वॉशिंगटन,12 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने से पहले क्यूबा एक ऐसे नए भविष्य की ओर बढ़ने लगेगा, जहाँ से वापस पुराने रास्ते पर लौटना आसान नहीं होगा। उन्होंने क्यूबा में राजनीतिक बदलाव को अमेरिका के राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए कहा कि वाशिंगटन के लिए इस द्वीपीय देश में सुरक्षित, स्थिर और अमेरिका के साथ बेहतर तालमेल वाली व्यवस्था का होना महत्वपूर्ण है।
रुबियो ने मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी ‘द केटी मिलर पॉडकास्ट’ को दिए एक साक्षात्कार में क्यूबा को लेकर ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं पर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि मौजूदा प्रशासन के कार्यकाल के अंत तक क्यूबा एक बहुत अलग भविष्य की दिशा में आगे बढ़ चुका होगा। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका क्यूबा में बदलाव लाने के लिए आने वाले समय में कौन-कौन से ठोस कदम उठाने की योजना बना रहा है।
क्यूबा को लेकर लंबे समय से सख्त रुख रखने वाले रुबियो ने कहा कि किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए समय की आवश्यकता होती है। उनके मुताबिक,कई दशकों से चली आ रही किसी व्यवस्था को अचानक एक रात में समाप्त करके उसके स्थान पर पूरी तरह नई व्यवस्था स्थापित करना संभव नहीं है। उन्होंने क्यूबा की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था की तुलना पूर्वी यूरोप में दशकों तक चले कम्युनिस्ट शासन से की और कहा कि वहाँ भी राजनीतिक बदलाव एक लंबी प्रक्रिया के जरिए आया था।
रुबियो ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक व्यवस्था लगभग 70 वर्षों तक बनी रहती है और उसकी जड़ें समाज तथा संस्थाओं में गहरी हो जाती हैं,तो उसे अचानक खत्म करना व्यावहारिक नहीं होता। उनके अनुसार,इसके लिए एक परिवर्तन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और अंतिम परिणाम तक पहुँचने में समय लगता है। उन्होंने पूर्वी यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों को अपनी मौजूदा स्थिति तक पहुँचने में तीन से पाँच साल का समय लगा। उन्होंने पोलैंड को इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
क्यूबा में दशकों से कम्युनिस्ट शासन है और अमेरिका तथा क्यूबा के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन की ओर से क्यूबा पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव की नीति कई वर्षों से जारी रही है। रुबियो का बयान ऐसे समय में आया है,जब ट्रंप प्रशासन क्यूबा को लेकर अपनी नीति को अधिक स्पष्ट रूप देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि विदेश मंत्री ने यह नहीं बताया कि आने वाले समय में क्यूबा पर किस प्रकार का दबाव डाला जाएगा या अमेरिका किन विशेष नीतिगत कदमों को लागू करने की तैयारी कर रहा है।
रुबियो ने कहा कि क्यूबा को लेकर अमेरिका की चिंता केवल वैचारिक या ऐतिहासिक मतभेदों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार,इस मुद्दे का सीधा संबंध अमेरिका के राष्ट्रीय हित से है। उन्होंने कहा कि क्यूबा जिस दिशा में आगे बढ़ेगा,उसका असर अमेरिका पर भी पड़ेगा। इसलिए अमेरिका के लिए यह जरूरी है कि वहाँ स्थिरता और सुरक्षा कायम हो तथा दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की संभावनाएँ विकसित हों।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि क्यूबा इसी दिशा में आगे बढ़ेगा और मौजूदा प्रशासन के कार्यकाल के दौरान काफी आगे तक पहुँच जाएगा। रुबियो ने हालाँकि,यह भी स्वीकार किया कि इस बारे में पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा को जो प्राथमिकता दी है,उसे देखते हुए यह मुद्दा अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
क्यूबा के साथ रुबियो का व्यक्तिगत जुड़ाव भी इस मुद्दे को विशेष बनाता है। क्यूबाई मूल के अमेरिकी रुबियो लंबे समय से हवाना की कम्युनिस्ट सरकार के आलोचक रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि क्यूबा से उनका व्यक्तिगत संबंध है और वह इस देश की परवाह करते हैं। हालाँकि,उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी क्यूबा के लिए नहीं,बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के लिए काम करना है।
रुबियो ने कहा कि उनका व्यक्तिगत जुड़ाव अपनी जगह है,लेकिन अमेरिकी अधिकारी के रूप में उनके फैसलों का आधार अमेरिकी राष्ट्रीय हित है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के हित में यह है कि क्यूबा एक सुरक्षित और स्थिर देश बने और उसके अमेरिका के साथ बेहतर संबंध हों। उन्होंने इसी दृष्टिकोण को वेनेजुएला पर भी लागू किया।
वेनेजुएला का उल्लेख करते हुए रुबियो ने कहा कि वहाँ भी अमेरिका का हित एक सुरक्षित और स्थिर देश में है,जिसके साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन पश्चिमी गोलार्ध के उन देशों पर विशेष ध्यान दे रहा है,जहाँ राजनीतिक अस्थिरता या अमेरिका विरोधी नीतियाँ लंबे समय से मौजूद रही हैं।
क्यूबा को लेकर रुबियो की टिप्पणी में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि उन्होंने बदलाव को तत्काल राजनीतिक घटना के बजाय लंबी प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया। उनका कहना है कि दशकों से स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के लिए संस्थागत,सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता होगी। पूर्वी यूरोप का उदाहरण देकर उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका भी क्यूबा में किसी त्वरित बदलाव की अपेक्षा करने के बजाय क्रमिक परिवर्तन की संभावना देख रहा है।
रुबियो के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा को अपनी विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहा है। हालाँकि,अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करेगा,राजनयिक दबाव बढ़ाएगा या किसी अन्य प्रकार की रणनीति अपनाएगा। विदेश मंत्री ने इन संभावित कदमों का विवरण नहीं दिया है।
अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंधों का इतिहास काफी जटिल रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय तक राजनयिक और आर्थिक तनाव रहा है। समय-समय पर संबंधों में सुधार की कोशिशें भी हुईं,लेकिन राजनीतिक मतभेदों के कारण स्थायी बदलाव नहीं हो सका। रुबियो की मौजूदा टिप्पणियाँ बताती हैं कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा की राजनीतिक दिशा को बदलने के लिए दबाव बनाए रखने को महत्वपूर्ण मानता है।
रुबियो ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि क्यूबा में किसी भी संभावित परिवर्तन का अंतिम उद्देश्य केवल राजनीतिक बदलाव नहीं,बल्कि एक ऐसी व्यवस्था की स्थापना होना चाहिए जो स्थिर और सुरक्षित हो तथा अमेरिका के साथ बेहतर संबंध रखे। उन्होंने इसे सीधे अमेरिकी राष्ट्रीय हित से जोड़ा है।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन की ओर से क्यूबा के लिए किसी विस्तृत कार्ययोजना का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है,लेकिन रुबियो के बयान से इतना स्पष्ट है कि वाशिंगटन क्यूबा में बदलाव की संभावना को गंभीरता से देख रहा है। उनका दावा है कि प्रशासन के कार्यकाल के समाप्त होने तक क्यूबा एक ऐसे रास्ते पर काफी आगे बढ़ चुका होगा,जहाँ से पुराने राजनीतिक ढांचे की ओर वापसी आसान नहीं होगी। अब नजर इस बात पर होगी कि अमेरिकी प्रशासन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कौन से कूटनीतिक,आर्थिक और राजनीतिक कदम उठाता है और क्यूबा की सरकार उस दबाव का किस तरह जवाब देती है।
