कोलकाता में हुगली तट पर पीएम मोदी ने जताई माँ गंगा के प्रति आस्था (तस्वीर क्रेडिट@ransinghBJP)

कोलकाता में हुगली तट पर पीएम मोदी ने जताई माँ गंगा के प्रति आस्था,चुनावी दौरे से पहले किया संवाद और चिंतन

कोलकाता,24 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल अपने चरम पर है और इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह कोलकाता में हुगली नदी के तट पर समय बिताकर अपनी आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश दिया। चुनावी सभाओं से पहले उनके इस शांत और आत्मीय कार्यक्रम ने राजनीतिक गतिविधियों के बीच एक अलग ही भावनात्मक माहौल बना दिया।

प्रधानमंत्री ने हुगली नदी के किनारे बिताए अपने अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा कि हर बंगाली के जीवन में गंगा का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं है,बल्कि यह बंगाल की आत्मा में बहने वाली वह धारा है,जो सदियों से संस्कृति, आस्था और जीवन का आधार रही है। उनके अनुसार,गंगा का पवित्र जल एक पूरी सभ्यता की शाश्वत भावना को अपने साथ समेटे हुए है।

अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने इस दौरान मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त किया। यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था,बल्कि एक ऐसा अवसर था जब उन्होंने खुद को इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया। हुगली तट पर बिताए गए इन पलों को उन्होंने आत्मिक शांति और प्रेरणा से भरपूर बताया।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने वहां मौजूद आम लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने नाविकों से बातचीत की,जो रोजाना नदी में मेहनत कर अपनी आजीविका चलाते हैं। प्रधानमंत्री ने उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ये लोग बंगाल की जीवंत परंपरा का हिस्सा हैं। इसके अलावा उन्होंने सुबह टहलने आए लोगों से भी संवाद किया और उनकी बातों को सुना।

हुगली तट पर यह दृश्य एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा था,जहाँ प्रधानमंत्री आम लोगों के बीच सहजता से घुलते-मिलते नजर आए। लोगों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और अभिवादन किया,जिसे प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया। यह मुलाकातें केवल औपचारिक नहीं थीं,बल्कि उनमें एक आत्मीयता झलक रही थी।

इस दौरान प्रधानमंत्री के हाथ में कैमरा भी नजर आया। उन्होंने हुगली नदी और उसके आसपास के खूबसूरत दृश्यों को अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश की। उन्होंने खुद बताया कि उन्होंने नदी की तस्वीरें लेने का प्रयास किया और इस अनुभव को खास बताया। यह पहल उनके उस पक्ष को भी दर्शाती है,जहाँ वह प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत को करीब से महसूस करने की कोशिश करते हैं।

प्रधानमंत्री को इस दौरान विद्यासागर सेतु और हावड़ा ब्रिज का नजारा भी करीब से देखने को मिला। ये दोनों पुल न केवल कोलकाता की पहचान हैं,बल्कि शहर की ऐतिहासिक और आधुनिक पहचान के प्रतीक भी हैं। इन स्थलों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इन प्रतिष्ठित संरचनाओं को नजदीक से देखने का अवसर मिला,जो उनके लिए यादगार अनुभव रहा।

प्रधानमंत्री ने अपने इस दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल के विकास और यहाँ के लोगों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है और आगे भी करती रहेगी। उनका यह संदेश स्पष्ट रूप से चुनावी संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हुगली तट पर बिताए गए इन पलों के बाद प्रधानमंत्री का दिन पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों के नाम रहा। उन्होंने कोलकाता के दमदम और जादवपुर में बड़ी चुनावी सभाओं को संबोधित करने का कार्यक्रम तय किया। जानकारी के अनुसार,वह सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दमदम पहुँचे,जहाँ उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद दोपहर एक बजे जादवपुर में उनकी दूसरी रैली आयोजित की गई।

इन रैलियों में प्रधानमंत्री ने राज्य की मौजूदा स्थिति,विकास के मुद्दों और केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुगली तट पर प्रधानमंत्री की यह शांत और सांस्कृतिक गतिविधि उनके चुनावी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी हो सकती है,जो मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश को दर्शाती है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों का हमेशा से महत्व रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का गंगा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और आम लोगों से सीधे संवाद करना चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। यह कदम उन मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है,जो सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को महत्व देते हैं।

प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल एक चुनावी कार्यक्रम नहीं था,बल्कि इसमें आस्था,संस्कृति और राजनीति का अनूठा संगम देखने को मिला। हुगली तट पर बिताए गए उनके ये पल न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव थे,बल्कि उन्होंने इसके जरिए बंगाल के लोगों के साथ एक भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश भी की। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह के प्रयास चुनावी परिणामों पर कितना असर डालते हैं।