नई दिल्ली,25 मई (युआईटीवी)- नीट परीक्षा में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी नाराजगी जाहिर की। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने पिछले विवादों से कोई सबक नहीं सीखा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण और संवेदनशील परीक्षा के संचालन के लिए मौजूदा व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार,एनटीए और केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई से जवाब तलब किया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि बार-बार पेपर लीक होने की घटनाएँ छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला हैं और इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर नोटिस जारी किया है,जिसमें माँग की गई है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने के लिए एनटीए की जगह एक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जाए। यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से यह साफ हो चुका है कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों का भरोसा कायम रखने में विफल रही है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद है कि एनटीए ने पहले हुई घटनाओं से कोई सीख नहीं ली। अदालत ने याद दिलाया कि इस मामले पर पहले भी सुनवाई हो चुकी है और उस समय एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई थी,जिसने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई अहम सिफारिशें दी थीं। कोर्ट ने कहा कि उन सिफारिशों को स्वीकार भी किया गया था,लेकिन अब ऐसा लगता है कि उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया गया।
पीठ ने एनटीए को निर्देश दिया कि वह 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों के पालन को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। अदालत ने कहा कि एनटीए यह स्पष्ट करे कि उसने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने यह हलफनामा गुरुवार तक जमा करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी मौजूद रहे। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका की प्रति केंद्र सरकार, एनटीए और अन्य संबंधित पक्षों को भी उपलब्ध कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नीट परीक्षा से जुड़े सभी समान मामलों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जाएगी,ताकि व्यापक स्तर पर समाधान निकाला जा सके।
याचिका में कहा गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने करीब 22.7 लाख छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं,लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएँ उनकी मेहनत और विश्वास दोनों को चोट पहुँचाती हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी स्थिति में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुधारना बेहद जरूरी हो गया है।
गौरतलब है कि इस साल तीन मई को आयोजित अंडरग्रेजुएट स्तर की नीट परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द करना पड़ा था। यह परीक्षा मेडिकल शिक्षा कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है और इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है। परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली थी। बाद में इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई थी।
जाँच एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्टों में कई राज्यों में संगठित तरीके से पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के संकेत मिले थे। आरोप यह भी लगे कि कुछ गिरोहों ने बड़ी रकम लेकर छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। इस पूरे मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है। अदालत का मानना है कि यदि परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगें,तो इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसी कारण कोर्ट अब इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट एनटीए के पुनर्गठन या नई स्वायत्त संस्था के गठन को लेकर कोई बड़ा निर्देश देता है,तो इससे देश की प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कई शिक्षा विशेषज्ञ पहले से ही माँग कर रहे हैं कि परीक्षा संचालन के लिए अधिक पारदर्शी,तकनीकी रूप से सुरक्षित और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाए।
मेडिकल छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इस सुनवाई को लेकर काफी उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती है और छात्रों को निष्पक्ष माहौल मिल सकेगा। वहीं दूसरी ओर एनटीए के सामने अब अपनी कार्यप्रणाली को लेकर जवाब देने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि देश की सर्वोच्च अदालत अब परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और एनटीए द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इसका असर लाखों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
