नई दिल्ली,24 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने घोषणा की है कि दोनों देश 27 अप्रैल को मुक्त व्यापार समझौते,यानी एफटीए पर हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा,बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए इस महत्वपूर्ण घोषणा की पुष्टि की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सोमवार को भारत के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया,जिसमें उन्होंने इस समझौते के संभावित लाभों को विस्तार से समझाया। इस वीडियो में वह एक औद्योगिक इकाई के दौरे पर नजर आए,जहाँ उन्होंने बताया कि यह समझौता न्यूजीलैंड के उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
अपने संबोधन में लक्सन ने कहा कि वह क्राइस्टचर्च में स्थित एक प्रमुख औद्योगिक संयंत्र में मौजूद थे,जो जलयान के लिए जेट इंजन का निर्माण करता है और अपने उत्पादों का निर्यात 70 से अधिक देशों में करता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस कंपनी को भारत को निर्यात करते समय टैरिफ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है,लेकिन एफटीए के लागू होने के बाद इन बाधाओं में कमी आएगी। इससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा,बल्कि उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इस समझौते को लेकर न्यूजीलैंड सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टोड मैक्ले ने पहले ही संकेत दे दिया था कि इस एफटीए से संबंधित कानूनी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दोनों देश हस्ताक्षर के लिए तैयार हैं। उन्होंने इसे “एक पीढ़ी में केवल एक बार मिलने वाला अवसर” बताया और कहा कि यह समझौता न्यूजीलैंड के निर्यातकों को एक विशाल बाजार तक पहुँच प्रदान करेगा।
मैक्ले ने अपने बयान में भारत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है,ऐसे में इस देश के साथ व्यापारिक साझेदारी न्यूजीलैंड के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है।
वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के इस दौर में यह समझौता और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध न्यूजीलैंड की आर्थिक स्थिरता और समृद्धि के लिए आवश्यक हैं। इस एफटीए के माध्यम से दोनों देश अपने-अपने उद्योगों को नए बाजारों में विस्तार का अवसर देंगे,जिससे व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
इस समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके बाद न्यूजीलैंड में औपचारिक संसदीय संधि समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इसके तहत देश की संसद और आम जनता को इस समझौते की विस्तृत समीक्षा करने का अवसर मिलेगा। यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने और समझौते के सभी पहलुओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं,लेकिन इस एफटीए के बाद इन संबंधों में और गहराई आने की उम्मीद है। भारत के लिए यह समझौता न्यूजीलैंड के कृषि,डेयरी,तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश और सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है। वहीं,न्यूजीलैंड के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में उभरता हुआ अवसर प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान में तेजी आएगी। साथ ही,निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे,जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
27 अप्रैल को होने वाला यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत करेगा। यह न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूती देगा,बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलेगा। आने वाले समय में इसके परिणामों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी,क्योंकि यह समझौता वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
