नई दिल्ली,3 अप्रैल (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर चेक बाउंस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस दौरान अदालत ने अभिनेता के बदलते रुख और उनकी ओर से पेश की गई दलीलों में विरोधाभास को लेकर कड़ी नाराजगी भी जताई। यह मामला मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर किया गया था, जिसमें अभिनेता पर बड़ी रकम का भुगतान न करने का आरोप है।
इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अदालत में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय की विनम्रता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान उन्होंने अभिनेता और उनके वकील के बयानों में अंतर को लेकर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एक ओर अभिनेता यह कह रहे हैं कि वे भुगतान करने को तैयार हैं,जबकि उनके वकील यह दलील दे रहे हैं कि चूँकि वे पहले ही जेल जा चुके हैं,इसलिए उन्हें भुगतान नहीं करना चाहिए। इस विरोधाभास पर अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भुगतान करने की इच्छा है,तो फिर न्यायालय के समय की आवश्यकता ही क्या है।
दरअसल यह मामला द नेगोसिबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के सेक्शन 138 के तहत दर्ज किया गया है,जो चेक बाउंस जैसे आर्थिक अपराधों से संबंधित है। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि अभिनेता ने उन्हें बड़ी राशि का भुगतान नहीं किया,जिसके चलते यह विवाद कानूनी रूप ले चुका है। अदालत में कंपनी की ओर से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट में करीब 2 करोड़ रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं,लेकिन अभी भी लगभग 7.75 करोड़ रुपये बकाया हैं।
इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो मई 2024 में एक सेशन कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। हालाँकि,बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी,क्योंकि अभिनेता के वकील ने यह भरोसा दिलाया था कि दोनों पक्ष आपसी समझौते के जरिए मामले को सुलझा लेंगे। इसी उद्देश्य से इस विवाद को अदालत के मेडिएशन सेंटर में भी भेजा गया था।
लेकिन अदालत के अनुसार,कई बार अवसर देने और आश्वासन के बावजूद अभिनेता ने तय समय पर भुगतान नहीं किया। इसके बाद अदालत ने उन्हें करीब 2.5 करोड़ रुपये किस्तों में जमा करने की अनुमति दी थी,लेकिन यह राशि भी समय पर जमा नहीं कराई गई। यही कारण रहा कि फरवरी 2026 में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए अभिनेता को जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने अदालत के आदेश का पालन करते हुए सरेंडर किया और कुछ समय जेल में भी बिताया। इसके बाद जब उन्होंने शिकायतकर्ता को 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया,तब अदालत ने उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगाई। हालाँकि,यह राहत स्थायी नहीं थी और मामले का अंतिम निपटारा अभी बाकी है।
हालिया सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को एक बार फिर समझौते का विकल्प सुझाया। न्यायाधीश ने पूछा कि क्या कम राशि पर विवाद समाप्त किया जा सकता है। इस पर शिकायतकर्ता पक्ष ने संकेत दिया कि यदि 6 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है,तो वे समझौते पर विचार कर सकते हैं। इस प्रस्ताव के जवाब में अभिनेता ने अदालत के समक्ष 30 दिन का समय माँगा,ताकि वे यह राशि जुटा सकें।
लेकिन अदालत ने इस अनुरोध को सख्ती से खारिज कर दिया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “नहीं का मतलब नहीं,” और आगे कहा कि अब इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है तथा किसी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। इस टिप्पणी से यह साफ हो गया कि अदालत अब इस मामले में और देरी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए राजपाल यादव ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे न्यायालय के हर आदेश का पालन करेंगे। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें सजा मिलने से कोई आपत्ति नहीं है और अदालत जो भी भुगतान निर्धारित करेगी,वह उसे पूरा करेंगे। हालाँकि,उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अभिनेता के अनुसार,उनसे अब तक 17 करोड़ रुपये लिए जा चुके हैं और उन्हें अपने पांच फ्लैट तक बेचने पड़े हैं।
इस बयान ने मामले को और जटिल बना दिया है,क्योंकि एक ओर अभिनेता आर्थिक कठिनाइयों की बात कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष लगातार बकाया राशि के भुगतान की माँग कर रहा है। अदालत ने भी इस बात पर जोर दिया कि जेल की सजा काट लेना किसी व्यक्ति की वित्तीय जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता। यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि अदालत इस मामले को केवल दंडात्मक दृष्टिकोण से नहीं,बल्कि आर्थिक दायित्व के दृष्टिकोण से भी देख रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक लेन-देन से जुड़े मामलों में अदालतें बेहद सख्त रुख अपनाती हैं। विशेष रूप से चेक बाउंस जैसे मामलों में कानून स्पष्ट है और दोषी पाए जाने पर सजा के साथ-साथ बकाया राशि का भुगतान भी अनिवार्य होता है।
अब इस मामले में सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है। यह फैसला न केवल राजपाल यादव के भविष्य को प्रभावित करेगा,बल्कि यह भी तय करेगा कि उन्हें बकाया राशि किस प्रकार और कितने समय में चुकानी होगी। साथ ही यह भी संभव है कि अदालत इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे।
फिलहाल,यह मामला बॉलीवुड और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहाँ एक ओर अभिनेता की छवि और करियर पर इसका असर पड़ सकता है,वहीं दूसरी ओर यह मामला एक उदाहरण भी बन सकता है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी भी तरह की लापरवाही या टालमटोल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
