अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

जन्म से नागरिकता पर ट्रंप के बयान से विवाद,भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने जताई कड़ी आपत्ति

वॉशिंगटन,24 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर विवाद तब गहरा गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने व्यापक बहस को जन्म दे दिया। इस पोस्ट में उन्होंने जन्म से मिलने वाली नागरिकता के प्रावधान पर सवाल उठाए और इमिग्रेंट्स के साथ-साथ कुछ संगठनों पर तीखा हमला किया। उनके इस बयान के बाद भारतीय-अमेरिकी संगठनों,सामाजिक समूहों और कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे नस्लीय तनाव को बढ़ाने वाला और समाज के लिए खतरनाक करार दिया है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए एक लंबे संदेश में अमेरिकी संविधान के तहत मिलने वाले जन्मसिद्ध नागरिकता अधिकार की आलोचना की। उन्होंने इस प्रावधान को लेकर कहा कि यह नीति अब देश के लिए समस्या बन चुकी है और इसके कारण बड़ी संख्या में लोग इसका फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर अदालतों या वकीलों के बजाय सीधे जनता से राय ली जानी चाहिए और राष्ट्रीय स्तर पर मतदान कराया जाना चाहिए।

अपने पोस्ट में ट्रंप ने अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन पर भी निशाना साधा और उसे “गैंगस्टर आपराधिक संगठन” तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संस्था देश की कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर रही है और इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में ऐसे कदम उठा रही है,जो अमेरिका के हित में नहीं हैं। ट्रंप के इस बयान ने कानूनी और सामाजिक हलकों में भी चिंता पैदा कर दी है।

इमिग्रेशन को लेकर ट्रंप के बयान में कई ऐसे दावे किए गए,जिन्हें आलोचक भ्रामक और भड़काऊ मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला कोई भी बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और बाद में वह अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी देश में बुला सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राज्यों,विशेषकर कैलिफोर्निया में,गोरे लोगों को रोजगार के अवसरों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है,खासकर तकनीकी क्षेत्र में।

इन बयानों के बाद भारतीय और एशियाई मूल के अमेरिकियों के बीच चिंता बढ़ गई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान “गहराई से परेशान करने वाला” है और इससे समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा मिल सकता है। संगठन ने कहा कि ट्रंप के शब्द भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को सीधे तौर पर निशाना बनाते हैं और इससे पहले से मौजूद नस्लीय तनाव और बढ़ सकता है।

संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की भाषा से नफरत और हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है,जो समाज के लिए खतरनाक है। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि वह इस पोस्ट को हटाएं और एशियाई-अमेरिकी समुदाय के योगदान को समझें और उसका सम्मान करें। उनके अनुसार,अमेरिका की प्रगति में विभिन्न समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस मुद्दे पर भारत की राजनीति से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्रंप के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं,तभी उन्होंने यह पोस्ट देखा और उन्हें यह बेहद आपत्तिजनक लगा। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत जैसे देशों के बारे में अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें नजरअंदाज करना बेहतर हो सकता है,लेकिन यह भी जरूरी है कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ शब्दों का चयन किया जाए। उनके अनुसार,इस तरह की बयानबाजी अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर भी असर डाल सकती है।

ट्रंप के इस पोस्ट में अमेरिकी कानूनी व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य का फैसला कुछ वकीलों या न्यायाधीशों पर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संविधान ऐसे समय में लिखा गया था,जब न तो आधुनिक तकनीक थी और न ही आज जैसी वैश्विक परिस्थितियाँ,इसलिए इसकी कुछ धाराओं की प्रासंगिकता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

अमेरिका में जन्म से नागरिकता का अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के तहत दिया गया है,जिसे लंबे समय से देश की कानूनी व्यवस्था का एक अहम हिस्सा माना जाता है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रावधान के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति,चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या इमिग्रेशन स्थिति कुछ भी हो, नागरिकता का हकदार होता है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर कोई भी बदलाव करना न केवल कानूनी रूप से जटिल है,बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान उस व्यापक बहस का हिस्सा है,जो अमेरिका में इमिग्रेशन और नागरिकता को लेकर लंबे समय से चल रही है। हालाँकि,जिस तरह से यह मुद्दा उठाया गया है,उसने इसे और अधिक विवादास्पद बना दिया है। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में विभाजन गहराने का खतरा है।

ट्रंप के इस सोशल मीडिया पोस्ट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि इमिग्रेशन और नागरिकता जैसे मुद्दे अमेरिका की राजनीति में कितने संवेदनशील हैं। जहाँ एक ओर कुछ लोग इसे आवश्यक बहस मानते हैं,वहीं दूसरी ओर कई समुदाय इसे अपनी पहचान और सुरक्षा से जुड़ा सवाल मानते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवाद का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर क्या असर पड़ता है और क्या इस पर कोई ठोस नीति परिवर्तन की दिशा में कदम उठाए जाते हैं या नहीं।