नई दिल्ली,30 जुलाई (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे को लेकर संसद में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा है कि अब तक की जाँच में विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच सिस्टम में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी नहीं पाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना की जाँच पूरी गंभीरता और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जा रही है तथा सभी संभावित कारणों की विस्तार से पड़ताल की जा रही है। सरकार के अनुसार,विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की जाँच अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है और जाँच पूरी होने के बाद विस्तृत अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच की उन्नत तकनीकी जाँच ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर द्वारा की गई है। इसके साथ ही अमेरिका के सिएटल स्थित केंद्र में पूरे थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की व्यापक जाँच भी जारी है। उन्होंने बताया कि ये सभी परीक्षण नागर विमानन महानिदेशालय के निर्देश पर कराए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य विमान के सभी महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की गहन जाँच सुनिश्चित करना है।
मंत्री ने सदन को बताया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच की विस्तृत जाँच के दौरान उसके लॉकिंग डिटेंट्स की संरचनात्मक मजबूती का भी परीक्षण किया गया। इस परीक्षण में किसी भी प्रकार की असामान्यता या तकनीकी दोष सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि अब तक उपलब्ध सभी तकनीकी आँकड़ों और परीक्षणों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच सामान्य रूप से कार्य कर रहा था और उसमें कोई ऐसी खराबी नहीं मिली,जिसे दुर्घटना का कारण माना जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि फ्यूल कंट्रोल स्विच की जाँच पूरी हो चुकी है, लेकिन पूरे थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की तकनीकी जाँच अभी जारी है। जाँच एजेंसियाँ अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं। इसलिए विमान के प्रत्येक महत्वपूर्ण हिस्से का परीक्षण अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की देखरेख में किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि जब तक सभी परीक्षण पूरे नहीं हो जाते और सभी तथ्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण नहीं हो जाता,तब तक दुर्घटना के वास्तविक कारणों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।
संसद में चर्चा के दौरान सरकार ने उन अटकलों को भी खारिज किया,जिनमें दावा किया जा रहा था कि विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करने में देरी की है। नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि इस तरह की बड़ी विमान दुर्घटनाओं की जाँच एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। इसमें किसी निर्धारित समय-सीमा के बजाय सटीकता,पारदर्शिता और तकनीकी प्रमाणों को अधिक महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियाँ सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर रही हैं,ताकि अंतिम रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यात्मक और विश्वसनीय हो।
मुरलीधर मोहोल ने यह भी कहा कि विमान दुर्घटनाओं की जाँच किसी औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं होती,बल्कि यह लगातार विकसित होने वाली वैज्ञानिक और तकनीकी जाँच होती है। जाँच के दौरान कई बार नए तथ्य सामने आते हैं,जिनके आधार पर अतिरिक्त परीक्षण और विश्लेषण करने की आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण ऐसी जाँच में समय लगना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद विमान हादसे की जाँच भी इसी स्थापित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है और अब यह अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है।
सरकार ने यह दोहराया कि दुर्घटना के सभी संभावित कारणों की निष्पक्ष और व्यापक जाँच की जा रही है। इसमें केवल विमान की तकनीकी प्रणाली ही नहीं,बल्कि उड़ान संचालन,रखरखाव,मौसम की स्थिति,मानवीय पहलुओं और अन्य सभी संभावित कारकों का भी विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जाँच का उद्देश्य केवल दुर्घटना के कारणों का पता लगाना ही नहीं,बल्कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों की पहचान करना भी है।
केंद्र सरकार ने संसद को भरोसा दिलाया कि जाँच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। यह रिपोर्ट विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी,ताकि सभी संबंधित पक्ष और आम नागरिक जाँच के निष्कर्षों से अवगत हो सकें। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है और किसी भी तथ्य को छिपाने का प्रश्न नहीं उठता।
विशेषज्ञों के अनुसार,आधुनिक यात्री विमानों की जाँच में कई स्तरों पर तकनीकी परीक्षण किए जाते हैं। विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम,इंजन,नियंत्रण प्रणाली,उड़ान रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता है। कई बार विमान के अलग-अलग हिस्सों को निर्माता कंपनियों की प्रयोगशालाओं में भेजकर भी परीक्षण कराया जाता है,ताकि किसी भी संभावित तकनीकी दोष की पुष्टि या खंडन किया जा सके। यही कारण है कि ऐसी जाँच प्रक्रियाओं में कई महीने लग सकते हैं।
अहमदाबाद में हुए इस विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। दुर्घटना के बाद नागर विमानन महानिदेशालय ने सुरक्षा मानकों की समीक्षा शुरू की और संबंधित विमानों की उड़ान योग्यता की अतिरिक्त जाँच कराने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और विमानन प्रणाली पर लोगों का विश्वास बनाए रखना है।
संसद में दिए गए सरकार के ताजा बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि अब तक की जाँच में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के फ्यूल कंट्रोल स्विच सिस्टम में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालाँकि,पूरे थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की जाँच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष उसी के बाद सामने आएँगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जाँच में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी और केवल वैज्ञानिक प्रमाणों तथा तकनीकी तथ्यों के आधार पर ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अब विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि जाँच पूरी होने के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा होगा। साथ ही रिपोर्ट में भविष्य के लिए आवश्यक सुरक्षा संबंधी सिफारिशें भी शामिल होंगी,जिनसे भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
