प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@mukeshdeshka)

विभाजन की पीड़ा से उबरकर देश निर्माण में योगदान देने वालों को पीएम मोदी ने किया नमन,बोले- पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता

नई दिल्ली,14 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर देश के विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि विभाजन का दौर इतिहास का वह भयावह अध्याय है,जिसने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। परिवार उजड़ गए,लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और असहनीय पीड़ा का सामना किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों से निकलकर लोगों ने जिस साहस,धैर्य और संकल्प के साथ अपनी जिंदगी को दोबारा खड़ा किया,वह मानव जिजीविषा और संघर्ष की अद्भुत मिसाल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में कहा कि आज देश ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मना रहा है। यह अवसर उन सभी लोगों के साहस और संघर्ष को याद करने का है,जो देश के विभाजन से प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा कि विभाजन का वह दौर कई जिंदगियों को तहस-नहस करने वाला था। अनेक परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा,अपनों से बिछड़ना पड़ा और भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस त्रासदी की पीड़ा को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन की त्रासदी से प्रभावित लोगों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने शून्य से अपने जीवन की नई शुरुआत की और अपने परिश्रम तथा दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर आगे बढ़े। विस्थापन,आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने परिवारों को संभाला तथा नई पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य तैयार किया। प्रधानमंत्री के अनुसार,इन लोगों की जीवन यात्राएँ यह बताती हैं कि इंसान कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए भी अपने संकल्प और मेहनत के बल पर सफलता हासिल कर सकता है।

उन्होंने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों ने चुनौतियों को अवसर में बदला और आगे चलकर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस,सामर्थ्य और कर्मठता से यह साबित किया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों,दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से उन्हें बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने ऐसे सभी देशवासियों को हृदय से नमन किया,जिन्होंने उस वीभत्स दौर को झेला और उसके बाद राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में देश में सद्भाव,भाईचारे और एकजुटता की भावना को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रार्थना की कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देशवासियों के बीच आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के संकल्प को और मजबूत करे। उन्होंने कहा कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने देशवासियों से मिलकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान भी किया।

प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों को नमन किया जाना चाहिए,जिन्होंने उस भयावह दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपने साहस और सामर्थ्य से यह दिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को पूरा किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सद्भावना और राष्ट्रीय एकजुटता की भावना को और अधिक मजबूत करने की अपील की।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। उन्होंने लिखा, “उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।” इस सुभाषित के माध्यम से उन्होंने परिश्रम,उद्यम और पुरुषार्थ के महत्व को रेखांकित किया। इसका भावार्थ है कि परिश्रम और निरंतर प्रयास से ही विभिन्न कलाओं,विज्ञान, तकनीकी कौशल,शिल्प और नवाचार का विकास होता है तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सुभाषित का संदेश यह है कि मनुष्य को केवल भाग्य के भरोसे बैठकर परिस्थितियों के बदलने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। उसे साहस,कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। पुरुषार्थ के माध्यम से ही व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है और अपने सपनों को साकार कर सकता है। इसी विचार को विभाजन से प्रभावित लोगों के संघर्ष से भी जोड़ा जा सकता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दिया।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देश के इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय को याद करने का अवसर है,जिसने समाज और परिवारों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। प्रधानमंत्री के संदेश में इस त्रासदी की पीड़ा को याद करने के साथ-साथ उन लोगों के साहस और संघर्ष को सम्मान दिया गया,जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता चुना। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश केवल अतीत को याद करने तक सीमित नहीं रहा,बल्कि उन्होंने वर्तमान और भविष्य के लिए भी एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने सद्भाव,भाईचारे, एकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। साथ ही उन्होंने परिश्रम और पुरुषार्थ को सफलता का आधार बताते हुए देशवासियों से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। इस तरह विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने इतिहास की पीड़ा को स्मरण करते हुए संघर्ष से मिली सीख,राष्ट्रीय एकता और उज्ज्वल भविष्य के संकल्प को सामने रखा।