स्कॉट मॉरिसन ने पीएम मोदी की विदेश नीति की सराहना की (तस्वीर क्रेडिट@yespunjab)

स्कॉट मॉरिसन ने पीएम मोदी की विदेश नीति की सराहना की,बोले- राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता पर दिया मजबूत जोर

कैनबरा,14 अगस्त (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि उन्होंने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता को मजबूत आधार दिया है। मॉरिसन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति में आए इस बदलाव को आगे बढ़ाने में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इटालियन-भारतीय उद्यमी और विश्लेषक वास शेनॉय के साथ एक साक्षात्कार के दौरान स्कॉट मॉरिसन ने भारत की विदेश नीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और क्वाड के भविष्य को लेकर विस्तार से अपने विचार साझा किए। यह बातचीत ऐसे समय हुई है,जब भारत अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहा है। मॉरिसन ने इस दौरान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति के बदलते स्वरूप पर चर्चा की।

मॉरिसन ने कहा कि भारत आज अपनी स्वतंत्रता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को महत्व देता है। उनका मानना है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ संबंध विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया,जापान,दक्षिण कोरिया और कई अन्य देशों के साथ करीबी संबंध बना रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह किसी दूसरे संबंध को नजरअंदाज कर रहा है। भारत अपनी जरूरत और हितों के अनुसार अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अपने निर्णयों को लेकर स्पष्ट हैं। उनके अनुसार,प्रधानमंत्री मोदी यह तय करने में संकोच नहीं करते कि भारत के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने के लिए किस देश के नेता से बातचीत करनी है या किस देश की यात्रा करनी है। मॉरिसन ने कहा कि दुनिया के हर देश का नेतृत्व अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए इसी तरह काम करता है और भारत भी अपने हितों के अनुरूप विदेश नीति को आकार दे रहा है।

मॉरिसन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता पर बहुत मजबूत जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण भारत को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अपने हितों को बेहतर ढंग से सुरक्षित करने में मदद कर रहा है। उनके अनुसार,भारत अब केवल वैश्विक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं है,बल्कि वह अपने हितों और क्षमताओं के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की भूमिका की भी मॉरिसन ने विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक सक्षम सहयोगी बताया और कहा कि जयशंकर ने भारत की विदेश नीति में नेतृत्व की दिशा को आगे बढ़ाने के लिए बेहद मेहनत की है। मॉरिसन के अनुसार,प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और अलग-अलग देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने में विदेश मंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

मॉरिसन ने भारत के भविष्य की संभावनाओं पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अर्थव्यवस्था,तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में आगे बहुत बड़ी संभावनाएँ मौजूद हैं। विशेष रूप से उन्होंने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को लेकर बड़ा दावा किया। उनका कहना है कि आने वाले 20 से 30 वर्षों में जब भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और अधिक विकसित तथा परिपक्व होगी,तब भारत एक अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता,आर्थिक विस्तार और अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार बढ़ती गतिविधियाँ उसे वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण शक्ति बना सकती हैं। भारत अंतरिक्ष अनुसंधान के साथ-साथ अंतरिक्ष आधारित अर्थव्यवस्था,निजी क्षेत्र की भागीदारी और नई तकनीकों के विकास पर भी ध्यान दे रहा है। मॉरिसन के मुताबिक,इन क्षेत्रों में भारत की क्षमता आने वाले दशकों में उसकी वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।

साक्षात्कार के दौरान क्वाड को लेकर भी मॉरिसन ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि क्वाड की सफलता के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। उनके अनुसार,इस समूह की विशिष्टता ही भारत की भागीदारी से जुड़ी हुई है। भारत के बिना क्वाड का स्वरूप और प्रभाव वैसा नहीं हो सकता,जैसा आज दिखाई देता है।

क्वाड में भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग,समुद्री सुरक्षा,महत्वपूर्ण और उभरती तकनीक,आपूर्ति श्रृंखला तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर यह समूह सहयोग करता है। मॉरिसन ने विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर जोर दिया और कहा कि आने वाले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को और अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता होगी।

मॉरिसन ने क्वाड के एजेंडे में ‘हिंद’ यानी हिंद महासागर क्षेत्र को अधिक महत्व देने की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि क्वाड के एजेंडे को केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए,बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र को भी समान रूप से महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए। उनके अनुसार,हिंद-प्रशांत क्षेत्र की व्यापक सुरक्षा और स्थिरता के लिए हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है और क्वाड को अपनी रणनीति में इसे पर्याप्त प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के स्तर पर भी क्वाड के सुरक्षा पहलू पर बढ़ते ध्यान का उल्लेख किया। मॉरिसन ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके उपसचिव क्वाड की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर काफी सजग हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा के मामले में अमेरिकी रुख मजबूत है और यह केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं है,बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ध्यान में रखता है।

मॉरिसन ने कहा कि वह क्वाड के एजेंडे में हिंद महासागर की भूमिका को और मजबूत किए जाने के बड़े समर्थक हैं। उनके अनुसार,हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक स्थिरता का महत्व बहुत अधिक है। इसलिए क्वाड के सहयोग को व्यापक हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए मॉरिसन ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया आए थे,तब उन्हें उनसे मिलने का अवसर मिला था। उस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर लंबी बातचीत हुई थी। मॉरिसन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इन मुद्दों को लेकर काफी सजग रहते हैं और क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर उनकी गहरी नजर रहती है।

उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की समझ और सक्रियता स्पष्ट दिखाई देती है। मॉरिसन के अनुसार,क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और क्वाड में भारत की भागीदारी इस पूरे समूह को विशेष महत्व देती है।

मॉरिसन की टिप्पणियाँ ऐसे समय में सामने आई हैं,जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक और आर्थिक भूमिका को लगातार विस्तार दे रहा है। भारत एक ओर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी अपने पारंपरिक और नए संबंधों को संतुलित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में इसी संतुलन को राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की प्रशंसा दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार,शिक्षा,रक्षा,समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। क्वाड के मंच पर दोनों देशों की साझेदारी भी इस रिश्ते को नई रणनीतिक दिशा देती है।

मॉरिसन के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि भारत की विदेश नीति और वैश्विक भूमिका को उसके प्रमुख साझेदार किस नजरिए से देखते हैं। राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने, विभिन्न देशों के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखने और हिंद-प्रशांत में सक्रिय भूमिका निभाने की भारत की नीति को लेकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने सकारात्मक रुख जाहिर किया है। साथ ही उन्होंने भारत की आर्थिक, तकनीकी और अंतरिक्ष क्षमता को आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने की संभावना से जोड़ा है।

कुल मिलाकर,स्कॉट मॉरिसन की टिप्पणियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति के प्रति उनके विश्वास को दर्शाती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय हित आधारित और व्यावहारिक विदेश नीति की सराहना करने के साथ ही डॉ. एस जयशंकर के योगदान को भी रेखांकित किया। क्वाड और हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका को निर्णायक बताते हुए मॉरिसन ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था,तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।