मुंबई,2 अप्रैल (युआईटीवी)- अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पश्चिम एशिया को लेकर दिए गए ताजा बयान का असर अब कमोडिटी बाजार पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। गुरुवार को सोने और चाँदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई,जिससे उन निवेशकों को बड़ा झटका लगा है,जो इन धातुओं को सुरक्षित निवेश के तौर पर देख रहे थे। दिन के कारोबार के दौरान सोना और चाँदी दोनों में 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई,जो हाल के समय में एक बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के वायदा भाव में तेज गिरावट देखी गई। 5 जून के सोना वायदा अनुबंध में करीब 3.60 प्रतिशत यानी लगभग 6,000 रुपए की गिरावट दर्ज की गई और इसकी कीमत 1,47,100 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे लो तक पहुँच गई। हालाँकि,बाद में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली,लेकिन खबर लिखे जाने तक भी सोना करीब 3.68 प्रतिशत यानी 5,659 रुपए की गिरावट के साथ 1,48,049 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया।
चाँदी के बाजार में गिरावट और भी अधिक तेज रही। 5 मई के चाँदी वायदा अनुबंध में 7 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई,जिससे इसकी कीमत 17,200 रुपए से अधिक टूटकर 2,24,500 रुपए प्रति किलोग्राम के इंट्राडे लो तक पहुँच गई। हालाँकि,बाद में कुछ सुधार हुआ,लेकिन फिर भी चाँदी 7.10 प्रतिशत यानी 17,280 रुपए की गिरावट के साथ 2,26,221 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी यही रुख देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड की कीमत 2.26 प्रतिशत गिरकर 4,650.30 डॉलर तक पहुँच गई,जबकि स्पॉट सिल्वर 4.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71.50 डॉलर पर आ गया। वहीं,कॉमेक्स बाजार में भी सोना 2.73 प्रतिशत गिरकर 4,813 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया,जबकि चाँदी करीब 6 प्रतिशत टूटकर 71 डॉलर के आसपास पहुँच गई।
विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण ट्रंप का हालिया बयान है,जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष समाप्ति के करीब हो सकता है। हालाँकि,उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान के खिलाफ बेहद सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इस दोहरे संदेश ने बाजार में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय सोना और चाँदी जैसी धातुएँ सुरक्षित निवेश के रूप में उभरती हैं,लेकिन इस बार निवेशकों का रुख थोड़ा अलग नजर आया। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल स्थिति को लेकर स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इन धातुओं की माँग सीमित बनी हुई है। इसके अलावा,बाजार में मुनाफावसूली भी गिरावट का एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
इस बीच,कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है,जो वैश्विक बाजारों के लिए एक अलग चिंता का विषय बन गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई,जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। तेल की कीमतों में यह उछाल मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित संकट के कारण देखा जा रहा है।
ट्रंप ने अपने बयान में मध्य पूर्व के तेल पर निर्भर देशों से अपील की है कि वे शिपिंग रूट्स को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सहयोग करें और इस क्षेत्र पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाएं। इस बयान का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है,क्योंकि इससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार का रुख काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है,तो सोने और चाँदी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं,यदि स्थिति बिगड़ती है, तो इन धातुओं में फिर से तेजी आ सकती है।
गुरुवार का दिन कमोडिटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। जहाँ एक ओर सोना और चाँदी में भारी गिरावट ने निवेशकों को नुकसान पहुँचाया,वहीं तेल की कीमतों में तेजी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बाजार की दिशा को समझते हुए ही निवेश के फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।
