भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा,मार्वेल टेक्नोलॉजी करेगी 250 मिलियन डॉलर का निवेश (तस्वीर क्रेडिट@Bangalorereal1)

भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा,मार्वेल टेक्नोलॉजी करेगी 250 मिलियन डॉलर का निवेश

बेंगलुरु,30 जुलाई (युआईटीवी)- भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है और इसी दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी मार्वेल टेक्नोलॉजी ने भारत में अपने कारोबार और अनुसंधान क्षमताओं के विस्तार के लिए अगले तीन वर्षों में 25 करोड़ डॉलर यानी 250 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है। कंपनी का यह निवेश भारत में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को मजबूत करने, इंजीनियरिंग प्रतिभा का विस्तार करने और अत्याधुनिक तकनीकी बुनियादी ढाँचे को विकसित करने के उद्देश्य से किया जाएगा। इस घोषणा को भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और तकनीकी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मार्वेल टेक्नोलॉजी ने यह घोषणा ऐसे समय की है,जब भारत में उसके संचालन के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दो दशकों के इस सफर में कंपनी ने देश में अपनी मजबूत पहचान बनाई है और अब वह अपने अगले चरण के विस्तार की तैयारी कर रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निवेश के साथ-साथ अगले तीन वर्षों में भारत में कार्यरत अपने कर्मचारियों की संख्या भी दोगुनी करने की योजना बनाई गई है। इससे देश में उच्च कौशल वाले इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

विस्तार योजना के तहत कंपनी ने अपने बेंगलुरु स्थित कार्यालय में एक नए विंग का उद्घाटन किया है। इसके अलावा हैदराबाद में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत किया जा रहा है। इन दोनों केंद्रों के विस्तार का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता,क्लाउड कंप्यूटिंग और आधुनिक डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर समाधानों के डिजाइन और विकास को गति देना है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों की माँग तेजी से बढ़ेगी और भारत इस तकनीकी परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मार्वेल टेक्नोलॉजी के उपाध्यक्ष और भारत कंट्री मैनेजर नवीन बिश्नोई ने इस अवसर पर कहा कि भारत अब केवल एक विकास केंद्र नहीं,बल्कि कंपनी के लिए एक रणनीतिक इंजीनियरिंग हब बन चुका है। उनके अनुसार भारत में कार्यरत इंजीनियरिंग टीमें उन आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं,जिनका उपयोग दुनिया की अग्रणी हाइपरस्केलर और क्लाउड सेवा प्रदाता कंपनियाँ करती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियरों की विशेषज्ञता,नवाचार क्षमता और तकनीकी दक्षता ने कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नवीन बिश्नोई ने यह भी कहा कि कंपनी अपने ग्राहकों,व्यावसायिक साझेदारों,सरकारी संस्थानों,शैक्षणिक संगठनों और विशेष रूप से भारत में कार्यरत अपनी इंजीनियरिंग टीम की आभारी है। उनके अनुसार इन सभी के सहयोग,समर्पण और नवाचार की बदौलत कंपनी भारत में लगातार आगे बढ़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि नए निवेश से न केवल कंपनी की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी,बल्कि भारत के तकनीकी इकोसिस्टम को भी नई मजबूती मिलेगी।

मार्वेल टेक्नोलॉजी ने भारत में अपने संचालन की शुरुआत वर्ष 2006 में बेंगलुरु से की थी। शुरुआत में सीमित स्तर पर कार्य करने वाली कंपनी ने धीरे-धीरे अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों का विस्तार किया और आज भारत उसके लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रिसर्च एंड डेवलपमेंट केंद्र बन चुका है। वर्तमान समय में कंपनी के बेंगलुरु,पुणे और हैदराबाद में बड़े इंजीनियरिंग केंद्र संचालित हो रहे हैं,जहाँ हजारों इंजीनियर अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

इन केंद्रों में विकसित की जा रही तकनीकों में 2-नैनोमीटर और उससे आगे की सेमीकंडक्टर प्रोसेस तकनीक,हाई-स्पीड एनालॉग इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी,सबसिस्टम डिजाइन,सॉफ्टवेयर विकास,फर्मवेयर विकास और एंड-टू-एंड सिलिकॉन इंजीनियरिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र शामिल हैं। इन तकनीकों का उपयोग आधुनिक डेटा सेंटर,कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों,क्लाउड नेटवर्क, दूरसंचार उपकरणों और अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग प्रणालियों में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी वैश्विक तकनीकी उद्योग में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगी।

कंपनी ने बताया कि भारत में कार्यरत उसकी इंजीनियरिंग टीमें कई महत्वपूर्ण वैश्विक तकनीकी प्लेटफॉर्म के विकास में योगदान दे रही हैं। भारतीय इंजीनियरों के नाम अनेक पेटेंट भी दर्ज हैं,जो उनके नवाचार और अनुसंधान क्षमता का प्रमाण हैं। इसके अलावा कंपनी इंजीनियरिंग उत्पादकता बढ़ाने और नए उत्पादों के विकास की गति तेज करने के लिए उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का व्यापक उपयोग कर रही है। इससे डिजाइन प्रक्रिया अधिक तेज,सटीक और प्रभावी बन रही है।

मार्वेल टेक्नोलॉजी का यह निवेश केवल कंपनी के विस्तार तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि भारत के व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को भी मजबूत करने में सहायक होगा। कंपनी ने कहा है कि वह विश्वविद्यालयों,स्टार्टअप कंपनियों,उद्योग संगठनों और सरकारी संस्थाओं के साथ अपने सहयोग को और अधिक बढ़ाएगी। इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार,कौशल विकास और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करना है। इससे भारतीय छात्रों,शोधकर्ताओं और उभरती प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार भी देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है। घरेलू विनिर्माण,अनुसंधान,डिजाइन और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनाना ही नहीं,बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में भी मजबूत स्थान दिलाना है। ऐसे समय में मार्वेल टेक्नोलॉजी जैसी वैश्विक कंपनी का बड़ा निवेश इस दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता,क्लाउड कंप्यूटिंग,डेटा सेंटर,उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग के कारण सेमीकंडक्टर उद्योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर स्मार्टफोन,सर्वर,ऑटोमोबाइल,रक्षा प्रणालियों और चिकित्सा उपकरणों तक लगभग हर क्षेत्र में उन्नत चिप्स की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास की क्षमता बढ़ाना भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत में उपलब्ध विशाल तकनीकी प्रतिभा,मजबूत इंजीनियरिंग शिक्षा प्रणाली और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल इकोसिस्टम ने वैश्विक कंपनियों का विश्वास बढ़ाया है। यही कारण है कि कई अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्रों का विस्तार कर रही हैं। मार्वेल टेक्नोलॉजी का नया निवेश भी इसी विश्वास का प्रमाण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से न केवल प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे,बल्कि सहायक उद्योगों,स्टार्टअप्स,अनुसंधान संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी नई गति मिलेगी। इससे भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत आधार मिलेगा और देश तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाएगा।

मार्वेल टेक्नोलॉजी की यह घोषणा ऐसे समय में आई है,जब वैश्विक कंपनियां अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए भारत को प्राथमिकता दे रही हैं। अगले तीन वर्षों में 25 करोड़ डॉलर के निवेश,कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करने की योजना और अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार से यह स्पष्ट है कि कंपनी भारत को अपने भविष्य की विकास रणनीति का अहम हिस्सा मानती है। यह निवेश न केवल कंपनी के लिए लाभकारी साबित हो सकता है,बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में और अधिक मजबूत तथा प्रभावशाली स्थान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।