डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर कथित मिसाइल हमले के बाद बढ़ा तनाव,डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

वॉशिंगटन,30 जुलाई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर कथित ईरानी मिसाइल हमले की खबरों के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस हमले की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी और अमेरिका पूरी ताकत के साथ जवाब देगा। उनके इस बयान ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। हालाँकि,हमले को लेकर अभी तक सीमित जानकारी ही सामने आई है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर आधिकारिक स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है।

एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों पर किसी भी प्रकार के हमले को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश या उसके समर्थित समूह अमेरिकी सेना को निशाना बनाते हैं,तो उन्हें इसका गंभीर परिणाम भुगतना होगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हमलावरों को जोरदार जवाब देगा और उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनके शब्दों से स्पष्ट संकेत मिला कि अमेरिका इस घटना को केवल एक सीमित सैन्य चुनौती के रूप में नहीं,बल्कि अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर सीधे हमले के रूप में देख रहा है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने हमले के दौरान दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया। उनके अनुसार,अमेरिकी रक्षा प्रणाली पूरी तरह सतर्क थी और उसने संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय कर दिया। हालाँकि,उन्होंने यह नहीं बताया कि कुल कितनी मिसाइलें दागी गई थीं या हमले का सटीक समय क्या था। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि इस घटना में किसी सैनिक या सैन्य ठिकाने को नुकसान पहुँचा या नहीं। इस कारण घटना से जुड़ी कई जानकारियाँ अभी भी अस्पष्ट बनी हुई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान या ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालाँकि,ट्रंप ने संभावित जवाबी कार्रवाई की समय-सीमा,उसके स्वरूप या लक्ष्यों के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हर कदम उठाएगा और किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा।

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका पहले ही इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के खिलाफ सैन्य अभियान चला चुका है। ट्रंप ने पुष्टि की कि रातभर किए गए अमेरिकी हमले इराकी सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने के बाद किए गए थे। उन्होंने इन मिलिशिया संगठनों को दुनिया के लिए कैंसर बताते हुए कहा कि ऐसे समूह पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। उनके अनुसार,इन संगठनों को कमजोर करना क्षेत्रीय शांति और अमेरिकी सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।

डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों से यह भी संकेत मिला कि अमेरिका जॉर्डन में हुए कथित मिसाइल हमले और पूरे क्षेत्र में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मान रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के पीछे ऐसे संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है और इन पर कठोर कार्रवाई किए बिना हालात सामान्य नहीं हो सकते। हालाँकि,ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इराक में किए गए अमेरिकी हमले जॉर्डन की घटना से पहले हुए थे या उसके बाद। इस कारण घटनाओं के क्रम को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

मध्य पूर्व पिछले कई वर्षों से संघर्ष और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय प्रभाव,प्रतिबंधों और विभिन्न सशस्त्र समूहों को लेकर लगातार मतभेद बने हुए हैं। इराक,सीरिया,लेबनान,यमन और जॉर्डन जैसे देशों में सक्रिय कई संगठन भी इस व्यापक शक्ति संघर्ष का हिस्सा माने जाते हैं। ऐसे में किसी भी नई सैन्य घटना का प्रभाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।

जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखना और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग देना है। अमेरिका लंबे समय से अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है,लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी ठिकानों और सैनिकों पर कई बार रॉकेट,ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएँ सामने आती रही हैं। अमेरिका का आरोप रहा है कि इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित संगठन सक्रिय रहते हैं,जबकि ईरान कई मामलों में प्रत्यक्ष संलिप्तता से इनकार करता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस कथित हमले के जवाब में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करता है,तो क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान समर्थित समूहों और अमेरिकी सेना के बीच टकराव तेज होने की आशंका भी जताई जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया के कई देशों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

फिलहाल इस कथित मिसाइल हमले को लेकर स्वतंत्र रूप से सभी तथ्यों की पुष्टि नहीं हो सकी है। हमले के समय,इस्तेमाल की गई मिसाइलों की संख्या,संभावित नुकसान और जिम्मेदार पक्ष को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है। ऐसे में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। हालाँकि,डोनाल्ड ट्रंप का सख्त बयान यह संकेत जरूर देता है कि अमेरिका इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रहा है और भविष्य में जवाबी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन,जॉर्डन और क्षेत्र के अन्य सहयोगी देशों की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक बयानों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यदि इस मामले में और तथ्य सामने आते हैं या कोई नई सैन्य कार्रवाई होती है,तो उसका असर केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति और वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए कथित हमले ने क्षेत्रीय तनाव को एक बार फिर नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है और अब सभी की निगाहें अमेरिका की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।