वाशिंगटन,8 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है,जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस फैसले को इजरायल का भी समर्थन मिला है,जिससे क्षेत्र में हालात स्थिर करने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है,जब पिछले कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा था और बड़े संघर्ष की आशंका जताई जा रही थी।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार,इस समझौते को अंतिम रूप देने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत ने अहम भूमिका निभाई। बताया गया कि ट्रंप ने नेतन्याहू से सीधे संपर्क कर युद्धविराम के ढाँचे पर सहमति बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया,जिसके बाद यह समझौता संभव हो सका।
रिपोर्ट्स के मुताबिक,ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से भी बातचीत की थी। इस बातचीत को क्षेत्रीय संतुलन और कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है,हालाँकि इसके विस्तृत पहलुओं पर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है,जब अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को फिलहाल टालने का फैसला किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह दो हफ्तों के लिए हमले रोकने को तैयार हैं,लेकिन इसके बदले ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह,तुरंत और सुरक्षित तरीके से फिर से खोलना होगा। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है,जहाँ से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है।
ईरान ने भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए हैं,हालाँकि उसने इसे कुछ शर्तों के साथ स्वीकार किया है। ईरानी पक्ष ने कहा है कि यदि उस पर हमले बंद होते हैं,तो वह भी अपनी सैन्य गतिविधियों को रोक देगा। साथ ही, इस दो हफ्तों की अवधि के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सीमित और नियंत्रित तरीके से जहाजों की आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। यह कदम व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति को राहत देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इजरायल ने भी इस युद्धविराम का समर्थन किया है। यह समर्थन इसलिए अहम है,क्योंकि इजरायल इस पूरे क्षेत्रीय तनाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अमेरिकी रुख के अनुरूप इजरायल का यह कदम इस बात का संकेत देता है कि क्षेत्रीय शक्तियाँ फिलहाल स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के पक्ष में हैं।
ट्रंप प्रशासन ने इस युद्धविराम को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है,जिसका उद्देश्य सैन्य कार्रवाई के बाद कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह अमेरिका की एक बड़ी सफलता है,जिसे राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना के प्रयासों से संभव बनाया गया है। उनके इस बयान को प्रशासन की ओर से इस पहल को सकारात्मक तरीके से पेश करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दो हफ्तों का युद्धविराम बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि इसी दौरान दोनों पक्ष व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं। हालाँकि,उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और किसी भी छोटी घटना से तनाव फिर से बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में लंबे समय से चल रहे इस तनाव का असर वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है,खासकर ऊर्जा बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर। ऐसे में इस युद्धविराम को एक राहत भरे कदम के रूप में देखा जा रहा है,जो कम-से-कम अस्थायी रूप से हालात को स्थिर कर सकता है।
फिलहाल,सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दो हफ्तों में बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी स्थायी समाधान तक पहुँच पाते हैं। यदि ऐसा होता है,तो यह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।
