सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से की बात (तस्वीर क्रेडिट@abhijeet_dipke)

झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के आरोपों से गरमाया मामला,सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से की बात

छत्रपति संभाजी नगर,11 अगस्त (युआईटीवी)- झारखंड में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के आरोपों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने अस्पताल में उपचार करा रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर उनका हाल जाना और उनके आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।

बताया गया है कि देवेंद्र नाथ महतो पिछले नौ दिनों से शांतिपूर्ण उपोषण पर बैठे थे। इसी दौरान पुलिस कार्रवाई में उनके घायल होने का दावा किया गया है। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहाँ उनका उपचार जारी है। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि छात्र नेता की स्थिति गंभीर है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा रहा है। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अस्पताल में उपचार के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने वीडियो कॉल के जरिए अभिजीत दिपके से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आंदोलन के दौरान हुई घटना के बारे में जानकारी दी। बताया गया कि कथित लाठीचार्ज के बाद उनके सीने में तेज दर्द हुआ और इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्थिति खराब होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया,जहाँ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।

अभिजीत दिपके ने बातचीत के दौरान छात्र नेता का हाल जाना और उनके आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उनके मुताबिक,लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और छात्रों को अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है और इस अधिकार को बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

दिपके ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर झारखंड की सड़कों तक छात्रों और युवाओं की आवाज को पुलिस बल के जरिए दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांगों को सुनना और उनके साथ बातचीत करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है,तब भी बल प्रयोग को लेकर स्पष्ट नियमों और जवाबदेही का पालन किया जाना चाहिए।

सीजेपी संस्थापक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि वह छात्र वर्ग की मांगों के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन उनके न्यायपूर्ण संघर्ष में मजबूती से उनके साथ खड़ा है। दिपके ने देवेंद्र नाथ महतो के साहस,दृढ़ता और संघर्ष को सलाम करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण उपोषण या प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। ऐसे आंदोलनों के दौरान यदि पुलिस कार्रवाई में कोई व्यक्ति घायल होता है,तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। दिपके के अनुसार,किसी भी पुलिस कार्रवाई की वैधता और आवश्यकता की जाँच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और क्या उसमें निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ।

सीजेपी की ओर से झारखंड में हुई कथित पुलिस कार्रवाई की तत्काल और निष्पक्ष जाँच की माँग की गई है। संगठन का कहना है कि यदि छात्रों पर वास्तव में लाठीचार्ज किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। संगठन ने कार्रवाई के आदेश देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच करने की माँग की है। सीजेपी का कहना है कि जाँच के दौरान यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है,तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकारी दबाव या पुलिस बल के इस्तेमाल के जरिए युवाओं और छात्रों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की शिकायतें सुने और समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को अपनी मांगें रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है,इसलिए उनके आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

झारखंड में छात्र आंदोलन पहले से ही विभिन्न मांगों और परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। छात्र संगठनों की ओर से पारदर्शिता,निष्पक्ष जाँच और संबंधित मामलों में कार्रवाई की माँग की जाती रही है। आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब छात्र नेताओं की ओर से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है, जबकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत खराब होने की खबर के बाद आंदोलनकारी छात्रों और उनके समर्थकों में चिंता बढ़ी है। उनके समर्थकों का कहना है कि शांतिपूर्ण उपोषण के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ना गंभीर विषय है और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं सीजेपी ने प्रशासन से माँग की है कि छात्र नेता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए और आंदोलन से जुड़े पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जाँच कराई जाए।

सीजेपी ने यह भी कहा कि संगठन छात्रों के लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन के समर्थन में आगे भी खड़ा रहेगा। संगठन का कहना है कि आंदोलनकारियों की मांगों पर प्रशासन को संवाद शुरू करना चाहिए। यदि छात्रों की मांगों को लेकर कोई विवाद या असहमति है,तो उसका समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए किया जाना चाहिए।

फिलहाल देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनके स्वास्थ्य को लेकर संगठन की ओर से गंभीर स्थिति का दावा किया गया है। दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस को तेज कर दिया है। अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग जोर पकड़ रही है। यदि जाँच होती है,तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंदोलन के दौरान वास्तव में क्या हुआ,पुलिस कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और छात्र नेता के घायल होने की परिस्थितियाँ क्या थीं।

झारखंड में छात्रों के आंदोलन के बीच सीजेपी की ओर से सामने आया यह समर्थन मामले को और व्यापक राजनीतिक-सामाजिक विमर्श की ओर ले जा सकता है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की मांगों को बल प्रयोग से दबाने के बजाय उनके साथ बातचीत की जानी चाहिए। वहीं पुलिस कार्रवाई के आरोपों की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग ने प्रशासन के सामने भी जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती खड़ी कर दी है। अब आने वाले दिनों में प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है,इस पर सभी की नजर बनी हुई है।