डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

क्यूबा पर अमेरिका का बढ़ता दबाव,ट्रंप और रुबियो ने बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

वाशिंगटन,22 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंध एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को लेकर बेहद सख्त बयान दिए हैं। दोनों नेताओं ने क्यूबा को एक “नाकाम देश” बताते हुए अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार दिया है। फ्लोरिडा और व्हाइट हाउस में अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान दिए गए इन बयानों ने संकेत दिया है कि अमेरिका की मौजूदा सरकार हवाना के प्रति और अधिक कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रही है। हालाँकि,इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत और मानवीय सहयोग के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं।

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्यूबा आज पूरी तरह विफल देश बन चुका है,जहाँ लोगों को बिजली,भोजन और बुनियादी जरूरतों तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि क्यूबा की हालत बेहद खराब है। वहाँ बिजली संकट लगातार बढ़ रहा है और आम लोगों के पास जीवनयापन के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्यूबा के लोगों की मदद करना चाहता है और यह केवल राजनीतिक नहीं,बल्कि मानवीय मुद्दा भी है।

ट्रंप ने विशेष रूप से फ्लोरिडा में रहने वाले क्यूबा मूल के अमेरिकियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में क्यूबा मूल के अमेरिकी अपने देश की मदद करना चाहते हैं और वहाँ निवेश कर आर्थिक सुधार में योगदान देना चाहते हैं। ट्रंप के अनुसार,ये लोग क्यूबा को फिर से मजबूत और स्थिर बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग अपने मूल देश से दोबारा जुड़ना चाहते हैं और अमेरिका इस दिशा में सहयोग करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने यह भी कहा कि पिछले कई दशकों में कई अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा संकट को हल करने की कोशिश करते रहे,लेकिन उन्हें लगता है कि अब यह काम उनकी सरकार कर सकती है।

राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के कुछ घंटों बाद विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी क्यूबा को लेकर बेहद तीखा रुख अपनाया। भारत रवाना होने से पहले मियामी होमस्टेड एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि क्यूबा लंबे समय से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के तट से केवल 90 मील की दूरी पर स्थित एक अस्थिर और विफल देश,जिसे अमेरिका के विरोधियों का समर्थन प्राप्त हो, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।

रुबियो ने दावा किया कि क्यूबा में रूस और चीन की खुफिया एजेंसियों की सक्रिय मौजूदगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों देशों के हथियार सिस्टम भी वहाँ पहुँचे हैं और हवाना इन शक्तियों के लिए रणनीतिक केंद्र के रूप में काम कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार,यह स्थिति केवल अमेरिका ही नहीं,बल्कि पूरे पश्चिमी गोलार्ध की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा लंबे समय से लैटिन अमेरिका में अस्थिरता फैलाने वाले समूहों का समर्थन करता रहा है और कई ऐसे संगठनों को मदद दी गई है,जिन्हें अमेरिका आतंकवाद से जोड़कर देखता है।

मार्को रुबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका क्षेत्र में लोकतंत्र और स्थिरता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा की सरकार लगातार ऐसे तत्वों को समर्थन देती रही है,जो क्षेत्रीय अस्थिरता और राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देते हैं। रुबियो के अनुसार,अमेरिका इस तरह की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता और उसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

इस बीच व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने भी प्रशासन की चिंताओं को दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना होगा कि क्यूबा उसके विरोधियों के लिए सैन्य या आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र न बन जाए। मिलर ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका के दुश्मनों को क्यूबा में पैर जमाने का मौका मिला,तो वहाँ से ड्रोन या अन्य हमले अमेरिकी सीमा तक आसानी से पहुँच सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने इतने करीब किसी भी प्रकार के आतंकवादी या शत्रुतापूर्ण नेटवर्क को सक्रिय होने की अनुमति नहीं देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के ये बयान केवल राजनीतिक संदेश नहीं हैं,बल्कि अमेरिका की बदलती विदेश नीति का संकेत भी हैं। पिछले कुछ वर्षों में रूस और चीन की लैटिन अमेरिका में बढ़ती सक्रियता को लेकर अमेरिका लगातार चिंता जाहिर करता रहा है। ऐसे में क्यूबा का मुद्दा वाशिंगटन की रणनीतिक प्राथमिकताओं में फिर से प्रमुखता से उभर रहा है। अमेरिका को आशंका है कि रूस और चीन क्षेत्र में अपने प्रभाव का इस्तेमाल अमेरिकी हितों को चुनौती देने के लिए कर सकते हैं।

हालाँकि,ट्रंप प्रशासन ने केवल दबाव की नीति पर जोर नहीं दिया है। मार्को रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका क्यूबा को मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहायता स्वतंत्र संगठनों और गैर-सरकारी माध्यमों से दी जाएगी,न कि क्यूबा की सेना या सरकार से जुड़े संगठनों के जरिए। अमेरिका का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मदद सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुँचे और उसका इस्तेमाल राजनीतिक या सैन्य उद्देश्यों के लिए न हो।

क्यूबा और अमेरिका के संबंधों का इतिहास काफी जटिल रहा है। शीत युद्ध के दौर से ही दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव की स्थिति बनी रही है। हालाँकि,समय-समय पर संबंध सुधारने की कोशिशें भी हुईं,लेकिन राजनीतिक मतभेद और आर्थिक प्रतिबंध हमेशा बड़ी बाधा बने रहे। अब ट्रंप प्रशासन के ताजा बयानों ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका क्यूबा के खिलाफ और सख्त आर्थिक या कूटनीतिक कदम उठाता है,तो इसका असर पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर,अमेरिका की ओर से मानवीय सहायता और संवाद की संभावना बनाए रखना यह भी दिखाता है कि वाशिंगटन केवल टकराव की नीति नहीं अपनाना चाहता, बल्कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और अपने रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।