कोलकाता,27 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला के जगतदल इलाके में राजनीतिक तनाव उस समय हिंसक झड़प में बदल गया,जब तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इस घटना ने क्षेत्र में चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
घटना के बाद जगतदल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार राजेश सिंह ने देर रात जगतदल पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की गतिविधियों में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जानबूझकर बाधा डाली और हिंसा को अंजाम दिया। उनके अनुसार,विवाद की शुरुआत एक दिन पहले हुई,जब भाजपा की ओर से एक नुक्कड़ सभा आयोजित की जा रही थी।
राजेश सिंह ने बताया कि सभा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और हंगामा करने लगे। उन्होंने दावा किया कि वार्ड 17 के पार्षद मनोज पांडे भी कुछ लोगों के साथ मौके पर आए और माहौल को बिगाड़ दिया। स्थिति बिगड़ने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई,लेकिन इसके बाद भी तनाव कम नहीं हुआ।
भाजपा उम्मीदवार ने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए लगाए जा रहे पोस्टरों के दौरान भी तृणमूल समर्थकों ने व्यवधान उत्पन्न किया। उन्होंने कहा कि जब वह अपने घर लौटे,तब उनके घर पर पत्थरबाजी की गई और कथित तौर पर बम फेंके गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके ड्राइवर पर हमला किया गया और गोलीबारी की घटना भी हुई। इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अमित गुप्ता ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया कि उनके पार्टी कार्यकर्ता बिट्टू इलाके में पार्टी के बैनर और झंडे लगा रहे थे,तभी भाजपा समर्थकों ने उन पर हमला कर दिया। उनके अनुसार,इस हमले में उनके दो कार्यकर्ता,गुड्डू सिंह और पिंटू सिंह,घायल हो गए।
अमित गुप्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने न केवल उनके झंडे फाड़े,बल्कि उनके पार्टी कार्यालय को भी नुकसान पहुँचाया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जब वे शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचे,तब भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने अचानक उनके कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। उन्होंने इसे भाजपा की “आक्रामक राजनीति” का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि अर्जुन सिंह के खिलाफ पहले से कई मामले लंबित हैं और यह उनका स्वभाव बन चुका है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस तरह की राजनीति को बढ़ावा मिला,तो इसका असर पूरे राज्य में देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार, “जो व्यक्ति थाने में भी हिंसा कर सकता है,वह कहीं भी कुछ कर सकता है।”
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और चुनाव आयोग को भी इसकी जानकारी दी गई है। तृणमूल कांग्रेस ने अपने उच्च नेतृत्व को भी इस मामले से अवगत कराया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की माँग की है। वहीं भाजपा ने भी निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के आरोपों की जाँच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके और किसी भी तरह की और हिंसा को रोका जा सके।
जगतदल में हुई यह घटना पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में बढ़ती कटुता और टकराव को उजागर करती है। राज्य में पहले भी चुनावी समय में इस तरह की झड़पें देखने को मिलती रही हैं,लेकिन इस बार दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं,बल्कि आम लोगों में भी भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं। ऐसे में प्रशासन और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे निष्पक्षता के साथ स्थिति को सँभाले और चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखें।
फिलहाल,सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जाँच एजेंसियाँ क्या निष्कर्ष निकालती हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या चुनावी प्रतिस्पर्धा को हिंसा से दूर रख पाना संभव होगा या फिर ऐसी घटनाएँ भविष्य में भी इसी तरह सामने आती रहेंगी।
