मनीला,22 जुलाई (युआईटीवी)- फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान से जुड़े उच्चस्तरीय कार्यक्रमों और कूटनीतिक बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातें कर भारत की विदेश नीति को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम उठाए। उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो,ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो के साथ अलग-अलग बैठकें कर व्यापार,रक्षा,ऊर्जा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,समुद्री सुरक्षा,शिक्षा,निवेश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक चुनौतियों जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की। इन बैठकों को भारत की सक्रिय कूटनीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई मुलाकात विशेष रूप से चर्चा का केंद्र रही। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख आयामों की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान व्यापार और शुल्क,ऊर्जा सुरक्षा,रक्षा सहयोग,महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति,उभरती प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मनीला में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ ऊर्जा,रक्षा एवं सुरक्षा,महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक बातचीत हुई। इसके अतिरिक्त दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। रक्षा,प्रौद्योगिकी,ऊर्जा,आपूर्ति श्रृंखला,सेमीकंडक्टर, डिजिटल सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक दृष्टिकोण दोनों देशों के संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जा रहे हैं। ऐसे में मनीला में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच जारी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मनीला में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान हुए समझौतों और उनके क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा,व्यापार,शिक्षा,ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को और अधिक गहरा करने पर सहमति व्यक्त की गई।
एस. जयशंकर ने अपनी मुलाकात के बाद एक्स पर लिखा कि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री सीनेटर पेनी वोंग से मिलकर उन्हें प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान हुए महत्वपूर्ण निर्णयों और समझौतों को आगे बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच सहयोग की गति लगातार बढ़ रही है और भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 से 10 जुलाई के बीच मेलबर्न में आयोजित ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की उपस्थिति में 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन समझौतों में रक्षा सहयोग,व्यापार,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,शिक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग से जुड़े विषय शामिल थे। विशेष रूप से यूरेनियम आपूर्ति से संबंधित असैन्य परमाणु समझौते को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
मनीला में विदेश मंत्री की कूटनीतिक गतिविधियां केवल अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और फिलीपींस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक में व्यापार और निवेश,शिक्षा,रक्षा एवं सुरक्षा,समुद्री सहयोग,क्षमता निर्माण तथा विकास सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे।
एस. जयशंकर ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि फिलीपींस की विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत अत्यंत सार्थक रही। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो ने भी बैठक को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत और फिलीपींस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने विशेष रूप से फिनटेक,व्यापार एवं निवेश,उच्च शिक्षा,दवा उद्योग,रक्षा सहयोग,समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और फिलीपींस के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। दक्षिण चीन सागर सहित विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच दोनों देशों का सहयोग साझा हितों की रक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।
मनीला में हुई इन बैठकों के समानांतर क्वाड देशों के बीच भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। भारत,अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया और जापान से मिलकर बने क्वाड समूह का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त,समावेशी और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना है। इस संदर्भ में भारत में अमेरिका के राजदूत ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने मनीला में क्वाड देशों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ भाग लिया।
उन्होंने कहा कि बैठक में मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए ठोस परिणाम हासिल करने पर सार्थक चर्चा हुई। उनके अनुसार चारों देशों की रणनीतिक सोच और क्षेत्रीय दृष्टिकोण काफी हद तक समान हैं तथा सभी सदस्य देशों का उद्देश्य क्षेत्र में शांति,स्थिरता,समृद्धि और अंतर्राष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करना है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की लगातार हुई इन उच्चस्तरीय बैठकों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है। भारत की विदेश नीति अब केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह गई है,बल्कि वह बहुपक्षीय सहयोग,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला,ऊर्जा सुरक्षा,रक्षा साझेदारी और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता,रक्षा,ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग,ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा एवं असैन्य परमाणु साझेदारी तथा फिलीपींस के साथ समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे विषय आने वाले समय में दोनों पक्षों के संबंधों को और अधिक गहराई प्रदान कर सकते हैं।
मनीला में हुई इन बैठकों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान विचारधारा वाले देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों,बदलती आर्थिक चुनौतियों और नई तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत की सक्रिय कूटनीति अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका का संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों के परिणाम आने वाले वर्षों में भारत के रणनीतिक,आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे तथा क्षेत्रीय सहयोग की नई संभावनाओं को भी गति देंगे।
