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विदेशी मुद्रा भंडार में फिर आई मजबूती,आरबीआई के आँकड़ों से सुधरते संकेत,भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.3 अरब डॉलर हुआ

मुंबई,25 अप्रैल (युआईटीवी)- भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आँकड़ों के अनुसार,देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर वृद्धि दर्ज की गई है। 17 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 2.3 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है,जिसके बाद कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.30 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है,जब पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक परिस्थितियों और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण भंडार पर दबाव बना हुआ था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह दर्शाता है कि धीरे-धीरे बाहरी दबाव कम हो रहा है और स्थिति स्थिरता की ओर बढ़ रही है। हालाँकि,यह भी ध्यान देने योग्य है कि विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी अपने उच्चतम स्तर से नीचे बना हुआ है। 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर तक पहुँच गया था,लेकिन उसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते इसमें गिरावट दर्ज की गई।

इस बीच,देश के स्वर्ण भंडार में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। ताजा आँकड़ों के अनुसार,भारत का गोल्ड रिजर्व 122.13 अरब डॉलर से अधिक हो गया है,जिसमें 79 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है। सोने के भंडार में यह बढ़ोतरी न केवल निवेश के सुरक्षित विकल्प के रूप में इसकी अहमियत को दर्शाती है,बल्कि यह भी संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक अपनी संपत्ति को विविधता प्रदान करने की दिशा में कदम उठा रहा है।

इसके अलावा,स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी एसडीआर भी मामूली रूप से बढ़कर 18.84 अरब डॉलर हो गए हैं। वहीं,अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व पोजीशन भी 14 मिलियन डॉलर बढ़कर 48.70 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। ये सभी आँकड़ें मिलकर यह दिखाते हैं कि भारत की कुल विदेशी संपत्ति में संतुलित वृद्धि हो रही है,जो आर्थिक मजबूती का संकेत है।

पिछले कुछ समय में वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और विदेशी निवेशकों के बाहर जाने के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ था। इस स्थिति को सँभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा और डॉलर की बिक्री के माध्यम से रुपये को स्थिर रखने का प्रयास किया गया। इस हस्तक्षेप का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा, जिससे इसमें गिरावट देखने को मिली थी।

हालाँकि,हालिया आँकड़ें यह संकेत देते हैं कि अब यह दबाव कुछ हद तक कम हो रहा है। इससे पहले 10 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में भी फॉरेक्स रिजर्व में 3.825 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी,जबकि 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में यह 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर हो गया था। लगातार दो-तीन हफ्तों में हुई इस बढ़ोतरी से यह स्पष्ट होता है कि विदेशी मुद्रा भंडार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और स्थिति स्थिर हो रही है।

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह न केवल देश की मुद्रा को स्थिर रखने में मदद करता है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुचारु रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। जब किसी देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होता है,तो वह वैश्विक बाजार में आने वाले झटकों को बेहतर तरीके से झेल सकता है और अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रख सकता है।

भारत के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय रिजर्व बैंक को आवश्यकता पड़ने पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने की स्वतंत्रता मिलती है। इससे रुपये की विनिमय दर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और आयात-निर्यात के संतुलन को बनाए रखना आसान हो जाता है।

हालाँकि,विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव,अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश के प्रवाह में बदलाव जैसे कारक भविष्य में भी विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि भारत अपनी आर्थिक नीतियों को संतुलित रखते हुए इन चुनौतियों का सामना करता रहे।

विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह ताजा बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि देश वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है। आने वाले समय में यदि यह रुझान जारी रहता है,तो भारत की वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती है और वैश्विक मंच पर उसकी आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ बन सकती है।