महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी घमासान (तस्वीर क्रेडिट@BJP4Bihar)

महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी घमासान: पटना में ‘जन आक्रोश महिला मार्च’,भाजपा ने विपक्ष पर साधा निशाना

पटना,20 अप्रैल (युआईटीवी)- बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी माहौल गर्म नजर आया,जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘जन आक्रोश महिला मार्च’ का आयोजन किया गया। इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं और उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। गांधी मैदान स्थित कारगिल चौक पर सुबह से ही महिलाओं का जुटान शुरू हो गया था,जहाँ से यह मार्च आगे बढ़ा। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के हाथों में तख्तियाँ थीं,जिन पर महिला अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े संदेश लिखे हुए थे।

इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि कुछ महिलाओं ने अनोखे तरीके से अपना विरोध जताया। एक महिला ने खुद को बेड़ियों में जकड़कर यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभी भी बंधनों में जकड़ी हुई है। इस दृश्य ने वहाँ मौजूद लोगों का ध्यान खींचा और प्रदर्शन को प्रतीकात्मक रूप से और प्रभावशाली बना दिया।

इस मार्च में शामिल होने पहुंचीं भाजपा नेता श्रेयसी सिंह ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पूरे देश की महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम था,लेकिन 17 अप्रैल को संसद में जो हुआ,उसने महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुँचाई है। उनके अनुसार,यह सिर्फ एक विधेयक का पारित न होना नहीं है,बल्कि यह महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल मंचों से महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं,लेकिन जब वास्तविक निर्णय लेने का समय आता है,तो वे पीछे हट जाते हैं।

भाजपा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने जानबूझकर इस विधेयक को रोकने का काम किया है,जिससे महिलाओं के अधिकारों का हनन हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की सोच में खोट है और वे नहीं चाहते कि देश की आम महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया है।

इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी जिक्र किया गया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि एक महिला होते हुए भी उन्होंने इस विधेयक का समर्थन नहीं किया,जो महिलाओं के हितों के खिलाफ है। इस बयान के बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने भी इस मार्च का समर्थन करते हुए कहा कि यह महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की है और यह एक गंभीर गलती है,जिसका जवाब जनता देगी। उनके अनुसार,यह आंदोलन केवल पटना तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे राज्य और देश में इसका विस्तार होगा।

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि इस मार्च में शामिल महिलाओं का आक्रोश साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया है,उनके अपने घरों की महिलाएँ भी इस फैसले से दुखी हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर जिला और प्रखंड स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन किए जाएँगे।

इस बीच,जेडीयू नेता श्रवण कुमार ने भी विपक्ष के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए देशभर में विरोध मार्च निकाले जाने चाहिए। उनके अनुसार,जब तक इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन नहीं होगा,तब तक महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण विधेयक लंबे समय से भारतीय राजनीति का एक अहम मुद्दा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है,जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज को मजबूती मिल सके। हालाँकि,इस विधेयक को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी लंबे समय से रहे हैं।

पटना में आयोजित यह ‘जन आक्रोश महिला मार्च’ इस बात का संकेत है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल संसद तक सीमित नहीं है,बल्कि यह अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और इस लड़ाई को आगे भी जारी रखेगी।

वहीं,विपक्षी दलों की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है,लेकिन यह तय है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होगी। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में जो हलचल देखने को मिल रही है,वह आने वाले चुनावों पर भी असर डाल सकती है।

पटना का यह मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं,बल्कि महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को लेकर बढ़ती जागरूकता और सक्रियता का प्रतीक बनकर उभरा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आंदोलन का आगे क्या असर पड़ता है और क्या यह सरकार और विपक्ष के बीच किसी सहमति की राह खोल पाता है या नहीं।