कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह (तस्वीर क्रेडिट@Ashu9621101476)

कंगना रनौत का नसीरुद्दीन शाह पर तीखा हमला,बोलीं- देश की रोटी खाकर पड़ोसी देश के लिए लड़ते हैं

मुंबई,12 अगस्त (युआईटीवी)- भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है। छात्र आंदोलनों और देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर बॉलीवुड की भूमिका पर छिड़ी बहस के बीच कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधा। उन्होंने अभिनेता की देश के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘लोमड़ी’ तक कह दिया। कंगना की इस टिप्पणी के बाद बॉलीवुड से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज हो गई है।

दरअसल,कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक खबर साझा की थी। इस खबर में अभिनेता पीयूष मिश्रा के नसीरुद्दीन शाह को लेकर दिए गए हालिया बयान का उल्लेख था। इसी खबर को साझा करते हुए कंगना ने नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी का संदर्भ लिया और उन पर सीधा हमला किया। कंगना ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है,लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि जिस घर यानी देश की वह रोटी खाती हैं,उसकी रखवाली करती हैं और उसके लिए लड़ती हैं।

कंगना ने आगे नसीरुद्दीन शाह को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि वह देश का खाते हैं,लेकिन पड़ोसी देश के लिए लड़ते हैं। हालाँकि,यह कंगना का राजनीतिक आरोप है और उन्होंने अपनी पोस्ट में इसके समर्थन में कोई विशिष्ट उदाहरण या तथ्य प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि मौजूदा समय में किसी व्यक्ति को कुत्ता कहना भी एक तरह की तारीफ हो सकती है,क्योंकि उनके अनुसार वफादारी और मासूमियत बहुत कम देखने को मिलती है।

कंगना ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ बताते हुए कहा कि वह उनके जैसा बनना पसंद नहीं करेंगी और इसके बजाय कुत्ता कहलाना स्वीकार करेंगी। उनकी इस टिप्पणी को नसीरुद्दीन शाह की उस पुरानी बात की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है,जिसमें उन्होंने बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए ‘मुँह में हड्डी दबाए कुत्ते’ वाली कहावत का इस्तेमाल किया था।

नसीरुद्दीन शाह की यह टिप्पणी उस समय सामने आई थी,जब उनसे देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और छात्र आंदोलनों के बीच बॉलीवुड के बड़े कलाकारों की चुप्पी को लेकर सवाल पूछा गया था। उनसे पूछा गया था कि जब देश में विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं,तब फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियाँ खुलकर अपनी राय रखने से क्यों बच रही हैं। इसके जवाब में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि कलाकार तब बोलेंगे,जब उनका जमीर उन्हें ऐसा करने के लिए कहेगा।

अभिनेता ने इस संदर्भ में एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि जिस कुत्ते के मुँह में हड्डी होती है,वह भौंक नहीं सकता। उनका आशय यह था कि कुछ लोग किसी कारण से अपनी आवाज उठाने से बचते हैं। उन्होंने कहा था कि जब उनके मुँह से हड्डी गिर जाएगी या उनके दाँत टूट जाएँगे,तब वे भौंकेंगे। नसीरुद्दीन शाह की इस टिप्पणी ने उस समय भी बॉलीवुड में कलाकारों की सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर बहस को जन्म दिया था।

अब अभिनेता पीयूष मिश्रा ने झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े मुद्दे को लेकर राँची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए नसीरुद्दीन शाह की इसी पुरानी टिप्पणी का संदर्भ दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कुछ लोगों के मुँह में हड्डी होने के कारण वे बोल नहीं सकते,तो वर्तमान स्थिति में यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि आखिर किसके मुँह में हड्डी है।

पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि क्या लोग इसलिए चुप रहे क्योंकि उन्हें पिज्जा और बर्गर की इच्छा थी या इसलिए कि वे जिस भीड़ का हिस्सा थे,वह किसी खास तरह की थी। उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें नसीरुद्दीन शाह से डर नहीं लगता। पीयूष मिश्रा की इस टिप्पणी को झारखंड में छात्रों के आंदोलन के संदर्भ में देखा जा रहा है,जहाँ भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।

पीयूष मिश्रा के बयान के बाद कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह पर हमला करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। कंगना लंबे समय से बॉलीवुड के सामाजिक और राजनीतिक रुख को लेकर मुखर रही हैं। वह कई मौकों पर फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकारों और उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों पर सवाल उठाती रही हैं। इस बार भी उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी को आधार बनाकर अपनी राजनीतिक और वैचारिक स्थिति स्पष्ट की।

कंगना की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है,जब झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और कार्रवाई को लेकर विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे में बॉलीवुड कलाकारों की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई है।

छात्र आंदोलनों के समर्थन और विरोध को लेकर फिल्मी सितारों की भूमिका लंबे समय से बहस का विषय रही है। एक पक्ष का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े कलाकारों को सामाजिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठानी चाहिए,जबकि दूसरा पक्ष यह तर्क देता है कि किसी भी कलाकार को अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करने या चुप रहने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इसी व्यापक बहस के बीच नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी और पीयूष मिश्रा की प्रतिक्रिया ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

कंगना रनौत की ताजा पोस्ट ने इस विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। उन्होंने अपने बयान में देश के प्रति वफादारी को केंद्र में रखा और नसीरुद्दीन शाह की विचारधारा पर सवाल उठाया। हालाँकि,नसीरुद्दीन शाह की ओर से कंगना की इस टिप्पणी पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल,इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के दौरान फिल्मी हस्तियों की क्या भूमिका होनी चाहिए और क्या उन्हें सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। झारखंड में छात्रों के आंदोलन से शुरू हुई यह बहस अब बॉलीवुड के दो दिग्गज कलाकारों से जुड़ी टिप्पणियों और कंगना रनौत के तीखे हमले तक पहुँच गई है। आने वाले दिनों में नसीरुद्दीन शाह की प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं,इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।