने में सहयोग करना चाहते हैं। इस बैठक की अध्यक्षता यवेट कूपर करेंगी और इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

इस प्रस्तावित बैठक में नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने,फँसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को फिर से शुरू करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। यह पहल इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन इस संकट को केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं मानता,बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर हल करने की जरूरत समझता है।

स्टार्मर ने यह भी बताया कि ब्रिटेन पहले से ही इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। देश के विदेश मंत्री और चांसलर जी7 देशों के अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं,जबकि रक्षा मंत्री मध्य पूर्व के साझेदार देशों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। इसके अलावा,ब्रिटेन ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 35 देशों को एक साझा पहल के तहत साथ लाने का प्रयास किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कूटनीतिक प्रयास वैश्विक स्तर पर तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाता है, तो इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी,बल्कि वैश्विक बाजारों में स्थिरता भी आएगी।

स्टार्मर ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि ब्रिटेन में जीवनयापन की लागत को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि मध्य पूर्व में तनाव को कम किया जाए और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से चालू किया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस दिशा में हर संभव कूटनीतिक कदम उठाएगी,ताकि देश को इस संकट के प्रभाव से बचाया जा सके।

स्टार्मर का यह रुख एक संतुलित और व्यावहारिक रणनीति को दर्शाता है,जिसमें आर्थिक स्थिरता,ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है,ब्रिटेन का यह दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि वह संकट का समाधान टकराव के बजाय संवाद और सहयोग के जरिए तलाशना चाहता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिटेन की यह पहल कितनी सफल होती है और क्या इससे होर्मुज संकट का कोई स्थायी समाधान निकल पाता है।