दिल्ली लाल किला ब्लास्ट (तस्वीर क्रेडिट@DipikaPS)

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में लालकिला हमले को एक्यूआईएस से जोड़ा गया,दक्षिण एशिया में बढ़ते आतंकी खतरे पर चेतावनी

वॉशिंगटन,13 अगस्त (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिले पर हुए हमले को अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी एक्यूआईएस से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्यूआईएस अब एक बिखरे हुए आतंकी समूह से विकसित होकर धीरे-धीरे एक क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने संगठन की बढ़ती वित्तीय और लॉजिस्टिक क्षमताओं को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने अपने संचालन के लिए ऐसे नेटवर्क तैयार किए हैं,जो उसे अलग-अलग इलाकों में छोटी और विकेंद्रीकृत इकाइयों के जरिए गतिविधियां संचालित करने में सक्षम बना रहे हैं।

यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की ‘एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम’ की 38वीं रिपोर्ट में सामने आई है। यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उनसे जुड़े संगठनों पर निगरानी रखने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य सदस्य देशों को वैश्विक आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों, उनकी वित्तीय क्षमता,नेटवर्क,संचालन के तरीकों और संभावित क्षेत्रीय विस्तार के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है।

रिपोर्ट में एक्यूआईएस की बदलती संरचना पर विशेष ध्यान दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार,संगठन अब पहले की तरह एक बड़े और केंद्रीकृत ढाँचे के रूप में काम करने के बजाय छोटे-छोटे और अलग-अलग समूहों के माध्यम से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। इस तरह का विकेंद्रीकृत मॉडल सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी संगठन की गतिविधियों का पता लगाना और उसके पूरे नेटवर्क को एक साथ निशाना बनाना अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे संगठन के क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क के रूप में उभरने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया है।

रिपोर्ट में नवंबर 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिले पर हुए हमले का भी उल्लेख किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार,यह हमला आधिकारिक तौर पर एक्यूआईएस से जुड़ा पाया गया था। लालकिला दिल्ली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और राष्ट्रीय प्रतीक है। ऐसे स्थान पर हुए हमले को एक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन से जोड़कर देखा जाना भारत की सुरक्षा व्यवस्था और दक्षिण एशिया में आतंकवादी नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता का विषय बनाता है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में एक्यूआईएस के संभावित क्षेत्रीय विस्तार को लेकर भी चेतावनी दी गई है। इसमें विशेष रूप से बांग्लादेश के इस्तेमाल की आशंका का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार,ऐसी चिंता रही है कि एक्यूआईएस बांग्लादेश का इस्तेमाल अपनी नई इकाइयां स्थापित करने के लिए कर सकता है। यदि ऐसा नेटवर्क विकसित होता है तो इसका असर केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि दक्षिण एशिया के कई देशों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

एक्यूआईएस की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की व्यापक सुरक्षा स्थिति का भी आकलन किया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार,दुनिया में आतंकवादी खतरा कुल मिलाकर पहले के स्तर के आसपास बना हुआ है,लेकिन साहेल क्षेत्र और दक्षिण एशिया में स्थिति अधिक गंभीर हुई है। दक्षिण एशिया में आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी,सीमापार हिंसा और विभिन्न चरमपंथी संगठनों के बीच सहयोग की आशंकाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।

रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का भी जिक्र किया गया है। दोनों देशों के बीच सीमा पार हमलों के कारण क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है। रिपोर्ट में तालिबान प्रशासन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को समर्थन देने के आरोपों का उल्लेख किया गया है। इसके चलते पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी और दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति पैदा होने की बात कही गई है।

हालांकि तालिबान प्रशासन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है कि वह किसी आतंकवादी संगठन को अपनी जमीन पर शरण या समर्थन देता है। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में सदस्य देशों की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं का उल्लेख किया गया है। सदस्य देशों को आशंका है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी संघर्ष चरमपंथी संगठनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। इससे न केवल दोनों देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है,बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में अफगानिस्तान में सक्रिय विभिन्न आतंकवादी संगठनों को पड़ोसी देशों और मध्य एशिया के लिए लगातार खतरा बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट-खुरासान यानी आईएस-के के खिलाफ अभियान और दूसरे आतंकी संगठनों को नियंत्रित करने की कोशिशों के बावजूद तालिबान आतंकवाद की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने में सफल नहीं रहा है। अफगानिस्तान में विभिन्न आतंकी संगठनों की मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में एक्यूआईएस और पाकिस्तान में सक्रिय कुछ अन्य संगठनों के बीच संबंधों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार,एक्यूआईएस ‘इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान’ नामक संगठन की मुख्य ताकत भी है। इस संगठन को कई हमलों के लिए जिम्मेदार बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि अल-कायदा से जुड़े नेटवर्क केवल अपने नाम से संचालित संगठनों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय छोटे समूहों के साथ भी संबंध बनाए रख सकते हैं।

रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि एक्यूआईएस के कुछ नेता अब भी काबुल में मौजूद हैं और कथित तौर पर उन्हें अफगान पहचान पत्र भी जारी किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस घटनाक्रम को तालिबान और एक्यूआईएस के बीच करीबी सहयोग के संभावित संकेत के तौर पर देखा है। हालाँकि,इन दावों का व्यापक संदर्भ अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों और वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी पुरानी चिंताओं के बीच सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक अल-कायदा ने टीटीपी को वैचारिक मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और अन्य प्रकार का समर्थन दिया है। यह संबंध दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि टीटीपी पाकिस्तान में लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अप्रैल में अल-कायदा के आधिकारिक मीडिया मंच ने सार्वजनिक रूप से तालिबान का समर्थन किया और पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ टीटीपी की गतिविधियों का भी खुलकर समर्थन किया।

संयुक्त राष्ट्र के आकलन में आतंकवादी संगठनों के बीच वैचारिक और संचालनात्मक संबंधों को विशेष चिंता के रूप में देखा गया है। एक संगठन का दूसरे संगठन को प्रशिक्षण, विचारधारा,संसाधन या अन्य प्रकार का समर्थन देना आतंकवादी नेटवर्क के विस्तार की क्षमता बढ़ा सकता है। खास तौर पर तब,जब संगठन छोटे और विकेंद्रीकृत समूहों के रूप में काम करने लगें। ऐसी स्थिति में किसी एक संगठन के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद उसके विचार और नेटवर्क दूसरे समूहों के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं।

दक्षिण एशिया में आतंकवाद की चुनौती का एक महत्वपूर्ण पहलू सीमाओं के पार संगठनों की गतिविधियां हैं। अफगानिस्तान,पाकिस्तान,भारत और बांग्लादेश जैसे देशों के बीच भौगोलिक निकटता के कारण किसी एक देश में सक्रिय आतंकी नेटवर्क दूसरे देशों में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की कोशिश कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में एक्यूआईएस के संभावित क्षेत्रीय विस्तार को लेकर जताई गई चिंता इसी व्यापक सुरक्षा चुनौती की ओर इशारा करती है।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक आतंकवादी खतरे को केवल बड़े और केंद्रीकृत संगठनों के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। आतंकवादी संगठन अब छोटे समूहों, स्थानीय नेटवर्क और सीमित संसाधनों के माध्यम से भी अपनी गतिविधियाँ संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं। वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क का विकास ऐसे संगठनों को लंबे समय तक अपनी गतिविधियां जारी रखने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र की निगरानी व्यवस्था आतंकवादी संगठनों के वित्तीय स्रोतों और उनके सहयोगी नेटवर्क पर भी लगातार नजर रखती है।

इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा तथा उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था वर्ष 1999 से पारित विभिन्न प्रस्तावों के आधार पर लागू है। इसका उद्देश्य आतंकवादी संगठनों की आर्थिक और संचालनात्मक क्षमता को कमजोर करना है। इसके तहत सदस्य देशों से आतंकवादी संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की संपत्तियाँ फ्रीज करने,यात्रा प्रतिबंध लागू करने और हथियारों की आपूर्ति पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने की अपेक्षा की जाती है।

संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम हर छह महीने में स्वतंत्र रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। इन रिपोर्टों के माध्यम से सदस्य देशों को आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों और उनसे उत्पन्न होने वाले नए खतरों का आकलन करने में मदद मिलती है। साथ ही यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध प्रभावी तरीके से लागू किए जाएं।

लालकिले पर हुए हमले को एक्यूआईएस से जोड़ने और संगठन की बढ़ती क्षमताओं पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता ऐसे समय सामने आई है,जब दक्षिण एशिया में आतंकवाद और सीमापार हिंसा को लेकर सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं। रिपोर्ट का आकलन बताता है कि क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क अब पहले की तुलना में अधिक जटिल और विकेंद्रीकृत हो सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने केवल हमलों को रोकने की चुनौती नहीं है,बल्कि आतंकवादी संगठनों के वित्तीय स्रोतों, लॉजिस्टिक नेटवर्क,वैचारिक समर्थन और क्षेत्रीय संपर्कों को कमजोर करने की भी चुनौती है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इस व्यापक खतरे को रेखांकित करते हुए सदस्य देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी ध्यान केंद्रित किया है। आतंकवादी नेटवर्क जब सीमाओं के पार सक्रिय होते हैं,तो उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना,वित्तीय नेटवर्क पर निगरानी और प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण हो जाता है। एक्यूआईएस को लेकर संयुक्त राष्ट्र का ताजा आकलन इसी चुनौती की गंभीरता को सामने लाता है और संकेत देता है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का खतरा अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।