नई दिल्ली,27 अप्रैल (युआईटीवी)- देश की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया,जब आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने संसद के ऊपरी सदन की राजनीतिक तस्वीर को बदल दिया है और सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने इन सांसदों का स्वागत करते हुए उनके संसदीय आचरण की सराहना की और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
यह बदलाव उस समय औपचारिक रूप से सामने आया,जब राज्यसभा ने सोमवार को पार्टी पदों और सदस्यों की नई सूची जारी की। इस सूची के अनुसार,आम आदमी पार्टी के सात सदस्यों ने अलग होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व 107 से बढ़कर 113 हो गया है,जबकि आम आदमी पार्टी की ताकत घटकर केवल तीन सदस्यों तक सिमट गई है।
भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में राघव चड्ढा,स्वाति मालीवाल,हरभजन सिंह,संदीप पाठक,अशोक मित्तल,राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने पिछले सप्ताह ही आम आदमी पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले का ऐलान किया था,जिसे अब औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।
किरन रिजिजू ने इस मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने को मान्यता दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब ये सभी नेता भाजपा संसदीय दल के सदस्य बन चुके हैं।
रिजिजू ने इन सांसदों के संसदीय व्यवहार की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इन नेताओं को सदन में देखा है और पाया है कि इन्होंने कभी भी अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया और न ही किसी प्रकार की अनुशासनहीनता दिखाई। उनके अनुसार,इन नेताओं का आचरण हमेशा गरिमापूर्ण और संसदीय परंपराओं के अनुरूप रहा है,जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
भाजपा में उनका स्वागत करते हुए रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनका योगदान महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कदम एक तरह से उस गठबंधन को अलविदा कहने जैसा है,जिसे उन्होंने “टुकड़े-टुकड़े” विचारधारा से जोड़कर देखा।
इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व काफी कमजोर हो गया है। अब पार्टी के पास केवल तीन सदस्य बचे हैं,जिनमें संजय सिंह,नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह शामिल हैं। यह गिरावट पार्टी के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है,क्योंकि इससे संसद में उसकी आवाज और प्रभाव दोनों ही कम हो जाएँगे।
दलबदल करने वाले इन सात सांसदों ने अपने फैसले के पीछे संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया है। इस प्रावधान के तहत सामान्य रूप से दल-बदल करने वाले सदस्यों को अयोग्य ठहराया जा सकता है,लेकिन “विलय” के मामले में एक विशेष छूट दी गई है। यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी अन्य पार्टी में शामिल होने का निर्णय लेते हैं,तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाता। इस मामले में भी आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों के दो-तिहाई से अधिक ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया,जिसके कारण यह कदम कानूनी रूप से वैध माना गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक असर डाल सकता है। एक ओर जहाँ भाजपा की स्थिति राज्यसभा में और मजबूत हुई है,वहीं आम आदमी पार्टी के लिए यह एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इस घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि विपक्षी दलों के भीतर असंतोष और पुनर्संरचना की प्रक्रिया जारी है।
फिलहाल,इस राजनीतिक बदलाव ने संसद के भीतर शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है और आने वाले समय में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आम आदमी पार्टी इस स्थिति से कैसे उबरती है और भाजपा इस बढ़ी हुई ताकत का किस तरह उपयोग करती है।
