नई दिल्ली,3 अप्रैल (युआईटीवी)- इंडियन प्रीमियर लीग 2026 की शुरुआत से पहले एक बड़ा विवाद सामने आया है,जिसमें श्रीलंका के तेज गेंदबाज नुवान तुषारा और श्रीलंका क्रिकेट आमने-सामने आ गए हैं। तुषारा को आईपीएल में हिस्सा लेने के लिए जरूरी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ यानी एनओसी देने से इनकार कर दिया गया है,जिसके बाद खिलाड़ी ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए कोलंबो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। इस मामले ने क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर दी है और अब सबकी नजरें अदालत के फैसले पर टिक गई हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार,तुषारा को आईपीएल 2026 के लिए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ कॉन्ट्रैक्ट मिला था। यह उनके लिए एक बड़ा अवसर था,क्योंकि वह पहले भी पिछले दो सीजन में इस लीग का हिस्सा रह चुके हैं और उस दौरान उन्हें श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से एनओसी मिल चुका था,लेकिन इस बार बोर्ड के रुख में अचानक बदलाव देखने को मिला है,जिसने पूरे मामले को विवादास्पद बना दिया है।
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि तुषारा जरूरी फिटनेस मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं,इसलिए उन्हें एनओसी नहीं दिया जा सकता। बोर्ड के अनुसार,राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों के लिए निर्धारित फिटनेस स्तर को बनाए रखना अनिवार्य है और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती। हालाँकि,तुषारा ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए इसे अनुचित और मनमाना निर्णय बताया है।
गुरुवार को इस मामले की सुनवाई कोलंबो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में हुई,जहाँ अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 9 अप्रैल की तारीख तय की है। अपनी याचिका में तुषारा ने बोर्ड के कई वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया है,जिनमें अध्यक्ष शम्मी सिल्वा, सचिव बंदुला दिसानायके,कोषाध्यक्ष सुजीवा गोदालियाद्दा और सीईओ एशले डी सिल्वा शामिल हैं। इससे यह साफ होता है कि मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं है,बल्कि यह एक बड़े संस्थागत विवाद का रूप ले चुका है।
तुषारा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनका सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है और उन्होंने पहले ही बोर्ड को यह सूचित कर दिया था कि वे इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उनका दावा है कि इस फैसले के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम की योजनाओं से लगभग बाहर कर दिया गया है। ऐसे में बोर्ड द्वारा फिटनेस का हवाला देकर एनओसी रोकना न केवल अनुचित है,बल्कि उनके पेशेवर करियर के साथ भी अन्याय है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनकी फिटनेस में कोई गिरावट नहीं आई है और वह वही स्तर बनाए हुए हैं,जो पिछले वर्षों में था। उन्हीं वर्षों में उन्हें आईपीएल समेत कई अंतर्राष्ट्रीय लीग में खेलने की अनुमति दी गई थी। ऐसे में अब अचानक उन्हें अयोग्य बताना कई सवाल खड़े करता है। तुषारा का कहना है कि यह निर्णय उनके खिलाफ पक्षपातपूर्ण रवैये को दर्शाता है।
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एनओसी एक जरूरी औपचारिकता होती है,जिसके बिना कोई भी खिलाड़ी विदेशी लीग में हिस्सा नहीं ले सकता। ऐसे में बोर्ड द्वारा एनओसी से इनकार करना खिलाड़ी के करियर पर सीधा असर डालता है,खासकर तब जब वह खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का नियमित हिस्सा न हो और अपनी आय के लिए लीग क्रिकेट पर निर्भर हो।
तुषारा ने अदालत से राहत की माँग करते हुए यह अपील की है कि उन्हें एनओसी प्राप्त करने का अधिकार घोषित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अंतरिम और स्थायी आदेश की भी माँग की है,ताकि उन्हें आईपीएल और अन्य अंतर्राष्ट्रीय लीगों में खेलने की अनुमति मिल सके। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय पर अनुमति नहीं मिली,तो वह एक बड़े अवसर से वंचित हो जाएँगे,जिससे उनके करियर और आर्थिक स्थिति दोनों पर असर पड़ेगा।
इस विवाद ने खिलाड़ियों और क्रिकेट बोर्डों के बीच संबंधों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्डों को खिलाड़ियों के करियर और उनकी स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना चाहिए। खासकर ऐसे समय में जब टी20 लीग्स खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुकी हैं,वहाँ इस तरह के प्रतिबंधों को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नीतियों की जरूरत है।
दूसरी ओर,बोर्ड का पक्ष भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों की फिटनेस सुनिश्चित करना किसी भी क्रिकेट बोर्ड की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है,लेकिन जब कोई खिलाड़ी खुद को राष्ट्रीय योजनाओं से बाहर मानता है और स्वतंत्र रूप से लीग क्रिकेट खेलना चाहता है,तो ऐसे मामलों में लचीलापन जरूरी हो जाता है।
फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और 9 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में इस पर महत्वपूर्ण निर्णय आ सकता है। यह फैसला न केवल नुवान तुषारा के करियर के लिए अहम होगा,बल्कि भविष्य में खिलाड़ियों और बोर्डों के बीच संबंधों की दिशा भी तय कर सकता है।
आईपीएल 2026 से पहले यह विवाद क्रिकेट जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या तुषारा को आईपीएल में खेलने का मौका मिल पाता है या नहीं।
