वाशिंगटन,8 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रस्तावित बॉलरूम और उससे जुड़े सैन्य एवं सुरक्षा परिसर के निर्माण को लेकर अपीलीय अदालत के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार इस फैसले को चुनौती देने के लिए तुरंत अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। अपीलीय अदालत ने व्हाइट हाउस परिसर में चल रहे इस निर्माण कार्य को जारी रखने के खिलाफ फैसला सुनाया था। राष्ट्रपति ने अदालत के फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित और गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अदालत के फैसले पर रोक लगा दी गई है और यह कुछ समय तक लागू नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार मामले को लेकर तत्काल सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। ट्रंप के मुताबिक,निर्माण परियोजना केवल एक बॉलरूम तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका संबंध राष्ट्रपति,उनके परिवार,व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और देश की सुरक्षा से है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में अपीलीय अदालत के दो न्यायाधीशों के रुख पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इन न्यायाधीशों ने उस बेहद जरूरी सैन्य केंद्र के खिलाफ फैसला दिया है,जिसकी वाशिंगटन और पूरे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यकता है। ट्रंप ने इस परिसर को भविष्य के राष्ट्रपतियों और व्हाइट हाउस में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
ट्रंप ने अपने तर्क के समर्थन में अपीलीय अदालत की न्यायाधीश नेओमी राव की असहमति वाली राय का भी हवाला दिया। राव ने अपने मत में कहा था कि निचली अदालत के पास इस मामले में उचित अधिकार क्षेत्र नहीं था। उनके अनुसार,जिस पक्ष ने निर्माण कार्य रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया,उसके पास इस निर्माण को रोकने का कानूनी अधिकार ही नहीं था। ट्रंप ने न्यायाधीश की इसी राय को अपने पक्ष के महत्वपूर्ण आधार के तौर पर पेश किया।
नेओमी राव ने अपनी असहमति वाली राय में जिला अदालत के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार,जिला अदालत के पास व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण कार्य को रोकने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि मामले में न्यायिक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मूल प्रश्न ही महत्वपूर्ण है और अदालत ने अपनी शक्तियों की सीमा से आगे जाकर निर्माण की निगरानी अपने हाथ में ले ली।
राव ने यह भी तर्क दिया कि निर्माण स्थल व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति आवास और कार्यालय से जुड़ा हुआ है, इसलिए वहाँ सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हितों का संतुलन पूरी तरह सरकार के पक्ष में झुका हुआ है। उनके अनुसार,जिला अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों की तुलना में एक राहगीर की सौंदर्य संबंधी आपत्ति को अधिक महत्व दिया।
न्यायाधीश राव के अनुसार,व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण की निगरानी अपने हाथ में लेना न्यायिक अतिक्रमण के समान है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण रोकने का आदेश संघीय अदालतों के उचित अधिकार क्षेत्र से बाहर है,तो निर्माण कार्य को जारी रहने दिया जाना चाहिए। ट्रंप ने उनकी इसी असहमति वाली राय को साझा करते हुए अदालत के बहुमत के फैसले पर सवाल उठाया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सैन्य और सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने भी इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना है। उनका दावा है कि प्रस्तावित परिसर को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वह व्हाइट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सके और संभावित गंभीर खतरों से राष्ट्रपति तथा अन्य महत्वपूर्ण लोगों की रक्षा कर सके।
ट्रंप के मुताबिक,यह परियोजना एक व्यापक और जटिल सुरक्षा ढाँचे का हिस्सा है। इसमें बम शेल्टर,अस्पताल और चिकित्सा सुविधाएँ,अत्यंत गोपनीय सैन्य प्रतिष्ठान, सुरक्षा के लिए विशेष विभाजन और मिसाइल हमले का सामना करने में सक्षम स्टील जैसी व्यवस्थाएँ शामिल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आयोजन स्थल या बॉलरूम का निर्माण नहीं है,बल्कि कई सुरक्षा और सैन्य सुविधाओं को एक साथ जोड़ने वाली एक बड़ी परियोजना है।
राष्ट्रपति ने दावा किया कि परिसर में ड्रोन हमलों से सुरक्षा के लिए विशेष छतें और रूफ सिस्टम,सैन्य स्तर का वेंटिलेशन तथा गोलियों,बैलिस्टिक प्रभाव और विस्फोटों का सामना करने में सक्षम विशेष कांच भी लगाया जाएगा। ट्रंप ने इन सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजना का उद्देश्य व्हाइट हाउस और उससे जुड़े लोगों को विभिन्न प्रकार के सुरक्षा खतरों से बचाना है।
ट्रंप ने इस पूरे प्रोजेक्ट को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य रोक दिया जाता है,तो इससे केवल वर्तमान प्रशासन ही प्रभावित नहीं होगा,बल्कि भविष्य में व्हाइट हाउस में आने वाले राष्ट्रपतियों और उनके परिवारों के लिए भी सुरक्षा संबंधी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अदालत के फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तरह के निर्णय से व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और राष्ट्रपति के परिवार की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले राष्ट्राध्यक्षों,महत्वपूर्ण अधिकारियों और यहाँ तक कि आम लोगों के लिए भी परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
ट्रंप ने निर्माण की लागत को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित बॉलरूम का निर्माण निर्धारित समय से पहले और तय बजट के भीतर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के लिए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। राष्ट्रपति के अनुसार,यह उनकी और अन्य निजी समर्थकों की ओर से दिया जा रहा एक तरह का उपहार है।
उन्होंने कहा कि परियोजना का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है या निर्माण के लिए तैयार किया जा चुका है। उनके मुताबिक,सैन्य और अन्य संबंधित ढांचे का अधिकांश हिस्सा बन चुका है,कई चीजें पहले ही तैयार की जा चुकी हैं और उनके लिए भुगतान भी किया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना की कई सामग्री निर्माण स्थल पर पहुँच चुकी है या वहाँ पहुँचाई जा रही है।
ट्रंप ने अदालत के फैसले को पलटने की माँग करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस गलत निर्णय को पूरी तरह रद्द कर देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाकर निर्माण कार्य को जारी रखने की अनुमति हासिल करने की कोशिश करेगी। इस मामले में अब अगली कानूनी लड़ाई अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है।
व्हाइट हाउस परिसर में बॉलरूम निर्माण की योजना शुरू से ही राजनीतिक और कानूनी विवादों में रही है। परियोजना के समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रपति और अन्य महत्वपूर्ण अतिथियों के लिए बड़े आयोजनों की व्यवस्था के लिहाज से अतिरिक्त स्थान की जरूरत है। वहीं,परियोजना का विरोध करने वाले पक्ष ने निर्माण के अधिकार,प्रक्रिया और व्हाइट हाउस परिसर में इस तरह के बड़े बदलाव को लेकर कानूनी सवाल उठाए हैं।
मामले में न्यायिक हस्तक्षेप के बाद निर्माण को लेकर विवाद और गहरा गया है। ट्रंप प्रशासन जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रपति की सुरक्षा को परियोजना का मुख्य आधार बता रहा है,वहीं अदालत में इसे लेकर अधिकार क्षेत्र और कानूनी वैधता जैसे सवाल उठाए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सरकार की अपील पर क्या रुख अपनाता है।
न्यायाधीश नेओमी राव का भी इस मामले में विशेष उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के लिए अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स में नियुक्त किया गया था। अमेरिकी सीनेट ने वर्ष 2019 में उनकी नियुक्ति की पुष्टि की थी। इससे पहले वह व्हाइट हाउस के सूचना एवं नियामक मामलों के कार्यालय में प्रशासक के रूप में काम कर चुकी थीं।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन का पूरा जोर निर्माण परियोजना को कानूनी सुरक्षा दिलाने और उसे जारी रखने पर है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपीलीय अदालत के फैसले को अंतिम नहीं मानते और इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय तक जाएँगे। उनका तर्क है कि यह परियोजना केवल राष्ट्रपति की सुविधा या किसी समारोह के आयोजन तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका व्यापक संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है।
इस पूरे विवाद ने अमेरिका में राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों,संघीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र और व्हाइट हाउस परिसर में निर्माण को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप के सवालों को भी सामने ला दिया है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने की स्थिति में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच अधिकारों की सीमा को लेकर भी महत्वपूर्ण बहस छिड़ सकती है। ट्रंप के लिए यह परियोजना प्रतिष्ठा और सुरक्षा दोनों से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है,जबकि अदालत का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माण रोकने के लिए निचली अदालत के पास कानूनी अधिकार था या नहीं।
ट्रंप ने फिलहाल अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। उन्होंने परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए कहा है कि इसे पूरा किया जाना चाहिए। अब सभी की नजरें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह सरकार की अपील पर क्या निर्णय लेता है और व्हाइट हाउस के इस बहुचर्चित बॉलरूम एवं सुरक्षा परिसर के निर्माण को आगे बढ़ाने की अनुमति देता है या नहीं।
