रिलायंस इंडस्ट्रीज

रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा 20,589 करोड़,आय में मजबूत बढ़त; जियो और रिटेल बने सहारा

मुंबई,25 अप्रैल (युआईटीवी)- देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे घोषित करते हुए 20,589 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। जनवरी से मार्च 2026 की अवधि के लिए जारी इन आँकड़ों में कंपनी की कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है,हालाँकि शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर हल्की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 6 रुपये का डिविडेंड देने की भी घोषणा की है,जो निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार,इस तिमाही में नेट प्रॉफिट और सहयोगी कंपनियों से मिलने वाला लाभ मिलाकर कुल मुनाफा पिछले साल की तुलना में 8.9 प्रतिशत कम रहा। इसके बावजूद कंपनी की कुल आय में 12.9 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई और यह बढ़कर 3,25,290 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से ऑयल-टू-केमिकल (ओ2सी),डिजिटल सेवाओं और रिटेल कारोबार में बेहतर प्रदर्शन के कारण संभव हो सकी।

रिलायंस के विभिन्न बिजनेस सेगमेंट्स में संतुलित प्रदर्शन देखने को मिला। ओ2सी व्यवसाय,जो कंपनी का पारंपरिक और प्रमुख क्षेत्र रहा है,ने स्थिरता बनाए रखी,जबकि डिजिटल सेवाओं और रिटेल कारोबार ने विकास को गति दी। हालाँकि,तेल और गैस सेगमेंट में आय में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने इसका कारण केजी-डी6 गैस क्षेत्र में उत्पादन में आई प्राकृतिक कमी को बताया है,जिससे इस खंड का योगदान अपेक्षाकृत कम हो गया।

डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में कंपनी की सहायक इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का ईबीआईटीडीए 17.9 प्रतिशत बढ़कर 20,060 करोड़ रुपये हो गया। ग्राहक आधार भी लगातार बढ़ रहा है और अब यह 52.4 करोड़ से अधिक हो चुका है। खास बात यह है कि इनमें से 26.8 करोड़ ग्राहक 5जी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं,जो देश में डिजिटल क्रांति की गति को दर्शाता है। मोबाइल, ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज सेवाओं की बढ़ती माँग ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रिटेल कारोबार में भी कंपनी ने मजबूती दिखाई है। रिलायंस रिटेल का ईबीआईटीडीए 3.1 प्रतिशत बढ़कर 6,921 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। कंपनी के स्टोर्स की संख्या अब 20,000 के पार हो गई है,जो उसके विस्तार और उपभोक्ता पहुँच को दर्शाता है। देशभर में तेजी से फैलता रिटेल नेटवर्क कंपनी के लिए एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।

पूँजीगत खर्च यानी कैपेक्स के मामले में भी कंपनी ने आक्रामक रुख बनाए रखा है। इस तिमाही में 40,560 करोड़ रुपये का निवेश किया गया,जो विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार और नई परियोजनाओं के विकास पर केंद्रित रहा। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का कुल कैपेक्स 1,44,271 करोड़ रुपये रहा,जो उसके दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है।

पूरे वित्त वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 95,610 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट हासिल किया है,जो पिछले वर्ष की तुलना में 18.3 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि कंपनी की मजबूत रणनीति और विविध व्यवसायों में संतुलित प्रदर्शन का परिणाम मानी जा रही है।

कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग की दिशा में कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और कहा कि इससे कंपनी के डिजिटल कारोबार को और मजबूती मिलेगी। अंबानी के अनुसार,पूरे वर्ष में 19 प्रतिशत ईबीआईटीडीए ग्रोथ दर्ज की गई,जिसका प्रमुख कारण डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग रही।

उन्होंने यह भी कहा कि जियो भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों को आम लोगों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनका मानना है कि डिजिटल इनोवेशन और कनेक्टिविटी के माध्यम से भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज वर्तमान में ओ2सी और न्यू एनर्जी व्यवसायों में बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रही है। साथ ही,जियो और रिटेल नेटवर्क का विस्तार भी कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का यह बहुआयामी दृष्टिकोण उसे भविष्य में भी प्रतिस्पर्धा में आगे बनाए रखेगा।

तिमाही नतीजों में मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद आय में मजबूत वृद्धि और विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज स्थिरता और विकास के रास्ते पर बनी हुई है। आने वाले समय में जियो की संभावित लिस्टिंग और न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स कंपनी के लिए नए अवसर लेकर आ सकते हैं,जिससे उसकी बाजार में स्थिति और मजबूत हो सकती है।