प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@OpIndia_in)

पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा की अमेरिकी दस्तावेजों में चर्चा,भारतीय सोशल मीडिया पर कूटनीति और ट्रंप से रिश्तों की हुई थी तारीफ

वाशिंगटन,10 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 में हुई अमेरिका यात्रा को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के हाल ही में जारी दस्तावेजों में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। दस्तावेजों के मुताबिक,प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक सक्रियता,रक्षा सहयोग से जुड़े समझौतों और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक बड़े वर्ग ने सकारात्मक नजरिए से देखा था। लोगों ने प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा को वैश्विक मंच पर भारत के हितों को मजबूती से रखने और दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।

अमेरिकी विदेश विभाग ने सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम के तहत जुलाई में कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन्हीं दस्तावेजों में 18 फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट भी शामिल है,जिसमें भारत में सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा को लेकर सामने आई प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया था। रिपोर्ट में यात्रा को लेकर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की चर्चाओं का उल्लेख किया गया है,लेकिन प्रधानमंत्री के समर्थकों के बीच उनकी कूटनीतिक पहल और अमेरिकी नेतृत्व के साथ बातचीत को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रमुख रूप से सामने आई।

दस्तावेज के अनुसार,प्रधानमंत्री मोदी के समर्थकों ने अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप,उद्योगपति एलन मस्क और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ उनकी मुलाकातों को भारत के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इन बैठकों को वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत करने की कोशिश बताया। विशेष रूप से अमेरिका के साथ व्यापार,रक्षा और तकनीकी सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री की बातचीत को महत्वपूर्ण माना गया।

रिपोर्ट में व्यापार वार्ता और रक्षा समझौतों से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी की सक्रियता की भी चर्चा की गई। भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच यह धारणा सामने आई कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान भारत के हितों को मजबूती से रखा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को ‘टफ नेगोशिएटर’ यानी मजबूत और कठिन वार्ताकार कहे जाने को भी भारतीय सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। कई उपयोगकर्ताओं ने ट्रंप की इस टिप्पणी को भारत के हितों की प्रभावी पैरवी के तौर पर देखा।

अमेरिकी दूतावास की रिपोर्ट में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों को भी सोशल मीडिया पर सकारात्मक रूप से देखा गया। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत समीकरणों को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए उपयोगी माना गया। प्रधानमंत्री मोदी की ट्रंप के साथ बातचीत और संयुक्त कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी को कई लोगों ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास को मजबूत करने वाली पहल बताया।

प्रधानमंत्री मोदी की उद्योगपति एलन मस्क के साथ मुलाकात भी सोशल मीडिया चर्चाओं का हिस्सा बनी। भारतीय उपयोगकर्ताओं ने इस मुलाकात को तकनीक,नवाचार और निवेश के क्षेत्र में संभावित सहयोग से जोड़कर देखा। इसके अलावा प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ संवाद को भी भारत के व्यापक हितों के लिए महत्वपूर्ण माना गया। दस्तावेजों के मुताबिक,समर्थकों ने इन मुलाकातों को अमेरिका में भारत की रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा।

रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी के व्हाइट हाउस के सामने स्थित ऐतिहासिक ब्लेयर हाउस में ठहरने का भी उल्लेख किया गया है। सोशल मीडिया पर कुछ भारतीय उपयोगकर्ताओं ने इसे अमेरिका की ओर से प्रधानमंत्री को दिए गए सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के ठहरने की तुलना पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की अमेरिका यात्राओं से भी की। इस तरह प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे को केवल राजनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं माना गया,बल्कि इसके प्रतीकात्मक पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

अमेरिकी दूतावास के विश्लेषण में रक्षा सहयोग को लेकर भी भारतीय सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार,भारत में सैन्य तकनीक के सह-उत्पादन और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने वाली पहलों की सराहना की गई। भारत लंबे समय से अमेरिका के साथ रक्षा तकनीक और सैन्य सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े समझौतों और प्रस्तावों को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2025 को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली अमेरिका यात्रा थी। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर थी,क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार,रक्षा,तकनीक,ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उस समय चर्चा में थे।

अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई थी। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और आर्थिक सहयोग के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया था। रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा सैन्य तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को आगे ले जाने पर भी चर्चा हुई। भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच इन पहलों को भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा गया।

हालाँकि,अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर पूरी तरह एकतरफा प्रतिक्रिया नहीं थी। यात्रा के विभिन्न पहलुओं पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की चर्चाएँ हुईं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने सरकार की कूटनीतिक रणनीति की सराहना की,जबकि कुछ ने यात्रा से जुड़े अन्य मुद्दों पर सवाल उठाए। फिर भी दस्तावेज में प्रधानमंत्री के समर्थकों के बीच उनकी अमेरिका यात्रा को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया का उल्लेख प्रमुखता से किया गया है।

इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की 2025 की अमेरिका यात्रा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अमेरिकी विदेश विभाग का सोशल मीडिया विश्लेषण यह दिखाता है कि उस समय भारत में अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर किस तरह की डिजिटल चर्चा चल रही थी। खास तौर पर ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत समीकरण,व्यापार वार्ता,रक्षा सहयोग और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ संपर्क को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ सामने आई थीं।

कुल मिलाकर,अमेरिकी दस्तावेजों में दर्ज सोशल मीडिया विश्लेषण के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा को उनके समर्थकों ने भारत की वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने वाली यात्रा के रूप में देखा था। ट्रंप की ओर से मोदी को मजबूत वार्ताकार बताए जाने से लेकर रक्षा सहयोग,सैन्य तकनीक के सह-उत्पादन,एलन मस्क से मुलाकात और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ संवाद तक,यात्रा के कई पहलुओं को भारत के लिए सकारात्मक माना गया। अब इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद उस यात्रा की कूटनीतिक और राजनीतिक अहमियत पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।