नई दिल्ली,13 अगस्त (युआईटीवी)- टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाए जाने की खबर का असर बुधवार को टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र के दौरान समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके चलते टाटा ग्रुप की 17 लिस्टेड कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण 68,119 करोड़ रुपये घट गया। सत्र के अंत में इन कंपनियों का कुल मार्केटकैप करीब 26.32 लाख करोड़ रुपये रह गया,जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह लगभग 27 लाख करोड़ रुपये था।
बुधवार की बिकवाली में सबसे बड़ा झटका टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को लगा। देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी के शेयर में कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई और अंत में यह 4.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,323.30 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। शेयर में आई इस गिरावट का सीधा असर कंपनी के बाजार पूँजीकरण पर पड़ा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का मार्केटकैप करीब 42,440 करोड़ रुपये घटकर 8.40 लाख करोड़ रुपये रह गया। समूह की कुल बाजार वैल्यू में आई गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा इसी कंपनी से आया।
टाटा ग्रुप की बाजार वैल्यू में गिरावट के लिहाज से टाइटन दूसरी सबसे बड़ी वजह रही। टाइटन के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके कारण कंपनी के बाजार पूँजीकरण में करीब 9,304 करोड़ रुपये की कमी आई। निवेशकों के बीच टाटा संस के नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर बनी अनिश्चितता का असर समूह की उन कंपनियों पर भी दिखाई दिया,जिनका कारोबार और मूल्यांकन व्यापक बाजार में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयर में भी कमजोरी रही। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में करीब 4,898 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील की बाजार वैल्यू में 4,745 करोड़ रुपये की गिरावट आई। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का मार्केटकैप भी 3,098 करोड़ रुपये घट गया। इसके अलावा टाटा पावर और इंडियन होटल्स के बाजार पूँजीकरण में क्रमशः 1,598 करोड़ रुपये और 1,566 करोड़ रुपये की कमी देखने को मिली।
बुधवार को टाटा समूह की कई अन्य कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव बना रहा। टाटा कम्युनिकेशंस की बाजार वैल्यू में करीब 812 करोड़ रुपये की कमी आई। टाटा एलेक्सी का मार्केटकैप 606 करोड़ रुपये घटा,जबकि ट्रेंट की बाजार वैल्यू में 907 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के बाजार पूंजीकरण में करीब 508 करोड़ रुपये और तेजस नेटवर्क्स में 265 करोड़ रुपये की कमी आई। टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र के मार्केटकैप में भी गिरावट दर्ज की गई।
हालाँकि,टाटा ग्रुप की सभी लिस्टेड कंपनियां बुधवार को लाल निशान में बंद नहीं हुईं। कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। टाटा मोटर्स की बाजार वैल्यू में करीब 1,786 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। वहीं टाटा कैपिटल के मार्केटकैप में लगभग 700 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। टाटा केमिकल्स और वोल्टास के शेयरों में भी मामूली मजबूती रही। दोनों कंपनियों की बाजार वैल्यू में क्रमशः 167 करोड़ रुपये और 66 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। इससे स्पष्ट है कि टाटा संस के नेतृत्व में बदलाव की खबर का असर पूरे समूह में एक जैसा नहीं रहा।
शेयर बाजार में यह बिकवाली ऐसे समय हुई,जब टाटा संस के बोर्ड में चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर मतभेद सामने आए। एक बोर्ड सदस्य की ओर से उनके कार्यकाल को बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किए जाने के बाद चंद्रशेखरन ने अपना कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व और उत्तराधिकार योजना को लेकर निवेशकों के बीच नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि टाटा समूह में उन्होंने अपने पेशेवर करियर के चार दशक पूरे किए हैं। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में करीब एक दशक के कार्यकाल को उन्होंने सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय से बनी अनिश्चितता के कारण अब उत्तराधिकार योजना को आगे बढ़ाना आवश्यक हो गया था। उनके मुताबिक,नेतृत्व परिवर्तन को लेकर स्पष्टता जरूरी है,ताकि समूह भविष्य की रणनीति और दीर्घकालिक योजनाओं पर मजबूती से आगे बढ़ सके।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण कारोबारी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। समूह की आईटी,ऑटोमोबाइल,स्टील, उपभोक्ता उत्पाद,ऊर्जा,होटल,दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियाँ भारतीय शेयर बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं। ऐसे में टाटा संस के नेतृत्व में किसी भी बड़े बदलाव का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
बुधवार की भारी बिकवाली को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। निवेशकों के लिए नेतृत्व में स्थिरता और उत्तराधिकार की स्पष्ट योजना महत्वपूर्ण होती है। टाटा समूह जैसी बड़ी कारोबारी इकाई में चेयरमैन के पद पर बदलाव की संभावना बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। खास तौर पर तब,जब समूह की कई कंपनियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में बड़े निवेश और विस्तार योजनाओं पर काम कर रही हैं।
हालाँकि,केवल एक कारोबारी सत्र की गिरावट से टाटा समूह की कंपनियों के दीर्घकालिक प्रदर्शन का आकलन करना उचित नहीं होगा। शेयर बाजार में किसी बड़े कॉरपोरेट घटनाक्रम के बाद शुरुआती प्रतिक्रिया अक्सर निवेशकों की तत्काल धारणा को दर्शाती है। आने वाले दिनों में नए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता,उत्तराधिकार प्रक्रिया और टाटा संस की भविष्य की रणनीति इस बात को प्रभावित कर सकती है कि निवेशकों का भरोसा किस दिशा में जाता है।
टाटा ग्रुप की कुल बाजार पूँजी में 68,119 करोड़ रुपये की कमी ने इस घटनाक्रम के बाजार पर तत्काल प्रभाव को जरूर उजागर किया है। खास तौर पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और टाइटन जैसी बड़ी कंपनियों में गिरावट ने समूह की कुल वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ाया। दूसरी ओर,टाटा मोटर्स और टाटा कैपिटल जैसी कुछ कंपनियों में तेजी यह भी दिखाती है कि निवेशकों की प्रतिक्रिया कंपनी-दर-कंपनी अलग रही।
अब बाजार की नजर टाटा संस के अगले नेतृत्व और उत्तराधिकार योजना पर रहेगी। चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने के फैसले के बाद समूह को नए नेतृत्व के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। इस प्रक्रिया में जितनी जल्दी स्पष्टता आती है,उतना ही निवेशकों के बीच बनी अनिश्चितता कम होने की संभावना है। फिलहाल बुधवार की कारोबारी तस्वीर ने यह जरूर दिखा दिया है कि टाटा संस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों और उनकी संयुक्त बाजार वैल्यू पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
