मुंबई,27 अप्रैल (युआईटीवी)- भारतीय दवा उद्योग में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सन फार्मा ने अमेरिकी फार्मा कंपनी ऑर्गेनॉन का 11.75 अरब डॉलर,यानी करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये में अधिग्रहण करने का फैसला किया है। इसे भारतीय फार्मा क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण माना जा रहा है,जिसने वैश्विक स्तर पर भी उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार,यह पूरी तरह नकद (ऑल-कैश) सौदा है,जिसमें सन फार्मा ऑर्गेनॉन के सभी शेयरों को 14 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर खरीदकर उसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने अधीन करेगी। इस सौदे को दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे नियामक संस्थाओं तथा ऑर्गेनॉन के शेयरधारकों की स्वीकृति का इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि यह अधिग्रहण 2027 की शुरुआत तक पूरा हो जाएगा।
सन फार्मा ने इस अधिग्रहण को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बताया है। कंपनी का लक्ष्य नवोन्मेषी दवाओं के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना और स्थापित ब्रांडों तथा ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के कारोबार का विस्तार करना है। इस सौदे के जरिए कंपनी को बायोसिमिलर दवाओं के क्षेत्र में भी एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित होने का मौका मिलेगा,जो आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ता हुआ सेगमेंट माना जा रहा है।
न्यू जर्सी स्थित ऑर्गेनॉन महिला स्वास्थ्य, बायोसिमिलर और स्थापित दवाओं के क्षेत्र में एक प्रमुख कंपनी है। उसके पास 70 से अधिक उत्पादों का विस्तृत पोर्टफोलियो है और वह 140 से अधिक देशों में अपनी उपस्थिति बनाए हुए है। इस अधिग्रहण के बाद सन फार्मा को न केवल एक मजबूत वैश्विक नेटवर्क मिलेगा,बल्कि महिला स्वास्थ्य जैसे विशेष क्षेत्रों में भी उसकी पकड़ और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सौदे के बाद संयुक्त इकाई का कुल राजस्व लगभग 12.4 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है,जिससे यह दुनिया की शीर्ष 25 दवा कंपनियों में शामिल हो सकती है। यह उपलब्धि न केवल सन फार्मा के लिए,बल्कि पूरे भारतीय फार्मा उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भारत की वैश्विक फार्मा बाजार में स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
वित्तीय दृष्टि से भी यह सौदा काफी महत्वपूर्ण है। ऑर्गेनॉन ने दिसंबर 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में 6.2 अरब डॉलर का राजस्व और 1.9 अरब डॉलर का समायोजित ईबीआईटीडीए दर्ज किया था। इससे स्पष्ट होता है कि यह कंपनी पहले से ही एक मजबूत वित्तीय आधार पर खड़ी है,जो सन फार्मा के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
इस बड़े अधिग्रहण के लिए सन फार्मा आंतरिक संसाधनों और कर्ज के मिश्रण से धन जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी का मानना है कि यह निवेश लंबे समय में उसे बेहतर रिटर्न देगा और वैश्विक बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करेगा।
इस खबर का असर शेयर बाजार पर भी तुरंत देखने को मिला। सुबह करीब 10:50 बजे सन फार्मा के शेयर में लगभग 7.5 प्रतिशत की तेजी देखी गई और यह 1,741 रुपये के स्तर पर पहुँच गया। निवेशकों ने इस सौदे को सकारात्मक रूप में लिया है और इसे कंपनी के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना है।
यह अधिग्रहण ऐसे समय में हो रहा है,जब वैश्विक फार्मा उद्योग तेजी से बदल रहा है और कंपनियाँ अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए बड़े विलय और अधिग्रहण कर रही हैं। सन फार्मा का यह कदम न केवल उसकी रणनीतिक सोच को दर्शाता है,बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर बड़ी डील्स करने में सक्षम हो चुकी हैं।
ऑर्गेनॉन का अधिग्रहण सन फार्मा के लिए एक परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है। इससे कंपनी को नए बाजार,नई तकनीक और नए उत्पादों तक पहुँच मिलेगी,जो उसके भविष्य के विकास को नई दिशा देंगे। यह सौदा भारतीय फार्मा उद्योग के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा और वैश्विक मंच पर उसकी साख को और मजबूत करेगा।
