वॉशिंगटन,22 जुलाई (युआईटीवी)- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की संभावित न्यूयॉर्क यात्रा को लेकर एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और कानून पर बहस तेज हो गई है। न्यूयॉर्क के मेयर जोरान ममदानी ने कहा है कि उनका प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं रखता। इस बयान के साथ उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए उस वादे से पीछे हटने का संकेत दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए,तो उन्हें गिरफ्तार कराया जाएगा। हालाँकि,ममदानी ने अपने ताजा बयान में नेतन्याहू की आलोचना जारी रखते हुए उन्हें “युद्ध अपराधी” बताया और अमेरिका की संघीय सरकार से अपील की कि यदि वे संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए सितंबर में न्यूयॉर्क आते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
जोरान ममदानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उनके प्रशासन ने इस पूरे मामले की विस्तृत कानूनी समीक्षा कराई। उन्होंने बताया कि यह जाँच इस उद्देश्य से की गई थी कि यह स्पष्ट हो सके कि यदि बेंजामिन नेतन्याहू न्यूयॉर्क शहर की सीमा में आते हैं,तो क्या नगर प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट को लागू कर सकता है। कानूनी विशेषज्ञों से प्राप्त सलाह और समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष सामने आया कि न्यूयॉर्क शहर के प्रशासन के पास ऐसा करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है।
मेयर ने कहा कि उपलब्ध कानूनों के तहत नगर प्रशासन की शक्तियाँ सीमित हैं और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के वारंट को लागू करने का अधिकार शहर प्रशासन को प्राप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कार्रवाई केवल संघीय स्तर पर ही संभव हो सकती है। उन्होंने कहा कि कानूनी समीक्षा के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि नगर प्रशासन इस दिशा में कोई स्वतंत्र कदम नहीं उठा सकता।
हालाँकि,ममदानी ने यह भी कहा कि अमेरिका की संघीय सरकार के पास इस विषय में कार्रवाई करने का अधिकार है। उन्होंने वॉशिंगटन से आग्रह किया कि वह अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के साथ सहयोग करे और उसके द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अंतर्राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हालाँकि,इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का सदस्य देश नहीं है। इसी कारण लंबे समय से अमेरिका का इस न्यायालय के साथ संबंध सीमित रहा है और उसने कई मामलों में न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है। यही कारण है कि ममदानी की अपील के बावजूद इस विषय में संघीय सरकार की कानूनी स्थिति अलग मानी जा रही है।
ममदानी का यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट कर दिया है कि नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार से गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू को किसी भी परिस्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा। राष्ट्रपति का यह बयान सामने आने के एक दिन बाद ही ममदानी ने भी अपने प्रशासन की कानूनी सीमाओं का हवाला देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममदानी का यह बयान उनके चुनावी रुख से अलग दिखाई देता है। न्यूयॉर्क के मेयर पद के चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आते हैं,तो वह अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट को लागू कराने के लिए कदम उठाएँगे। उस समय उनके इस बयान को लेकर अमेरिका और इजरायल दोनों में व्यापक राजनीतिक चर्चा हुई थी।
हाल ही में उन्होंने एक साक्षात्कार में भी कहा था कि उनका प्रशासन इस विषय पर शहर के कानून विभाग के साथ सक्रिय रूप से विचार-विमर्श कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया था कि वारंट लागू करने के संभावित कानूनी विकल्पों की समीक्षा की जा रही है,लेकिन अब कानूनी समीक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने स्वीकार किया है कि नगर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में ऐसा करना संभव नहीं है।
यद्यपि कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के बाद भी ममदानी ने नेतन्याहू की आलोचना में कोई कमी नहीं की। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा कि बेंजामिन नेतन्याहू एक युद्ध अपराधी हैं और उन पर फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ गंभीर अपराधों के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने जिन आधारों पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है,वह उसके दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं।
ममदानी ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक राय में नेतन्याहू को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय इस प्रकार के गंभीर आरोप तय करता है,तो कानून के अनुसार उसके मामले की सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत केवल नेतन्याहू तक सीमित नहीं है,बल्कि न्यायालय द्वारा आरोपित किसी भी व्यक्ति पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि न्यूयॉर्क शहर में नेतन्याहू का स्वागत नहीं है। ममदानी ने कहा कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति का स्वागत नहीं करेंगे जिस पर युद्ध अपराधों जैसे गंभीर आरोप लगे हों। उनके अनुसार न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक शहर को मानवाधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय न्याय के मूल्यों का सम्मान करना चाहिए।
दूसरी ओर इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने ममदानी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का इजरायल या अमेरिकी नागरिकों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। बयान में न्यायालय की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए उसे एक “कंगारू कोर्ट” बताया गया।
इजरायली सरकार का लंबे समय से यही रुख रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को इजरायल के मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। इजरायल लगातार यह कहता रहा है कि उसकी न्यायिक व्यवस्था स्वतंत्र और सक्षम है तथा किसी भी आरोप की जाँच उसके अपने कानूनों के तहत की जा सकती है। इसी आधार पर उसने न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करने से इनकार किया है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है,जब गाजा संघर्ष और उससे जुड़े मानवीय मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। विभिन्न देशों और मानवाधिकार संगठनों की ओर से इस संघर्ष को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। वहीं अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट ने वैश्विक स्तर पर कानूनी और राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
न्यूयॉर्क के मेयर के ताजा बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय प्रशासन और संघीय सरकार की संवैधानिक शक्तियों में महत्वपूर्ण अंतर होता है। चुनावी मंच से दिए गए राजनीतिक बयान और वास्तविक कानूनी अधिकारों के बीच मौजूद इस अंतर ने अमेरिकी राजनीति में भी नई चर्चा को जन्म दिया है। हालाँकि,ममदानी ने कानूनी सीमाओं को स्वीकार करते हुए अपने पहले के रुख में बदलाव किया है,लेकिन नेतन्याहू के प्रति उनकी राजनीतिक और नैतिक आलोचना पहले की तरह बरकरार है।
अब सभी की निगाहें सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा पर टिकी हैं। यदि बेंजामिन नेतन्याहू इस बैठक में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुँचते हैं,तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका की संघीय सरकार इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान और न्यूयॉर्क प्रशासन की कानूनी समीक्षा दोनों यह संकेत देते हैं कि नेतन्याहू की संभावित यात्रा के दौरान गिरफ्तारी की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। इसके बावजूद यह मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय कानून,कूटनीति और मानवाधिकारों से जुड़ी बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है।
