अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका ने ड्रोन आयात पर लगाया 100 फीसदी तक टैरिफ,चीन पर निर्भरता घटाने के लिए ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम

वाशिंगटन,14 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मानवरहित ड्रोन और उनसे जुड़े पुर्जों के आयात पर 100 फीसदी तक नए शुल्क लगाने का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस के अनुसार,यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का उद्देश्य ड्रोन के क्षेत्र में विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इस नीति का सबसे बड़ा प्रभाव चीन से आने वाले ड्रोन और उनके पुर्जों पर पड़ने की संभावना है,क्योंकि वैश्विक ड्रोन बाजार में चीन की कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है।

व्हाइट हाउस के मुताबिक,नई व्यवस्था के तहत कुछ विशेष प्रकार के मानवरहित विमान प्रणालियों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जाएगा। इसमें 25 किलोग्राम से अधिक वजन वाले बड़े ड्रोन और ऐसे ड्रोन सिस्टम शामिल हैं,जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील तकनीकी क्षमताएँ मौजूद हैं। इनमें थर्मल इमेजर और डॉकिंग स्टेशन जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल उन्नत ड्रोन संचालन,निगरानी और अन्य संवेदनशील गतिविधियों में किया जा सकता है।

नई नीति के तहत छोटे ड्रोन के लिए अपेक्षाकृत कम शुल्क निर्धारित किया गया है। ऐसे ड्रोन पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल आयात को महँगा करना नहीं है,बल्कि अमेरिका में ड्रोन और उनके महत्वपूर्ण पुर्जों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना भी है। सरकार चाहती है कि अमेरिकी कंपनियाँ ड्रोन विनिर्माण और उससे जुड़ी तकनीक के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाएँ,ताकि भविष्य में विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम हो सके।

अमेरिका के अनुसार, ड्रोन तकनीक अब केवल व्यावसायिक इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह गई है। निगरानी,सुरक्षा,सैन्य गतिविधियों,आपदा प्रबंधन और औद्योगिक कार्यों सहित कई क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ड्रोन और उनके प्रमुख पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि किसी संभावित संकट की स्थिति में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता देश के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है।

वैश्विक ड्रोन बाजार में चीन की मजबूत स्थिति अमेरिका के इस फैसले का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। कई अध्ययनों के अनुसार, वर्ष 2006 में स्थापित चीनी कंपनी डीजीआई ने हाल के वर्षों में वैश्विक ड्रोन बाजार के दो-तिहाई से अधिक हिस्से पर कब्जा बना लिया है। चीन में ड्रोन निर्माण के लिए विकसित व्यापक औद्योगिक आधार और आपूर्ति श्रृंखला ने वहाँ की कंपनियों को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति प्रदान की है। अमेरिका की नई शुल्क नीति इसी निर्भरता को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज है। खासकर उन्नत तकनीक,सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच कई तरह के प्रतिबंध और व्यापारिक विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे समय में ड्रोन और उनके पुर्जों पर नए शुल्क लगाए जाने से दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी तनाव और बढ़ने की संभावना है।

ज्यादातर नए टैरिफ 3 सितंबर से लागू होने की उम्मीद है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है,जब चीन ने भी अमेरिका से जुड़े ड्रोन निर्यात पर नई पाबंदियों की घोषणा की है। चीन ने पिछले सप्ताह अमेरिका को ड्रोन निर्यात पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाने के साथ छह कंपनियों को काली सूची में डालने का फैसला किया था। बीजिंग ने अपने कदम को अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों और जबरन श्रम तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों के जवाब के तौर पर पेश किया था।

चीन की कार्रवाई अमेरिका द्वारा चीन समेत 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाए जाने के कुछ दिन बाद सामने आई थी। इसके बाद ड्रोन और उनसे जुड़े पुर्जे भी उन उत्पादों की बढ़ती सूची में शामिल हो गए हैं,जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक और तकनीकी तनाव का हिस्सा बन रहे हैं। दोनों देश अपनी-अपनी रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों की आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि घरेलू ड्रोन उद्योग को मजबूत करना लंबे समय में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। नए शुल्क से आयातित ड्रोन और उनके पुर्जे अमेरिकी बाजार में महँगे हो सकते हैं। इससे अमेरिकी निर्माताओं को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की संभावना है और कंपनियाँ स्थानीय स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश कर सकती हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे ड्रोन के साथ-साथ मोटर,सेंसर,कैमरा,बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

हालाँकि,नई शुल्क नीति का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों पर भी पड़ सकता है। यदि आयातित ड्रोन और उनके पुर्जे महंगे होते हैं, तो उन क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है जहाँ इन उपकरणों का व्यावसायिक इस्तेमाल होता है। निर्माण,कृषि,निगरानी, फोटोग्राफी,लॉजिस्टिक्स और अन्य उद्योगों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में आयात शुल्क बढ़ने से शुरुआती दौर में कारोबारियों और उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने के दीर्घकालिक लाभ इन संभावित लागतों से अधिक महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन विशेष रूप से उन ड्रोन प्रणालियों को लेकर सतर्क है,जिनमें उन्नत सेंसर और निगरानी क्षमताएँ मौजूद हैं। थर्मल इमेजिंग और डॉकिंग स्टेशन जैसी तकनीकों को संवेदनशील मानते हुए इन पर अधिक कठोर शुल्क लगाया गया है।

ड्रोन क्षेत्र में अमेरिका की चिंता केवल तैयार उत्पादों तक सीमित नहीं है। किसी भी आधुनिक ड्रोन की क्षमता उसके विभिन्न पुर्जों और सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती है। यदि महत्वपूर्ण घटकों के लिए किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता बनी रहती है,तो आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में घरेलू उद्योग प्रभावित हो सकता है। इसलिए अमेरिकी नीति में अब ड्रोन की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को घरेलू स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

नई अमेरिकी नीति चीन के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है। वैश्विक ड्रोन बाजार में चीन की कंपनियों की मजबूत स्थिति को देखते हुए अमेरिका में नए शुल्क उनके लिए बाजार पहुँच को प्रभावित कर सकते हैं। इसके जवाब में चीन की ओर से भी नए व्यापारिक या निर्यात प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका बनी हुई है। इससे ड्रोन तकनीक को लेकर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और अधिक तेज हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद अब पारंपरिक वस्तुओं से आगे बढ़कर उच्च तकनीक और रणनीतिक उद्योगों तक पहुँच चुका है। ड्रोन तकनीक को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने के बाद यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा का नया मोर्चा बन गया है। आने वाले समय में ड्रोन के अलावा अन्य उन्नत तकनीकों और उनके महत्वपूर्ण घटकों पर भी इसी तरह के प्रतिबंध देखने को मिल सकते हैं।

अमेरिका का कहना है कि नए टैरिफ का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादन को मजबूत करना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है। वहीं चीन के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मतभेदों को और गहरा कर सकता है। 3 सितंबर से प्रस्तावित नए शुल्क लागू होने के बाद अमेरिकी ड्रोन बाजार में कीमतों, आपूर्ति और घरेलू उत्पादन पर इसका वास्तविक प्रभाव सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ड्रोन तकनीक अब केवल एक कारोबारी क्षेत्र नहीं रह गई है,बल्कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार,तकनीकी प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।