काबुल,4 अप्रैल (युआईटीवी)- अफगानिस्तान में शुक्रवार देर रात आए 5.9 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को उजागर कर दिया। इस भूकंप के झटके न केवल अफगानिस्तान के कई हिस्सों में महसूस किए गए,बल्कि काबुल सहित राजधानी क्षेत्र में भारी नुकसान की खबर भी सामने आई है। इस हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई,जबकि एक बच्चा घायल बताया जा रहा है।
अफगानिस्तान नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के प्रवक्ता मोहम्मद यूसुफ हम्माद के अनुसार,भूकंप का केंद्र उत्तरी अफगानिस्तान में था। उन्होंने बताया कि झटके इतने तेज थे कि काबुल प्रांत में एक घर पूरी तरह ढह गया,जिसके मलबे में दबकर आठ लोगों की मौत हो गई। यह घटना स्थानीय स्तर पर भारी दुख और दहशत का कारण बन गई है। घायल बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है,जहाँ उसका इलाज जारी है।
भूकंप के वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार,इसका केंद्र 36.55 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.85 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। इसकी गहराई करीब 186.4 किलोमीटर बताई गई है। हालाँकि,यह गहराई अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है,लेकिन इसके बावजूद झटके इतने प्रभावशाली थे कि व्यापक क्षेत्र में महसूस किए गए।
इस भूकंप का असर भारत तक भी देखने को मिला। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों ने झटके महसूस किए। नोएडा,गुरुग्राम,गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों में लोग अचानक घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने बताया कि झटके कुछ सेकंड तक ही रहे,लेकिन इतने तेज थे कि फर्नीचर और घर में रखी चीजें हिलने लगीं।
दिल्ली-एनसीआर में कई रिहायशी इलाकों में लोग एहतियात के तौर पर इमारतों से बाहर निकल आए। ऑफिस में काम कर रहे कर्मचारियों को भी कुछ समय के लिए बाहर आना पड़ा। हालाँकि,भारत में इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है,लेकिन अचानक आए झटकों ने लोगों के बीच डर का माहौल जरूर पैदा कर दिया।
अफगानिस्तान में भूकंप कोई नई घटना नहीं है। यह देश दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहाँ हर साल औसतन करीब 560 लोगों की मौत भूकंप से होती है और लगभग 80 मिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है। पिछले कुछ दशकों के आँकड़े बताते हैं कि 1990 से अब तक यहां 5.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले कम से कम 355 भूकंप आ चुके हैं।
भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो अफगानिस्तान की स्थिति बेहद संवेदनशील है। यह क्षेत्र यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट और इंडियन प्लेट के संगम क्षेत्र में स्थित है। इन प्लेटों के लगातार टकराने और सरकने की प्रक्रिया के कारण यहाँ भूकंप की घटनाएँ बार-बार होती रहती हैं। इसके अलावा दक्षिण दिशा में स्थित अरेबियन प्लेट का भी इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडियन प्लेट का उत्तर की ओर बढ़ना और यूरेशियन प्लेट से टकराना इस क्षेत्र में भूकंप का प्रमुख कारण है। यह टकराव जमीन के भीतर भारी दबाव पैदा करता है,जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर आता है। यही वजह है कि अफगानिस्तान के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी इलाके,खासकर उज्बेकिस्तान,ताजिकिस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं से सटे क्षेत्र, भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।
काबुल जैसे घनी आबादी वाले शहरों में भूकंप का खतरा और भी अधिक होता है। अध्ययन बताते हैं कि यहाँ हर साल भूकंप से औसतन 17 मिलियन डॉलर का नुकसान होता है। खराब निर्माण गुणवत्ता,पुरानी इमारतें और सीमित आपदा प्रबंधन संसाधन इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।
अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में भूकंप का असर और भी गंभीर हो सकता है। यहाँ भूकंप के बाद भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटनाएँ आम हैं,जो अतिरिक्त नुकसान का कारण बनती हैं। पहाड़ी ढलानों पर बसे गांवों में इस तरह की घटनाएँ जानलेवा साबित हो सकती हैं,क्योंकि बचाव कार्यों में भी कठिनाई आती है।
हालिया भूकंप ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि अफगानिस्तान को अपने आपदा प्रबंधन ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है। हालाँकि,देश में संसाधनों की कमी और राजनीतिक अस्थिरता के चलते यह कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है,लेकिन लगातार बढ़ती आपदाओं के बीच यह बेहद जरूरी हो गया है।
5.9 तीव्रता के इस भूकंप ने अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। जहाँ एक ओर इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई,वहीं दूसरी ओर यह घटना एक चेतावनी भी है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी और मजबूत ढाँचे की आवश्यकता है। आने वाले समय में इस दिशा में उठाए गए कदम ही भविष्य में होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।
