विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस (तस्वीर क्रेडिट@jeetusp)

विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान,अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस,महाराष्ट्र एफडीए ने माँगा जवाब

मुंबई,17 अगस्त (युआईटीवी)- बॉलीवुड के तीन चर्चित अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तीनों अभिनेताओं को विमल इलायची के विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। महाराष्ट्र एफडीए का आरोप है कि विज्ञापन भले ही सीधे तौर पर इलायची का प्रचार करता दिखाई देता है,लेकिन इसके जरिए प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड का अप्रत्यक्ष या सरोगेट विज्ञापन किए जाने की आशंका है। राज्य में पान मसाला पर प्रतिबंध लागू होने के कारण एफडीए ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक,महाराष्ट्र एफडीए ने तीनों अभिनेताओं से विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण माँगा है। विभाग यह जानना चाहता है कि विज्ञापन में काम करते समय उन्हें ब्रांड से जुड़े प्रतिबंधित उत्पादों के बारे में जानकारी थी या नहीं और उन्होंने किस आधार पर संबंधित उत्पाद का प्रचार किया। नोटिस जारी होने के बाद अब तीनों अभिनेताओं के जवाब पर निगाहें टिकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार,एफडीए की ओर से अजय देवगन को नोटिस उनके जुहू स्थित आवास पर पहुँचाया गया,जबकि शाहरुख खान को बांद्रा स्थित उनके घर ‘मन्नत’ पर नोटिस दिया गया। वहीं टाइगर श्रॉफ को नोटिस उनकी प्रोडक्शन कंपनी टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी के माध्यम से दिया गया है। एफडीए ने तीनों से विज्ञापन में उनकी भागीदारी और उससे जुड़े तथ्यों को लेकर जवाब माँगा है।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन का कहना है कि विमल ब्रांड की पहचान मुख्य रूप से पान मसाला उत्पादों से जुड़ी हुई है। विभाग के मुताबिक,महाराष्ट्र में संबंधित प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों के निर्माण,भंडारण,परिवहन,वितरण और बिक्री पर रोक लगी हुई है। ऐसे में किसी दूसरे उत्पाद के नाम या ब्रांड पहचान के जरिए पान मसाला का प्रचार किए जाने की आशंका को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।

राज्य में पान मसाला पर मौजूदा प्रतिबंध 13 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त की ओर से जारी आदेश के तहत लागू किया गया है। यह प्रतिबंध एक साल की अवधि के लिए लगाया गया है। इस आदेश के तहत प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण से लेकर उनकी बिक्री और वितरण तक पर निगरानी रखी जा रही है। एफडीए इसी व्यवस्था के तहत विमल इलायची के विज्ञापन की भी जांच कर रहा है।

विभाग ने अपने नोटिस में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम,2006 की धारा 24 का भी हवाला दिया है। इस प्रावधान के तहत ऐसे खाद्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापनों पर रोक का प्रावधान है,जो भ्रामक या उपभोक्ताओं को धोखा देने वाले हो सकते हैं। एफडीए का मानना है कि किसी प्रतिबंधित उत्पाद से जुड़े ब्रांड का प्रचार दूसरे नाम से किया जाना भी जांच के दायरे में आ सकता है। इसी आधार पर विज्ञापन में शामिल प्रमुख चेहरों से जवाब मांगा गया है।

नोटिस में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 53 का भी उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन के प्रकाशन या प्रचार से जुड़े मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान है। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालाँकि,इस मामले में आगे की कार्रवाई तीनों अभिनेताओं के जवाब और एफडीए की जाँच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

सरोगेट विज्ञापन का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष विज्ञापन पर कानूनी और नियामकीय पाबंदियों के कारण कुछ ब्रांड दूसरे उत्पादों, जैसे इलायची या अन्य वस्तुओं, के नाम से विज्ञापन करते हैं। ऐसे विज्ञापनों में वही ब्रांड नाम,लोगो,पैकेजिंग शैली या प्रचार चेहरों का इस्तेमाल किया जाता है,जिनसे उपभोक्ताओं को वास्तविक प्रतिबंधित उत्पाद की याद आ सकती है। इसी वजह से नियामक एजेंसियां ऐसे विज्ञापनों की जांच करती रही हैं।

बॉलीवुड के बड़े सितारों के इन विज्ञापनों में नजर आने को लेकर पहले भी सार्वजनिक बहस होती रही है। लोकप्रिय अभिनेता और अभिनेत्रियां किसी ब्रांड का प्रचार करते हैं,तो उनके प्रशंसकों और उपभोक्ताओं पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण खाद्य और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के विज्ञापन में भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया जाता है।

महाराष्ट्र एफडीए की यह कार्रवाई राज्य में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। विभाग ने हाल के दिनों में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माण,भंडारण और बिक्री पर निगरानी बढ़ाई है। खास तौर पर गुटखा,तंबाकू और निकोटीन वाले प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई भी की जा रही है।

एफडीए की निगरानी केवल पान मसाला या तंबाकू उत्पादों तक सीमित नहीं है। विभाग खाद्य पदार्थों और दूध में मिलावट,स्कूलों के आसपास अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की बिक्री तथा प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माण और वितरण जैसे मामलों पर भी कार्रवाई कर रहा है। खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायतों और निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली गड़बड़ियों के आधार पर विभाग की ओर से आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

शाहरुख खान,अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी होने के बाद अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया उनके जवाब पर निर्भर करेगी। फिलहाल एफडीए ने तीनों से विज्ञापन में उनकी भूमिका और उससे जुड़े तथ्यों पर स्पष्टीकरण माँगा है। नोटिस मिलना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। जाँच और जवाब के आधार पर ही यह तय होगा कि विज्ञापन ने खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं और आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर चर्चित हस्तियों की विज्ञापन जिम्मेदारी और सरोगेट विज्ञापन को लेकर बहस को तेज कर दिया है। महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई से यह संकेत भी मिलता है कि राज्य में प्रतिबंधित खाद्य और तंबाकू से जुड़े उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार पर नियामक एजेंसियाँ सख्त नजर रख रही हैं। अब सभी की निगाहें शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की ओर से दिए जाने वाले जवाब तथा उसके बाद एफडीए की अगली कार्रवाई पर रहेंगी।